मैं समझ गयी, ज़रूर वो कोई गंदा नॉवेल पढ़ रहा था. मैं उसके कमरे में गयी. मुझे देख कर वो नॉवेल च्छुपाने की कोशिश करने लगा. मैने उसकी ओर जाते हुए पूचछा,
“ विकी क्या पढ़ रहा है?”
“ कुच्छ नहीं दीदी ऐसे ही”
“ मुझे दिखा क्या है.”
“ नहीं दीदी क्या देखोगी, ये तो हिस्टरी की किताब है.”
मैने झपट्टा मार के विकी से किताब छ्चीन ली. विकी ने वापस किताब छीनने की कोशिश की लेकिन में अपने कमरे में भाग गयी और अंडर आके लाइट बंद करके एक कोने में छिप गयी. विकी भी मेरे पीछे भागा. कमरे में आके जब उसकी आँखें अंधेरे में अड्जस्ट हुई तो उसने मुझे कोने में च्छूपा देख लिया और मेरे साथ छीना झपटी करने लगा. उसने किताब वापस छीन ली. मैने उसे ज़ोर से धक्का दे के अपने बिस्तेर पे गिरा दिया और उसके सीने पे चढ़ बैठी. विकी चित पड़ा हुआ था. मेरा गाउन छ्होटा सा तो था ही उसके ऊपर बैठने के कारण सामने से खुल गया. मेरी नंगी चूत विकी के सीने से टच करने लगी, लेकिन अंधेरा होने के कारण वो देख नहीं सका. मैने विकी को गुदगुदाना शुरू कर दिया और थोड़ा सा सरक के नीचे की ओर हो गयी. नीचे की ओर सरकने से विकी का लंड मेरे भारी नितंबों के नीचे दब गया. ऊऊफ़! उसका लंड मेरे नंगे चूतरो के नीचे बिल्कुल नंगा था! शायद छ्चीना झपटी में विकी की लूँगी खुल गयी थी. लंड खड़ा होने लगा था लेकिन बेचारा मेरे भारी चूतरो के नीचे दबे होने का कारण उसके पेट से चिपका हुआ था. बाप रे! इतना लंबा था कि उसकी नाभि तक पहुँच रहा था. मैं सोचने लगी कि जो लॉडा इसकी नाभि तक पहुँच रहा है वो तो मेरी चूत फाड़ के छाती तक घुस जाएगा. अब तो चाहे चूत फॅट जाए मैने चुदवाने की ठान ली थी. मेरा बदन वासना की आग में जलने लगा. इतने मोटे लंड का स्पर्श पा कर मेरी चूत रस छ्चोड़ने लगी. मैं विकी को गुदगुदाने के बहाने उसके ऊपर आगे पीछे होने लगी और उसके मूसल को अपने चूतरो की दरार में रगड़ने लगी. कभी थोडा आगे झुक जाती तो उसका मोटा लॉडा मेरी चूत की दोनो फांकों के बीच फँस जाता और गीली चूत उसके लंड पे रगड़ जाती. मेरी चूत के रस से उसका लॉड के नीचे का भाग बॉल्स से ले कर सुपरे तक गीला हो गया था. अब तो मैं उसके लंड पे आगे पीछे फिसल रही थी. बहुत मज़ा आ रहा था. बड़ा ही मादक खेल था. अकसर उसके लंड का सुपरा मेरी चूत के होंठों को चूम लेता और छेद में दाखिल होने की कोशिश करता. विकी ने जिस हाथ में किताब पकड़ रखी थी उसने उस हाथ को अपने सिर के ऊपर सीधा कर रखा था जिससे वो मेरी पहुँच से बाहर हो गया था. किताब तक पहुँचने के लिए आगे सरकना ज़रूरी था. ये तो बहुत अच्छा मोका था. आगे सरकने के बहाने मैं अपनी चूत विकी के मुँह पे रगड़ सकती थी. मुझे अच्छी तरह याद था जब पिच्छली बार मैने अपनी चूत विकी के मुँह पर रगडी थी. लेकिन उस वक़्त मैने पॅंटी पहनी हुई थी. किताब छ्चीनने के बहाने मैं तेज़ी से आगे की ओर हुई. अब मेरी चूत ठीक विकी के मुँह के ऊपर थी. मैने झपट्टा मारा और उसके हाथ से किताब छ्चीनने के बहाने उसके मुँह पर गिर गयी. ऊऊओफ़! मेरी नंगी गीली चूत विकी के होंठों से चिपक गयी. मैने अपनी चूत को 5 सेकेंड तक विकी के मुँह पर ज़ोर से दबा दिया. मेरी चूत इतना रस छोड़ रही थी कि विकी के होंठ और मुँह गीले हो गये. ये ही नहीं मेरी झाँटें भी उसके मुँह में घुस गयी. विकी हड़बड़ा गया और मैं किताब छ्चीनने में कामयाब हो गयी. किताब छ्चीन के मैं जैसे ही उठने लगी विकी ने मुझे गिरा लिया और मेरे ऊपर चढ़ बैठा. अब मैं पेट के बल पड़ी हुई थी और विकी मेरी पीठ पर बैठा हुआ था. मैने किताब को अपने नीचे दबा लिया. विकी हांफता हुआ बोला,
“ दीदी किताब दे दो नहीं तो छ्चीन लूँगा.”
“ अरे जा, जा. इतना दम है तो छीन ले.” मैं उसे चिड़ाती हुई बोली.
“ विकी क्या पढ़ रहा है?”
“ कुच्छ नहीं दीदी ऐसे ही”
“ मुझे दिखा क्या है.”
“ नहीं दीदी क्या देखोगी, ये तो हिस्टरी की किताब है.”
मैने झपट्टा मार के विकी से किताब छ्चीन ली. विकी ने वापस किताब छीनने की कोशिश की लेकिन में अपने कमरे में भाग गयी और अंडर आके लाइट बंद करके एक कोने में छिप गयी. विकी भी मेरे पीछे भागा. कमरे में आके जब उसकी आँखें अंधेरे में अड्जस्ट हुई तो उसने मुझे कोने में च्छूपा देख लिया और मेरे साथ छीना झपटी करने लगा. उसने किताब वापस छीन ली. मैने उसे ज़ोर से धक्का दे के अपने बिस्तेर पे गिरा दिया और उसके सीने पे चढ़ बैठी. विकी चित पड़ा हुआ था. मेरा गाउन छ्होटा सा तो था ही उसके ऊपर बैठने के कारण सामने से खुल गया. मेरी नंगी चूत विकी के सीने से टच करने लगी, लेकिन अंधेरा होने के कारण वो देख नहीं सका. मैने विकी को गुदगुदाना शुरू कर दिया और थोड़ा सा सरक के नीचे की ओर हो गयी. नीचे की ओर सरकने से विकी का लंड मेरे भारी नितंबों के नीचे दब गया. ऊऊफ़! उसका लंड मेरे नंगे चूतरो के नीचे बिल्कुल नंगा था! शायद छ्चीना झपटी में विकी की लूँगी खुल गयी थी. लंड खड़ा होने लगा था लेकिन बेचारा मेरे भारी चूतरो के नीचे दबे होने का कारण उसके पेट से चिपका हुआ था. बाप रे! इतना लंबा था कि उसकी नाभि तक पहुँच रहा था. मैं सोचने लगी कि जो लॉडा इसकी नाभि तक पहुँच रहा है वो तो मेरी चूत फाड़ के छाती तक घुस जाएगा. अब तो चाहे चूत फॅट जाए मैने चुदवाने की ठान ली थी. मेरा बदन वासना की आग में जलने लगा. इतने मोटे लंड का स्पर्श पा कर मेरी चूत रस छ्चोड़ने लगी. मैं विकी को गुदगुदाने के बहाने उसके ऊपर आगे पीछे होने लगी और उसके मूसल को अपने चूतरो की दरार में रगड़ने लगी. कभी थोडा आगे झुक जाती तो उसका मोटा लॉडा मेरी चूत की दोनो फांकों के बीच फँस जाता और गीली चूत उसके लंड पे रगड़ जाती. मेरी चूत के रस से उसका लॉड के नीचे का भाग बॉल्स से ले कर सुपरे तक गीला हो गया था. अब तो मैं उसके लंड पे आगे पीछे फिसल रही थी. बहुत मज़ा आ रहा था. बड़ा ही मादक खेल था. अकसर उसके लंड का सुपरा मेरी चूत के होंठों को चूम लेता और छेद में दाखिल होने की कोशिश करता. विकी ने जिस हाथ में किताब पकड़ रखी थी उसने उस हाथ को अपने सिर के ऊपर सीधा कर रखा था जिससे वो मेरी पहुँच से बाहर हो गया था. किताब तक पहुँचने के लिए आगे सरकना ज़रूरी था. ये तो बहुत अच्छा मोका था. आगे सरकने के बहाने मैं अपनी चूत विकी के मुँह पे रगड़ सकती थी. मुझे अच्छी तरह याद था जब पिच्छली बार मैने अपनी चूत विकी के मुँह पर रगडी थी. लेकिन उस वक़्त मैने पॅंटी पहनी हुई थी. किताब छ्चीनने के बहाने मैं तेज़ी से आगे की ओर हुई. अब मेरी चूत ठीक विकी के मुँह के ऊपर थी. मैने झपट्टा मारा और उसके हाथ से किताब छ्चीनने के बहाने उसके मुँह पर गिर गयी. ऊऊओफ़! मेरी नंगी गीली चूत विकी के होंठों से चिपक गयी. मैने अपनी चूत को 5 सेकेंड तक विकी के मुँह पर ज़ोर से दबा दिया. मेरी चूत इतना रस छोड़ रही थी कि विकी के होंठ और मुँह गीले हो गये. ये ही नहीं मेरी झाँटें भी उसके मुँह में घुस गयी. विकी हड़बड़ा गया और मैं किताब छ्चीनने में कामयाब हो गयी. किताब छ्चीन के मैं जैसे ही उठने लगी विकी ने मुझे गिरा लिया और मेरे ऊपर चढ़ बैठा. अब मैं पेट के बल पड़ी हुई थी और विकी मेरी पीठ पर बैठा हुआ था. मैने किताब को अपने नीचे दबा लिया. विकी हांफता हुआ बोला,
“ दीदी किताब दे दो नहीं तो छ्चीन लूँगा.”
“ अरे जा, जा. इतना दम है तो छीन ले.” मैं उसे चिड़ाती हुई बोली.
किताब छीनने के चक्कर में सरक कर मेरी टाँगों के बीच में आ गया. उसका तना हुआ लंड मेरे चूतरो से टकराने लगा. वो मुझे गुदगुदी करने लगा और मैं च्चटपटाने लगी. ऐसा करते हुए उसका लंड कभी मेरे चूतरो की दरार में घुस जाता तो कभी मेरी चूत पे रगड़ जाता. मैं तो अभी से झरने वाली हो रही थी. अब तो खेल और भी मादक हो गया था. हम दोनो ही अंजान बने हुए थे. इस छीना झपटी में मेरा गाउन तो खुल ही गया था, शायद विकी की लूँगी भी खुल चुकी थी. अंधेरा होने के कारण सॉफ दिखाई नहीं दे रहा था. मैं अचानक झटके से सीधी हो कर पीठ के बल हो गयी. गाउन सामने से पूरा खुल कर हट गया. विकी मेरे ऊपर चढ़ा हुआ था और मैं उसके नीचे बिल्कुल नंगी थी. मैं भी विकी को गुद गुडी करने लगी. अंधेरे में कुच्छ दिख तो नहीं रहा था लेकिन शायद अब तो विकी भी बिल्कुल नंगा था. छ्चीना झपटी का नाटक करते हुए मैने विकी को अपनी टाँगों के बीच में दबा लिया.
“अब बोल नालयक! कहाँ बच के जाएगा? इतनी कमज़ोर नहीं हूँ.”
“ अच्छा दीदी, अभी आपको मज़ा चखाता हूँ.” ये कह के अपने आप को छुड़ाने के लिए उसने मेरी टाँगें चौड़ी कर दी. टाँगें चौड़ी होते ही उसका तना हुआ लॉडा मेरी चूत से रगड़ने लगा. मेरी चूत बुरी तरह से गीली थी. रस बाहर निकल के मेरी झांतों को गीला कर रहा था. मैने उसकी गुदगुदी से बचाने का बहाना करते हुए टाँगों को मोड़ के अपने सीने से चिपका लिया. ऐसा करने से मेरी फूली हुई चूत की दोनो फाँकें चौड़ी हो गयी और उसके बीच के होंठ खुल गये. ये तो चुदाई की मुद्रा थी. इसी मुद्रा में तो औरत अपनी चूत मर्द के लंड को सोन्प देती है. अब मैने अपने आप को विकी के नीचे इस तरह से अड्जस्ट किया कि विकी के लंड का सुपरा मेरी चूत के छेद पे टिक गया. मैं सिहर उठी. इसी पल का तो बरसों से इंतज़ार था.
“ विकी मुझ में इतना दम है कि तुझे एक ही झटके में उठा के फेंक दूं.”
“ अच्छा दीदी! इतना दम कहाँ से आ गया? ज़रा फेंक के तो दिखाओ.”
“ तो ये ले.” मैने अपने चूतर ऊपर की ओर उच्छालते हुए कहा. विकी के लंड का सुपरा मेरी बुरी तरह गीली चूत के मुँह पे तो था ही, इस धक्के के कारण फ़च से एक इंच अंडर घुस गया. मेरे मुँह से बड़ी ज़ोर से चीख निकलने वाली थी. मैने बड़ी मुश्किल से अपने आप को संभाला. मेरी चूत का छेद इतने मोटे लंड के अंडर घुसने के कारण बुरी तरह चौड़ा हो गया था. मेरा दिल ज़ोर ज़ोर से धक धक करने लगा. मैं घबरा गयी. हाई राम कहीं चूत फॅट ही ना जाए!
“ बस दीदी इतना ही दम है?” विकी मुझे और ज़ोर से गुदगुदाने लगा. शायद विकी को पता नहीं था कि उसका लॉडा मेरी चूत में दाखिल हो चुका था. उसने कभी किसी लड़की को आज तक चोदा तो था नहीं. मैने भी उसकी नादानी का फ़ायदा उठाया और अपने चूतर उछाल उच्छाल के उसे अपने ऊपर से गिराने का नाटक करने लगी. ऐसा करने से धीरे धीरे विकी का लंड 3 इंच मेरी चूत में उतर चुका था. मुझे ऐसा महसूस हो रहा था जैसे मेरी चूत में किसीने पेड का तना घुसेड दिया हो.विकी को भी अजीब सा महसूस हो रहा था लेकिन अभी तक उसे समझ नहीं आया था कि क्या हो रहा है.
“ दिखाओ दीदी हमे भी तो अपना दम दिखाओ. या फिर सारा दम निकल गया? किसी ऐसे वैसे मर्द से पाला नहीं पड़ा है ” विकी मुझे चिड़ाते हुए बोला. मैने पूरी ताक़त से विकी को गिराने का बहाना करते हुए अपने चूतर ऊपर उच्छाल दिए,
“ अच्छा तो ये ले….आाआआईयईईईईईईईईईईईईईई… ऊऊओिइ. एम्म आआआआआ........ मार गयीईईईई…ये क्या कर रहा है बेशरम आआआआहह.” इस ज़बरदस्त धक्के से विकी का म