August 26, 2017

कंचन : बेटी बहन भाभी से बहू तक का सफ़र - 19

उस शाम शर्मा जी को अपनी बेटी और उसकी सभी सहेलिओं की पॅंटीस के कयि बार दर्शन हुए. सभी ने सफेद रंग की पॅंटी पहन रखी थी. शर्मा जी सोचने लगे कि कहीं सफेद पॅंटी स्कूल की ड्रेस में तो नहीं है. लेकिन सबसे ज़्यादा सुन्दर और सेक्सी उन्हें अपनी बेटी कंचन ही लगी. प्रॅक्टीस ख़तम होने के बाद सभी लड़कियाँ अपने घर चली गयी और कंचन भी नहाने चली गयी. शर्मा जी भी नहाना चाहते थे क्योंकि उन्हें भी तो लड़कियो ने पटक दिया था. कंचन के बाथरूम से बाहर आते ही वो भी बाथरूम में नहाने के लिए घुस गये. अपने कपड़े उतार के जैसे ही उन्होने धोने के लिए डालने चाहे की उनकी नज़र एक पॅंटी पर पर गयी. ये तो वो ही पॅंटी थी जो कंचन ने अभी अभी पहन रखी थी. शर्मा जी से ना रहा गया. उन्होने अपनी बेटी की पॅंटी उठा ली. पॅंटी पसीने में भीगी हुई थी और मिट्टी लगने से मैली भी हो गयी थी. शर्मा जी अपनी बेटी की पॅंटी का निरीक्षण करने लगे. अब आपको ये बताने की ज़रूरत है की सबसे पहले उन्होने कहाँ का निरीक्षण किया होगा ? जी हां आपने ठीक सोचा, सबसे पहले शर्मा जी ने उस इलाक़े का निरीक्षण किया जो इलाक़ा उनकी बेटी की चूत पे लिपटा रहता था. ये इलाक़ा कुकच्छ ज़्यादा मैला लग रहा था. शर्मा जी जानते थे कि इस इलाक़े में सिर्फ़ मिट्टी का रंग ही नहीं बल्कि बिटिया के पेशाब और शायद उसकी चूत के रस का भी रंग शामिल था. वहाँ पे शर्मा जी को एक लंबा काला बाल भी फँसा हुआ नज़र आया. बाप रे ! जिस बेटी को वो अभी तक बच्ची ही समझते थे उसकी चूत पे इतने लंबे बॉल ! शर्मा जी ने तो सपने में भी कल्पना नहीं की थी की उनकी प्यारी सी बच्ची की चूत पे बॉल भी हो सकते हैं. शर्मा जी का लंड हरकत में आ गया. अब उनसे ना रहा गया और उत्सुकतावश उन्होने बेटी की पॅंटी के उस इलाक़े को सूंघ ही लिया. पसीने, पेशाब और 14 साल की कुँवारी चूत की मिली जुली खुश्बू ने शर्मा जी को मदहोश कर दिया. उनका लंड बुरी तरह फंफना गया था. अपनी पत्नी की पॅंटी तो वो कई बार सूंघ चुके थे लेकिन आज पहली बार उन्हें एहसास हुआ की एक कुँवारी चूत और कई बार चुदी हुई चूत की खुश्बू में कितना अंतर होता है. शर्मा जी का दिमाग़ घूम गया और उन्होने अपनी बेटी की पॅंटी को चूमते और उसकी चूत की खुश्बू सूंघते हुए मूठ मारी. जब तक झाड़ नहीं गये और ढेर सारा वीर्य नहीं निकल गया तब तक शर्मा जी को शांति नहीं मिली. झड़ने के बाद शर्मा जी को गिल्टी फील होने लगी. ये क्या किया. अपनी 14 साल की बच्ची के लिए वासना की ये आग! शर्मा जी अपने आप को कोसने लगे और उन्होने अपने आप से वादा किया की आगे से कभी वो ऐसी हरकत नहीं करेंगे. लेकिन उस रात अपनी पत्नी कविता को इतना जम के चोदा की उनकी पत्नी सोचने लगी आज पति देव को ना जाने इतना जोश कहाँ से आया हुआ है.

इस घटना के बाद शर्मा जी ने अपने ऊपर पूरा कंट्रोल रखने की कोशिश की. बेटी के बारे में जब भी ऐसे वैसे विचार मन में आते तो वो तुरंत उन विचारों को मन से निकाल देते. लेकिन उसके बाद भी शर्मा जी ने पाया की उन्हें बेटी के स्कूल से वापस आने का बेसब्री से इंतज़ार रहता है. कारण . अब उन्हें स्कर्ट में बेटी की गोरी गोरी टाँगें बहुत अच्छी लगने लगी थी. जब कभी स्कर्ट थोड़ी ऊपर उठ जाती तो बेटी की गोरी गोरी मांसल जागें देख कर वो मदहोश हो जाते. कंचन थी भी बड़ी लापरवाह, इसलिए शर्मा जी को हफ्ते दो हफ्ते में एक आध बार बिटिया के टाँगों के बीच झाँकने का भी मौका मिल जाता था. लेकिन अभी तक शर्मा जी को बिटिया की पॅंटी की झलक आधे सेकेंड से ज़्यादा नहीं मिल पाई थी. ये झलक मात्र ही शर्मा जी को पागल किए जा रही थी और उनकी उत्सुकता को बढ़ा रही थी. शर्मा जी इस तरह बेटी की टाँगों और उसकी पॅंटी की झलक को आक्सिडेंटल मान कर अपने दिल को तसल्ली देते थे. उन्होने अपने दिल को ये सोच कर भी तसल्ली दे रखी थी कि आख़िर वो बेटी को बचपन में नंगी भी देख चुके हैं. अब अगर उसकी पॅंटी दिख भी गयी तो क्या हुआ? आख़िर है तो उनकी बेटी ही.

शर्मा जी जितना अपने आप को संभालने की कोशिश करते तब तब कोई ऐसी बात हो जाती की शर्मा जी अपना संकल्प नहीं रख पाते. एक दिन कंचन स्कूल से आई. भागती हुई घर में घुसी. उसने दो पोनी टेल्स बना रखी थी. बहुत ही चंचल लग रही थी. शर्मा जी सोफा पे बैठे हुए थे. उसे देखते ही खुश हो कर बोले,

“ आ गयी मेरी बेबी डॉल.”

“ जी, मेरे अच्छे पप्पू.” जल्दी से शर्मा जी के गाल पे किस करती हुई बोली, “ मैं अभी आई. मुझे जल्दी से बाथरूम जाना है. बहुत देर से रोक रखा है.” कंचन अपना स्कूल बॅग वहीं पटक कर बाथरूम की ओर भागी. जल्दी में बाथरूम का दरवाज़ा तक बंद नहीं किया. शर्मा जी भी बेटी के पीछे पीछे चल पड़े. लेकिन बाथरूम का दरवाज़ा खुला देख के रुक गये. फिर ना जाने उनके दिमाग़ में क्या आया, वो बाथरूम के दरवाज़े के बिकुल पास आ कर खड़े हो गये. उनकी बेबी डॉल को शायद बहुत ज़ोर का पेशाब आ रहा था. उसने बाथरूम में घुसते ही जल्दी से पॅंटी नीचे सर्काई और बैठ कर पेशाब करना शुरू कर दिया. प्सस्सस्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्सस्स………सस्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्सस्स की ज़ोरदार आवाज़ से पूरा बातरूम गुंज़्ने लगा. शर्मा जी मन्त्र मुग्ध से खड़े बेटी की चूत से निकलता मधुर संगीत सुन रहे थे. शर्मा जी को औरत की चूत से निकलती हुई ये सुरीली आवाज़ बहुत अच्छी लगती थी. बल्कि वो औरत की चूत से निकलती हुई पेशाब की धार को देख कर मदहोश हो जाते थे. बड़ी मुश्किल से उन्होने दो बार अपनी पत्नी कविता को अपने सामने बैठ कर मूतने के लिए राज़ी किया था. उनका मन तो करता था कि पत्नी को कहें की उनके ऊपर बैठ कर उनके मुँह पे ही मूत ले लेकिन शरम के मारे कभी कह ना पाए. अपनी बेटी की झांतों भरी चूत से निकलती पानी की धार की कल्पना करते करते उनका लंड तन गया था. काफ़ी देर से बिटिया ने पेशाब रोक रखा था. दो मिनिट तक प्सस्सस्स्स्स्स्स्स्स्सस्स………… का मधुर संगीत चलता रहा. जैसे ही प्सस्सस्स………… की आवाज़ आनी बंद हुई शर्मा जी जल्दी से वापस बाहर सोफा पे बैठ गये. इतने में कंचन भी आ गयी और फ्रिज में से बर्गर निकाल कर डाइनिंग टेबल पर खाने के लिए बैठ गयी. जहाँ शर्मा जी बैठे हुए थे वहाँ से डाइनिंग टेबल के नीचे से उन्हे कंचन की टाँगें नज़र आ रही थी.

कंचन अपनी दोनो टाँगें सटा के डाइनिंग चेर पे बैठी हुई थी, जैसा की लड़कियो को सिखाया जाता है. इतने में एक सेकेंड के लिए कंचन की टाँगें चौड़ी हुई और शर्मा जी को उसकी पॅंटी की झलक मिल गयी. चूत पे चिपकी हुई पॅंटी पर एक बड़ा सा गीला दाग था. शर्मा जी का लॉडा फिर से हुंकार उठा.. वो जानते थे कि बिटिया अभी अभी पेशाब कर के आई है और ये पेशाब का ही दाग था. एक बार फिर शर्मा जी के कसमे- वादे हवा हो गये. बेटी उनका जीना हराम करती जा रही थी.

एक दिन कंचन स्कूल से वापस आ कर बाहर लॉन में लगे झूले पे बैठे हुई थी. शर्मा जी भी ऑफीस से लंच के लिए घर आए. शर्मा जी को देखते ही बोली,

“ पापू, हमे थोड़ा झूला दो ना.”

“अरे गुड़िया अपने आप झूल लो. हमे जल्दी वापस ऑफीस जाना है.”

“ प्लीज़ पपूऊ..! सिर्फ़ एक बार !”

“ ठीक है. तुम तो बहुत ज़िद्दी हो.” शर्मा जी बेटी के पीछे खड़े हो कर उसे धक्का लगाने लगे. कंचन जैसे ही आगे को झूलती हुई जाती उसकी स्कर्ट हवा से फूल जाती. ये देख के शर्मा जी के दिमाग़ में आया कि अगर वो सामने की ओर जा के कुर्सी पे बैठ जाएँ तो बिटिया की टाँगों के बीच का नज़ारा देख सकेंगे. शर्मा जी ने ज़ोर से धक्का लगा कर कंचन से कहा,

“बेटी अब तुम अपने आप झूलो हम थोड़ी देर बैठ जाते हैं.”

“ठीक है पपाऊ.”

शर्मा जी सामने कुर्सी पे बैठ गये. कंचन अपने आप ही झूल रही थी. जैसे ही वो शर्मा जी की ओर झूलती हुई आती उसकी स्कर्ट हवा से फूल कर ऊपर की ओर उठ जाती. शर्मा जी को बेटी की स्कर्ट के नीचे से उसकी गोरी गोरी जांघों ऑर पॅंटी के दर्शन हो जाते. पहले तो शर्मा जी को कंचन की पॅंटी की झलक मात्र ही मिल पाती थी लेकिन आज तो काफ़ी देर तक उन्हें बिटिया की पॅंटी नज़र आ रही थी. शर्मा जी को समझते देर नहीं लगी कि बेटी की चूत भी अपनी मा की चूत की तरह खूब फूली हुई है. आज शर्मा जी ने काई बार बिटिया की पॅंटी के दर्शन किए.

इस तरह समय बीत रहा था. कई बार शर्मा जी निश्चय कर लेते कि अब वो कभी बेटी की टाँगों के बीच नहीं झाँकेंगे और फिर काई दिन तक अपने पर कंट्रोल रख के बिटिया की टाँगों के बीच झाँकने से अपने को रोकते थे. लेकिन अक्सर जब बाथरूम में बेटी की उतारी हुई पॅंटी नज़र आ जाती तो अपने ऊपर काबू खो बैठते और उसकी मादक खुश्बू सूँगते हुए मूठ मार लेते. कंचन थी तो बहुत ही चुलबुली. अक्सर जब शर्मा जी टीवी देख रहे होते तो वो उनकी गोद में आ कर बैठ जाती. कबड्डी वाली घटना के बाद से जब भी कंचन शर्मा जी की गोद में बैठती, उसकी मादक जांघों के स्पर्श से शर्मा जी का लंड खड़ा हो जाता. लेकिन शर्मा जी कभी भी अंडरवेर पहनना नहीं भूलते थे. अंडरवेर होने के कारण कंचन को कभी भी शर्मा जी के खड़े लंड का अहसास नहीं हुआ.

देखते ही देखते कंचन 18 साल की हो गयी और अब वो 12थ में आ गयी थी. चुचियो का साइज़ 38 हो चला था. चूटर भी भारी हो गये थे और बहुत फैलते जा रहे थे. बिटिया की छ्होटी सी पॅंटी के बस में अब उसके भारी भारी चूतेर संभालना नहीं रहा था. आधे से ज़्यादा चूतेर तो पॅंटी के बाहर ही रहते थे. जैसे जैसे दिन गुज़रता जाता, कंचन की पॅंटी उन आधे ढके हुए चूतरो पर से भी सिमट कर दोनो चूतरो की दरार में घुसने की कोशिश करती. अब तो बेटी के चूतेर फैल कर बिल्कुल उतने चौड़े हो गये थे जितने उनकी पत्नी के शादी के वक़्त थे. चलती भी चूतरो को मटका के थी. शर्मा जी के दिल पे च्छूरियाँ चल जाती थी. जैसे जैसे बिटिया बड़ी हो रही थी, थोड़ा चुलबुलापन कम हो गया था और उठने बैठने में सावधान हो गयी थी. अब शर्मा जी को उसकी पॅंटी के दर्शन बहुत ही मुश्किल से तीन चार महीने में एक आध बार ही होने लगे. अब तो बेटी अपनी उतारी हुई पॅंटी भी बाथरूम में नहीं छोड़ती थी. बेटी की चूत की सुगंध लिए तो अब शर्मा जी को महीनों बीत गये थे. लकिन अब भी वो उनकी गोद में अक्सर बैठ जाती थी.

फिर एक दिन कुच्छ ऐसी घटना हुई कि कंचन के लिए सब बदल गया. गर्मियों की छुट्टिया चल रही थी. नीलम, कंचन के घर तीन चार दिन रहने आई थी. दोनो सहेलिओं ने खूब मज़ा किया ओर दुनिया भर की गप्पें मारी. रात को नीलम, कंचन के कमरे में ही सोई. अचानक रात को नीलम ने कंचन को जगाया ओर बोली,

“ सुन कंचन, ये करहाने की आवाज़ें कहाँ से आ रही हैं?”

“ ओह हो सो जा नीलम. ये तो मेरी मम्मी की आवाज़ें हैं. बेचारी के पेट में बहुत दर्द रहता है.अक्सर तो सारी रात कहराती रहती है.”

“ कंचन तू सुचमुच बहुत भोली है. ये पेट के दर्द की आवाज़ें नहीं है. ऐसी आवाज़ें तो औरत के मुँह से तब निकलती है जब उसकी चुदाई होती है.” कंचन एकदम गुस्से में बोली,

“ क्या बकवास कर रही है तू मेरी मम्मी ओर पापा के बारे में. मम्मी ने मेरे पूच्छने पर खुद बताया था कि उनके पैट में बहुत दर्द रहता है.”

“ ठीक है तो शर्त लगा ले 50 रुपये की.”

“ लगा ले शर्त, लेकिन मेरे पास 50 रुपये नहीं हैं.”

“ कोई बात नहीं अगर तू हार गयी तो जो मैं कहूँगी वो करना पड़ेगा. बोल मंज़ूर है?”

“ मंज़ूर है. हमारे और मम्मी पापा के कमरे के बीच जो खिरकी है उस पर उनके कमरे की ओर से परदा पड़ा है. कल मैं रात को वो परदा साइड में कर दूँगी और वरामदे की लाइट भी ऑन कर दूँगी जिससे हमे उस कमरे में सब कुच्छ नज़र आएगा. खिड़की से लग के खड़े रहेंगे तो आवाज़ें भी सॉफ सुनाई देंगी. सिर्फ़ कल ही का दिन है हमारे पास क्योंकि परसों मम्मी मैके जा रही है.”

“ वाह! कंचन तेरा दिमाग़ तो बहुत चलता है.”

कंचन को पूरा विश्वास था कि शर्त तो वोही जीतेगी. अगले दिन बड़ी बेसब्री से रात होने का इंतज़ार किया. रात होते ही कंचन ने मम्मी पापा के कमरे का परदा हटा दिया और वरामदे की लाइट ऑन कर दी. फिर उन्होने अपने कमरे की लाइट ऑफ कर दी. अब मम्मी पापा के कमरे में सब कुच्छ सॉफ दिख रहा था.थोरी देर में मम्मी पापा अपने कमरे में आए. उसके बाद जो कुकच्छ हुआ वो देख कर कंचन की आँखें फटी की फटी रह गयीं. पापा मम्मी की बातें सॉफ सुनाई दे रहीं थी. मम्मी बोली,

“ लगता है कंचन और उसकी दोस्त सो गयी. सारा दिन मटर गस्ति करती है.”

“ बच्चे हैं मज़ा करने दो. तो श्रीमती जी हमे अकेला छोड़ कर मैके जा रही हैं. इतने दिन हमारा क्या हाल होगा ये नहीं सोचा.”

“ क्या करूँ जाना तो नहीं चाहती, पर मा बीमार है.”

“ और हमारी बीमारी का इलाज कब करोगी?” पापा मम्मी को अपनी बाहों में खींचते हुए बोले. कंचन के दिल की धड़कन तेज हो गयी. नीलम भी मुस्कुरा रही थी.

“ आपकी बीमारी का इलाज तो रोज़ ही करती हूँ.”

पापा मम्मी को चूमते हुए बोले,

“ आज ऐसी दवाई देती जाओ की अगले 15 दिन दवाई की ज़रूरत ना पड़े.”

“ कॉन सी दवाई चाहिए आपको?” मम्मी मुस्कुराते हुए बोली.

“ ये वाली.” पापा मम्मी की चूत सलवार के ऊपर से दबाते हुए बोले.

“ ओई मा इसस्सस्स….! ले लीजिए ना. किसने रोका है. आज कमरे में लाइट कुच्छ ज़्यादा आ रही है. ठहरिए मैं वरामदे की लाइट बंद करके आती हूँ..”

“ नहीं मेरी जान, रहने दो. बहुत दिनों से तुम्हें ठीक से नंगी भी नहीं देखा.”

“ अच्छा जी! रोज़ रात को तो नंगी करते हैं.”

“ नंगी कर के तो चोदता हूँ मेरी जान लेकिन तुम्हारे नंगे बदन के दर्शन कहाँ हो पाते हैं.” ये कहते हुए पापा ने मम्मी की कमीज़ उतार दी, और सलवार का नाडा भी खींच दिया. नाडा खींचते ही सलवार नीचे गिर पड़ी. अब मम्मी सिर्फ़ पिंक ब्रा और पॅंटी में थी.

“ नहीं नाअ! प्लीईआसए……लाइट बंद कर दीजिए. मुझे शरम आ रही है. अब मैं बहुत मोटी हो गयी हूँ.”

“ नहीं मेरी रानी तुम अब भी बहुत सेक्सी हो. तुम्हें देख कर तो मेरा लंड सारा दिन खड़ा रहता है.” पापा मम्मी के होंठ चूस रहे थे और दोनो हाथों से मोटे मोटे चूतरो को सहला रहे थे. मम्मी की पॅंटी उनके विशाल चूतरो के बीच में धँसी जा रही थी.

“ ये तो पागल है” मम्मी प्यार से पापा के लंड को लूँगी के ऊपर से मुसलते हुए बोली.

नीलम, कंचन की चूत पर चुटकी काटते हुए बोली “ला मेरे 50 रुपये.”

“ शट अप अभी कुच्छ हुआ तो नहीं ना. जब कुच्छ होगा तो बोलना.” कंचन का इतना कहना ही था कि पापा ने मम्मी की ब्रा उतार दी और पनटी नीचे खिसका दी. मम्मी बिल्कुल नंगी थी. 36 साल की उम्र में भी बहुत ही सेक्सी लग रही थी. बड़ी बड़ी चूचियाँ बहुत टाइट तो नहीं लेकिन ढीली भी नहीं थी. गोरी गोरी मोटी मोटी जंघें ओर फैले हुए भारी विशाल चूतर बहुत ही सेक्सी लग रहे थे. इतने मोटे चूतरो के ऊपर कमर काफ़ी पतली लग रही थी. चूत पर बहुत ही घने काले बॉल थे.

“ ऊफ़ ! मेरी जान तुम तो बला की सेक्सी लग रही हो. कोई कह नहीं सकता की दो जवान बच्चों की मा हो. मेरा लंड तो काबू में नहीं आ रहा”

“ किसने कहा है आपको काबू में करने के लिए. आज़ाद कर दीजिए बेचारे को.” ये कह कर मम्मी ने पापा की लूँगी खींच दी. कंचन तो बेहोश होते होते बची. नीलम के पसीने छ्छूट गये. पापा का लंबा मोटा लंड तना हुआ था. कंचन तो पहली बार किसी मरद का खड़ा हुआ लंड देख रही थी. साधु महाराज के मुक़ाबले का लंड था. काला मोटा तना हुआ लंड बहुत ही भयानक लग रहा था. मम्मी नीचे बैठ गयी और पापा का लंड अब बिल्कुल उसके होंठों के सामने था.

“ मुझे भी आपके इस 9 इंच के कॅप्सुल की बहुत ज़रूरत है.” ये कह कर मम्मी ने पापा के लंड को मुँह में डाल लिया और चूसने लगी. लंड इतना मोटा था की मम्मी के होंठों में बड़ी मुश्किल से आ रहा था. मम्मी कभी पूरे लंड पर जीभ फेर के चाटती और कभी लंड के नीच लटकते हुए बॉल्स को. पापा ने मम्मी का सिर दोनो हाथों में पकड़ कर धक्के लगाने शुरू कर दिए. उनका मूसल मम्मी के मुँह में अंदर बाहर होने लगा. बेचारी 4 या 5 इंच ही मुँह में ले पा रही थी. थोरी देर बाद पापा ने मम्मी को बिस्तेर पर लिटा दिया और बोले,

“ कविता, अपनी टाँगें खोल कर एक बार अपनी प्यारी चूत के दर्शन तो करा दो.”

“ हाई राम, रोज़ ही तो देखते हैं. पहले लाइट बंद कीजिए.” मम्मी अपनी टाँगों को चिपका कर बोली.

“ अब मैं नंगा तो बाहर जा नहीं सकता. दिखा भी दो मेरी जान. जो चीज़ रोज़ चुदवाती हो उसे दिखाने में कैसी शरम.” ये कह कर पापा ने मम्मी की टाँगें फैला दी. मम्मी ने मारे शरम के दोनो हाथों से अपना मुँह ढक लिया. मोटी मोटी गोरी जांघों के बीच में काले घने बालों से भरी चूत सॉफ नज़र आ रही थी. क्या फूली हुई चूत थी!

“ कविता तुम्हारी चूत बहुत ही सेक्सी है. तभी तो मैं इसका इतना दीवाना हूँ. कितनी फूली हुई है.” कंचन सोचने लगी मेरी भी चूत काफ़ी फूली हुई है लेकिन मम्मी की तो बहुत ही ज़्यादा फूली हुई थी.

“ इस 9 इंच के मूसल से रोज़ चुदवाने के बाद फूलेगी नहीं तो और क्या होगा. मैं बहुत भाग्यशाली हूँ जो इस उम्र में भी आपको मेरी चूत इतनी अच्छी लगती है. वरना इस उम्र में कौन मर्द अपनी बीवी को रोज़ चोदता है.”

पापा ने मम्मी की टाँगें और चौड़ी कर दी और जीभ निकाल कर चूत चाटने लगे.

“ आआआः ..आ.एयेए..ऊवू! बहुत अक्च्छा लग रहा है. बाल आपके मुँह में तो नहीं जा रहे.?” मम्मी चूतर उच्छाल कर अपनी चूत पापा के मुँह पर रगड़ रही थी. पापा कभी मम्मी की चूत चाटते और कभी बड़ी बड़ी चूचिओ को चूस्ते. थोरी देर बाद 69 की मुद्रा में आ गये. अब मम्मी की चूत पापा के मुँह पर थी और पापा का मोटा लंड मम्मी के मुँह में. काफ़ी देर तक चूमा चॅटी का खेल चलता रहा. फिर पापा ने मम्मी को बिस्तेर पर लिटा कर उनकी मोटी जांघों को चौड़ा किया और लंड का सुपरा उनकी चूत के मुँह पर रख कर रगड़ने लगे.

क्रमशः.........

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