August 26, 2017

कंचन : बेटी बहन भाभी से बहू तक का सफ़र - 17

विकी ने पहले कैंची से मेरी झांतों को काटना शुरू किया. जब झाँटें इतनी छ्होटी हो गयी की अब कैंची से काटना मुश्किल हो गया तब विकी ने शेविंग क्रीम निकाला. झाँटें काटने से मेरी पूरी चूत की बनावट नज़र आनी शुरू हो गयी थी. मुझे भी अपनी चूत की बनावट देखे 12 साल हो गये थे. विकी ने खूब सारा शेविंग क्रीम मेरी चूत के चारों ओर लगाया और फिर रेज़र से बाल साफ करने लगा. जैसे जैसे बाल साफ होते जा रहे थे मेरी गोरी चिकनी स्किन उभरती जा रही थी. विकी ने बड़े प्यार से शेव कर रहा था. थोड़ी देर में बोला,

“ दीदी अब लेट जाओ और पैर ऊपर की ओर मोड़ के फैला दो.” मैं लेट गयी और टाँगें मोड़ के छाती से लगा दी. बिल्कुल चुदवाने की मुद्रा थी. विकी ने उस जगह भी शेविंग क्रीम लगाया जहाँ वो मेरे बैठे होने के कारण नहीं लगा सका था. बाल तो मेरी गांद तक थे. विकी ने अच्छी तरह शेविंग क्रीम लगा के रेज़र से बाल सॉफ कर दिए. पूरी चूत शेव करने के बाद उसने गरम पानी से चूत को साफ किया. फिर बोला “ दीदी देखो अब ठीक है?” मैने टाँगों के बीच देखा तो अपनी ही चूत को पहचान ना पाई. कितनी गोरी, सुंदर,सॉफ और चिकनी लग रही थी. कितने फूली हुई थी. विकी के लंड ने इतनी सूजा दी थी कि अब तो किसी डबल रोटी से भी डबल लग रही थी. दोनो फांकों के बीच से निकले होंठ इतने बड़े थे मानो छ्होटा सा लंड हो. विकी भी मेरी चूत को घूरे जा रहा था. उसके लंड ने तो लूँगी का टेंट बना दिया था. मैं उसके लंड की ओर इशारा करके बोली,

“ विकी तू तो शायद मुझे एक भाई की नज़र से देख रहा है ना.?” विकी का चेहरा लाल हो गया,

“ दीदी आपकी ये है ही इतनी खूबसूरत की भाई का मन भी डोल जाए. ये तो बहुत ज़्यादा सूज गयी है, मैं सेक के दवाई लगा देता हूँ. लेकिन सेकेंगे कैसे?”

“ कोई बात नहीं बिना सेके ही दवाई लगा दे.”

“ नहीं दीदी ऐसे नहीं हो सकता. मैं सेकने का इंतज़ाम करता हूँ.” ये कह कर विकी बाहर जाने को हुआ. मैं उसे रोकते हुए बोली,

“ कहाँ जा रहा है? मम्मी पापा उठ जाएँगे.” विकी वापस आ गया.“ ये बात तो ठीक है. अच्छा, मेरे पास एक उपाय है. अगर आप मानो तो बोलूं.”

“ बोल तो. पता तो लगे कौन सा उपाय है.”

“ दीदी जब जानवर को चोट लगती है तो वो अपने जख्म को चाट के सेकता है और उसकी चोट ठीक हो जाती है. वो तो दवाई भी नहीं लगाता.”

“ तेरी बात ठीक है. लेकिन ना तो मैं जानवर हूँ और ना ही मेरी जीभ मेरे टाँगों के बीच में पहुँचेगी.”

“ मैने कब कहा आपकी जीभ आपकी टाँगों के बीच में पहुँचेगी? लेकिन मेरी जीभ तो पहुँच सकती है ना.”

“ ओ ! तो अब समझी. तेरी नियत फिर से खराब हो रही है.”

“ नहीं दीदी मेरी नीयत बिल्कुल खराब नहीं है. सेकने का और कोई रास्ता भी तो नहीं है. मैं आपको प्रॉमिस करता हूँ कोई ग़लत काम नहीं करूँगा. सिर्फ़ चाट के सेक दूँगा और फिर दवाई लगा देंगे.” चूत की चटाई की बात सुन के ही मेरी चूत गीली होने लगी थी. गीली तो जब विकी शेव कर रहा था तभी हो गयी थी लेकिन अब तो और भी ज़्यादा गीली हो गयी थी. मैं अपनी उत्तेजना को च्छूपाते हुए बोली,

“ देख विकी तुझे मेरी कसम यदि तूने कोई ग़लत काम किया तो. सिर्फ़ सेकना और दवाई लगाना है. कुच्छ और किया तो कभी बात नहीं करूँगी.”

“ आपकी कसम दीदी, और कुच्छ नहीं करूँगा, चलो गाउन उतार दो और लेट जाओ.”

“ अच्छा बदमाश गाउन क्यों उतारू? दीदी को नंगी करने का बहुत शौक हो गया है? वैसे भी तो सेक सकता है.”

“ दीदी वैसे अच्छी तरह नहीं सेक पाउन्गा. उतार भी दो ना. मेरे सामने कपड़े उतारने में क्या शरमाना?”

“ ठीक है उतार देती हूँ, लेकिन कोई शरारत नहीं करना.” मैं तो नंगी होना ही चाहती थी. मैने गाउन उतार दिया और बिस्तेर पे चित लेट गयी.विकी ने मेरी टाँगें चौड़ी कर दी. टाँगों के बीच का नज़ारा देखते ही उसका लंड फंफनाने लगा. वो जल्दी से मेरी टाँगों के बीच में बैठ गया और अपनी जीभ मेरी चूत से लगा दी. ऊऊफ़ ! विकी की गरम गरम जीभ बहुत अच्छी लग रही थी. मुझे अहसास हुआ कि यदि चूत चटवानी हो तो झाँटें नहीं होनी चाहिए. एक नया सा अहसास हो रहा था. मेरी चूत बुरी तरह से गीली हो रही थी. मुझे डर था कि कहीं मेरी चूत का रस बाहर ना निकल आए. विकी मेरी चूत के छेद के चारों ओर चाट रहा था लेकिन एक बार भी छेद को नहीं चॅटा और ना ही जीभ को छेद में डाला. मेरी वासना बढ़ती जा रही थी लेकिन आज चुदवाना ख़तरे से खाली नहीं था. जब मुझ से और नहीं सहा गया तो मैने विकी का सिर पकड़ के चूत का छेद उसके होंठों पे रगड़ दिया. मेरी चूत के होंठ उसके चेहरे पे रगड़ गये और उसका चेहरा मेरी चूत के रस से सन गया.

“ दीदी क्या कर रही हो? मैं तो ठीक से सेक रहा था.”

“ नहीं मेरे राजा तू ठीक से नहीं सेक रहा था. जिस जगह सबसे ज़्यादा चोट लगी है वहाँ तो तूने सेका ही नहीं. उसके चारों ओर सेके जा रहा है.”

“ सॉरी दीदी वहाँ भी सेक देता हूँ.” ये कह के विकी ने मेरी चूत में मुँह दे दिया और जीभ चूत के अंडर घुसेड दी. अब तो बहुत मज़ा आ रहा था. मैं तो झरने वाली हो रही थी. विकी ने मेरी टाँगें मोड़ के मेरे सीने से चिपका दी. इस मुद्रा में मेरे चूतेर और ऊपेर हो गये मेरी गांद का छेद विकी के मुँह के सामने आ गया.विकी ने मेरी गांद को भी चाटना शुरू कर दिया और बीच बीच में जीभ गांद के छेद में भी घुसेड देता. बहुत मज़ा आ रहा था. विकी के होंठ मेरी चूत के रस से गीले हो गये. विकी बोला,

“दीदी, आपकी चूत तो बिल्कुल गीली है. इसका मतलब ये कुच्छ चाहती है.”“हट बदमाश ये कुच्छ नहीं चाहती. कोई मरद इस तरह से किसी औरत की चूत चॅटेगा तो क्या गीली नहीं होगी? लेकिन तेरा लंड भी तो फंफनाया हुआ है.”

“ दीदी आपके जैसी खूबसूरत औरत जिसके पीछे सारा शहर जान देता है, किसी मरद के सामने चूत खोल के बिल्कुल नंगी पड़ी हुई हो और वो मरद उसकी सेक्सी चूत चाट रहा हो तो क्या उसका लंड खड़ा नहीं होगा. आपको नंगी देख कर तो विश्वामित्रा जैसे सन्यासी का मन भी डोल जाए. मेरी तो किस्मत खराब है. मेरे लंड की प्यास तो अब कभी नहीं बुझेगी.”

“ ऐसा मत बोल विकी. जब तेरी शादी हो जाएगी तो तेरी तू अपनी बीवी को रोज़ चोदना.”

“ दीदी आपको चोदने के बाद अब किसी और को चोदने का मन नहीं करता.”

“ सब ठीक हो जाएगा मेरे राजा. आख़िर तू मुझे सारी ज़िंदगी तो नहीं चोद सकता.”

“ जब तक चोद सकता हूँ तब तक भी तो आप चोदने नहीं दे रही हो.”

“अच्छा ! तो तेरे प्रॉमिस का क्या हुआ.?”

“ दीदी आपको चोदने के लिए तो मैं कोई भी प्रॉमिस तोड़ सकता हूँ.”

“ विकी मैं तेरे दिल की हालत समझती हूँ. मुझे मालूम है कि कोई भी मरद इस तरह किसी औरत को नंगी करके उसकी चूत चाते तो अपने आप को आख़िर कब तक कंट्रोल कर सकता है? एक काम कर सकती हूँ. जब तू मेरी चूत को सैक के दवाई लगा देगा उसके बाद तू अपने लंड को मेरे मुँह में डाल सकता है. मैं तुझे उतना ही मज़ा दूँगी जितना तुझे चोदने से मिलेगा. इस तरह तेरे लंड की प्यास भी बुझ जाएगी.”

“ सच दीदी? आप बहुत अच्छी हो. लेकिन आप जानती हो चोदने और लंड को चूसने का अलग अलग मज़ा होता है. दोनो को कंपेर नहीं कर सकते. मैं आपसे एक बात कहूँ तो बुरा तो नहीं मानोगी?”

“ नहीं मेरे राजा बोल, क्या बात है?”

“ जब आप ठीक हो जाओगी, तो क्या मैं आपको तब तक चोद सकता हूँ जब तक आप जीजाजी के पास नहीं जाती?”

“ तू तो बहुत चालाक है. ठीक है चोद लेना. मैं तो वापस तब तक नहीं जा सकती जब तक मेरी चूत पे बाल नहीं आ जाते. तेरे जीजाजी को क्या कहूँगी. उन्हें तो मेरी चूत के बाल बहुत पसंद हैं.”

“ फिर तो मज़ा आ जाएगा. सच रोज़ चोदुन्गा आपको.”

“ जब तक मैं यहाँ हूँ तब तक जी भर के चोद लेना अपनी दीदी को. अब तो खुश है ना?”

उसके बाद विकी ने थोरी देर और मेरी चूत और गांद को चाता. मैं इस बीच दो बार झाड़ चुकी थी. फिर उसने मेरी चूत और गांद के छेद पे दवाई लगा दी. दवाई लगाने के बाद उसने अपनी लूँगी उतार दी और अपने फँफनाए हुए लॉड को मेरे होंठों पे टीका दिया. मैं तो उसके गधे जैसे लंड को चूसने के लिए उतावली हो ही रही थी.

विकी के मोटे लंड को मुँह में लेने के लिए मुझे पूरा मुँह खोलना पड़ा. मैं बड़े प्यार से लंड के सुपरे को चूसने लगी. धीरे धीरे पूरे लंड को चाटने लगी और उसके नीचे लटकते हुए बड़े बड़े बॉल्स को भी सहलाने और चूमने लगी. काफ देर तक मैने विकी के मूसल को चूसा. विकी ने जोश में आके लंड मेरे मुँह में पेलना शुरू कर दिया. उसका लंड मेरे गले तक घुस गया था. विकी ने मेरा मुँह पकड़ के धक्के लगाने शुरू कर दिए. वो अपने एक फुट लंबे लंड को सुपरे तक बाहर खींचता और फिर पूरा लंड मेरे मुँह में पेलने की कोशिश करता. अब एक फुट लंबा लंड तो मुँह में जाना मुश्किल था लेकिन 8 इंच तो घुस ही जाता था. विकी मेरे मुँह को ऐसे चोद रहा था जैसे मेरी चूत चोद रहा हो. मैं उसके लटकते हुए बॉल्स को दबा और सहला रही थी. करीब आधे घंटे तक भयंकर धक्के लगाने के बाद विकी झाड़ गया और ढेर सारा वीर्य मेरे मुँह में निकाल दिया. ऐसा लगता था था कि कभी उसका वीर्य निकलना बंद ही नहीं होगा. मैं जल्दी जल्दी उसके वीर्य को पीती जा रही थी, लेकिन फिर भी बहुत सारा वीर्य मेरे मुँह से निकल कर टपकने लगा. विकी के लॉड को कुच्छ राहत मिली. अब ये रोज़ का सिलसिला हो गया. विकी रोज़ रात को आता, मेरी चूत और गांद को चाट के सैकता और दवाई लगाने के बाद मेरे मुँह में अपना लंड पेल कर अपनी प्यास बुझाता.

एक हफ्ते के बाद मैं फिर अपनी सहेली वीना के पास चेक अप कराने गयी. उसने अच्छी तरह से मेरी चूत और गांद की जाँच की.

“कंचन तेरी चूत और गांद तो बहुत जल्दी ठीक हो गयी, लगता है जीजाजी ने बहुत सेवा की है. देख कंचन मैं एक बार फिर से कह देती हूँ अब उस आदमी को भूल के भी गांद मत देना.”

“नहीं दूँगी डॉक्टर साहिबा.”

“कुच्छ दिन और सेक कर ले तो अच्छा है. लेकिन अब दवाई लगाने की ज़रूरत नहीं है. वैसे किससे सेक करवा रही है?”

“तेरे जीजाजी से और किससे?”

मैने विकी को बताया कि डॉक्टर ने कुच्छ दिन और सेक करने को कहा है लेकिन गांद देने को बिल्कुल मना किया है. ये सुन कर विकी का दिल टूट सा गया.

“दीदी जिस गांद के लिए ज़िंदगी भर तडपा हूँ वो ही नहीं दोगि तो कैसे जीऊँगा?”

“ हाई मेरे प्यारे भैया, तेरे लिए तो जान भी दे दूं. तुझे गांद नहीं दूँगी तो किसे दूँगी? देख डॉक्टर ने एक जेल्ली दी है. आगे से ये जेल्ली मेरी गांद में और अपने मूसल पे लगा लेना. लेकिन गांद थोड़ा धीरे धीरे मारा कर. तू तो गधा है लेकिन मैं तो गधी नहीं हूँ ना. मैं तो औरत हूँ.”

“हाई दीदी आप कितनी अच्छी हो. आप की कसम आगे से ऐसे आपकी गांद मारूँगा की आपको पता ही नहीं चलेगा.”

अब विकी ने मेरी चूत और गांद को सेकने का एक नया तरीका निकाल लिया था. वो अब मेरी चूत और गांद पे कभी मक्खन और कभी शहद लगा कर चाटने लगा. जी भर चाटने के बाद रात भर मुझे चोद्ता और गांद भी मारता. गांद मारने के बाद वो बड़े प्यार से मेरे चूतरो को चौड़ा करके अपने होंठों से मेरी गांद के लाल हुए छेद को चूमता और जीभ अंडर डाल कर चाटता. करीब करीब एक महीना हो चला था. अब मेरी चूत पे फिर से झांतों का घना जंगल हो गया था. पिया के घर जाने के दिन भी नज़दीक आ गये थे.

मुझे मायके आए अब बहुत दिन हो गये थे. मायके में मेरे और मेरे छ्होटे भाई विकी के बीच जो कुच्छ हुआ वो तो आप पढ़ ही चुके हैं. अब पति के घर वापस जाने का वक़्त भी आ गया था. विकी कुच्छ दिनों के लिए अपने कॉलेज की फुटबॉल टीम के साथ मॅच खेलने भोपाल गया हुआ था. पापा भी अगले दिन 15 दिनों के लिए टूर पे जाने वाले थे. उस रात मैं मम्मी को दूध देने उनके कमरे जा रही थी की मैने देखा मम्मी के कमरे की लाइट तो बंद थी. मुझे लगा कि मम्मी पापा सो गये होंगे. लेकिन जब मैं उनके दरवाज़े के पास पहुँची तो मुझे अंडर से फुसफुसाने की आवाज़ें सॉफ सुनाई दे रही थी. मेरे दिमाग़ में बचपन की वो यादें ताज़ा हो गयी जब मैने और मेरी सहेली नीलम ने पापा, मम्मी की चुदाई कई बार देखी थी. मेरे मन में ये जानने की उत्सुकता जागी कि क्या पापा मम्मी अब भी उसी तरह चुदाई करते हैं. मैं चुप चाप उनके कमरे की खिड़की के पास खड़ी हो गयी. बाथरूम की लाइट ऑन थी ओर कमरे में हल्का सा उजाला था. मम्मी पेटिकोट ओर ब्लाउस में पैट के बल लेती हुई थी. पापा सिर्फ़ लूँगी में खड़े हुए थे. अचानक पापा ने मम्मी से पूचछा,

“कविता ! कंचन कहाँ है ?”

मैं बुरी तरह चोंक गयी. ये अचानक पापा को मेरी याद कहाँ से आ गयी.

“अपने कमरे में होगी. वापस पति के घर जाने की तायारी कर रही है. आप क्यों पूछ रहें हैं ?”

“वैसे ही पूछा.”

“इस वक़्त कंचन की याद कैसे आ गयी ?”

“एक बार मुझे ऐसा लगा जैसे तुम नहीं कंचन लेटी हुई है.”

“ओ ! तो अब आप अपनी बीवी को भी नहीं पहचानते ?”

“नहीं मेरी जान ऐसी बात नहीं है. इस हल्की सी रोशनी में पीछे से तुम बिल्कुल कंचन की तरह लग रही हो.” मेरा दिल अब ज़ोर ज़ोर से धड़कने लगा. मैं कान लगा के सुनने लगी.

“अच्छा जी ! 25 साल से आप अपनी बीवी के पिच्छवाड़े को सिर्फ़ देख ही नहीं बल्कि ना जाने कितनी बार चोद भी चुके हैं, फिर भी आपने हमे पीछे से कंचन समझ लिया. हमें तो दाल में कुच्छ काला लगता है.”

“कैसी बातें करती हो कविता ? दाल में क्या काला होगा?”

“हमे तो पूरी दाल ही काली लग रही है. सच सच बताइए कंचन आपको अच्छी लगती है?”

“अच्छी क्यों नहीं लगेगी ? आख़िर हमारी बेटी जो है.”

“बेटी की तरह नहीं. एक औरत की तरह नहीं अच्छी लगती है ?”

“तुम पागल तो नहीं हो गयी हो?” पापा मम्मी का पेटिकोट चूतरो के ऊपर खिसकाने की कोशिश करते हुए बोले.

“छोड़िए भी हमे. जैसे हमे कुच्छ मालूम ही नहीं. जब तक आप सच नहीं बोलेंगे, तब तक हमे आपके साथ कुच्छ नहीं करना.” मम्मी बनावटी गुस्से से उनका हाथ अपने चूतरो से हटाती हुई बोली. पापा बुरी तरह वासना की आग में जल रहे थे. आज नहीं चोद सके तो 15 दिन तक ब्रह्मचारी बन के रहना पड़ेगा.

“इतना गुस्सा ना करो मेरी जान.”

“तो फिर सच सच बता दीजिए. हम जानते हैं आपकी ग़लती नहीं है. हमारी बेटी जवान हो गयी है. और शादी के बाद से तो उसका जिस्म भी भर गया है. किसी भी मरद की नज़र एक बार तो तो ज़रूर उस पर जाएगी.” मम्मी पापा को उकसाते हुए बोली. ये सुन कर पापा की कुच्छ हिम्मत बढ़ी और वो थोरे हिचकिचाते हुए बोले,

“तुम ठीक कहती हो कविता. शादी के बाद से कंचन का जिस्म भर गया है. अब तो उसके कपड़े उसकी जवानी को नहीं संभाल पाते हैं. ऊपर से नहा के पूरे घर में सिर्फ़ पेटिकोट और ब्लाउस में ही घूमती रहती है. ऐसे में किसी भी मरद की नज़र उस पर जाएगी ना ?”

“मैं आपको कहाँ कुच्छ कह रही हूँ? आपकी बात बिल्कुल ठीक है. शादी हो गयी लेकिन अभी तक बचपाना नहीं गया है. अपने आप को छ्होटा ही समझती है”

“ऊओफ़ छ्होटी कहाँ है अब ? पेटिकोट और ब्लाउस में से तो उसकी जवानी गिरने को होती है.” पापा एक लंबी आह भर के बोले.

“हाई, लगता है आपको अपनी बेटी की जवानी तंग करने लगी है. कहीं उसे देख के खड़ा तो नहीं होने लगा है?”

“देखो मेरी जान ग़लत मत समझना लेकिन जब वो गीले पेटिकोट में घूमती रहती है तो किसी भी मरद का खड़ा हो जाएगा.”

“आपका अपनी बेटी की जवानी को भोगने का मन नहीं करता ?”

“तुम तो सुचमुच पागल हो गयी हो. हम अपनी ही बेटी के साथ ये सब कैसे कर सकते हैं?” मम्मी ने पापा की लूँगी खीच ली. मैं तो पापा का मोटा काला तना हुआ लॉडा देख के घबरा ही गयी. आज बरसों बाद पापा का लॉडा देख रही थी. मम्मी पापा के तने हुए लंड को प्यार से सहलाते हुए बोली,

“हम कुच्छ करने को कहाँ कह रहे हैं? मन करना और सुचमुच कुच्छ करने में तो बहुत अंतर है. बोलिए बेटी की जवानी भोगने का मन तो करता होगा?”

“हां…. इस तरह उसे देख कर करता तो है. लेकिन हम ऐसा कभी करेंगे नहीं.”

अब तो बात बिल्कुल सॉफ थी. पापा भी मुझे वासना की नज़र से देखते थे ये जान कर मैं बहुत खुश थी. जिस बेटी को देख कर बाप का भी मन डोल जाए उसमें कुच्छ तो बात होगी.

“अच्छा चलिए आज रात आप हमे कंचन समझ लीजिए. हम आपको पापा कहेंगे और आप हमे बेटी कहिए. ठीक है पापा?” मम्मी उन्हें चिढ़ाती हुई बोली.

“ये क्या मज़ाक है कविता ?”

“कविता नहीं, कंचन! अगर आज रात आपको कुच्छ चाहिए तो हमे कंचन समझ कर ले लीजिए. नहीं तो चुप चाप सो जाइए.”

“आज तुम्हें ये क्या हो गया है कविता?”

“फिर कविता? कविता नहीं कंचन. ही पापा आपको हमारे नितूम्ब बहुत अच्छे लगते है ना? हमे भी आपका ये मोटा लंड बहुत अच्छा लगता है. चोदिये ना आज अपने इस मोटे लॉड से अपनी बेटी को.” मम्मी पापा के लंड पे जीभ फेरते हुए बोली.

क्रमशः.........

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