August 26, 2017

कंचन : बेटी बहन भाभी से बहू तक का सफ़र - 08

मेरे लंड के दुबारा दर्शन करने के बाद से तो भाभी का काफ़ी बुरा हाल था. एक दिन मैने उनके कमरे में मोटा सा खीरा देखा. मैने उसे सूंघ कर देखा तो खीरे में से भी वैसी ही महक आ रही थी जैसी भाभी की कछि में से आती थी. लगता था भाभी खीरे से ही लंड की भूख मिटाने की कोशिश कर रही थी. मुझे मालूम था कि गंदी पिक्चर भी वो कयि बार देख चुकी थी. भैया को जा कर तीन महीने बीत गये. घर में मोटा ताज़ा लंड मौज़ूद होने के बावज़ूद भी भाभी लंड की प्यास में तडप रही थी.

मैने एक और प्लान बनाया. बाज़ार से एक हिन्दी का बहुत ही गंदा नॉवेल लाया जिसमे देवर भाभी की चुदाई के किस्से थे. उस नॉवेल में भाभी अपने देवर को रिझाती है. वो जान कर कपड़े धोने इस प्रकार बैठती है की उसके पेटिकोट के नीचे से देवर को उसकी चूत के दर्शन हो जाते हैं. ये नॉवेल मैने ऐसी जगह रखा जहाँ भाभी के हाथ लग जाए. एक दिन जब मैं कॉलेज से वापस आया तो मैने पाया कि वो नॉवेल अपनी जगह पर नहीं था. मैं जान गया की भाभी वो नॉवेल पढ़ चुकी है. अगले इतवार को मैने देखा की भाभी कपड़े बाथरूम में धोने के बजाय वरामदे के नलके पर धो रही थी. उसने सिर्फ़ ब्लाउस और पेटिकोट पहन रखा था. मुझे देख कर बोली,

" आ रामू बैठ. तेरे कोई कपड़े धोने हैं तो देदे." मैने कहा मेरे कोई कपड़े नहीं धोने हैं और मैं भाभी के सामने बैठ गया. भाभी इधेर उधेर की गप्पें मारती रही . अचानक भाभी के पेटिकोट का पिछला हिस्सा नीचे गिर गया. सामने का नज़ारा देख कर तो मेरे दिल की धरकन बढ़ गयी. भाभी की गोरी गोरी मांसल झंगों के बीच में से सफेद रंग की कछि झाँक रही थी. भाभी जिस अंदाज़ में बैठी हुई थी उसके कारण कछि भाभी की चूत पर बुरी तरह कसी हुई थी. फूली हुई चूत का उभार मानो कछि को फाड़ कर आज़ाद होने की कोशिश कर रहा हो. कच्ची चूत के कटाव में धँसी हुई थी. कछि के दोनो तरफ से काली काली झांटें बाहर निकली हुई थी. मेरे लंड ने हरकत करनी शुरू कर दी. भाभी मानो बेख़बर हो कर कपड़े धोती जा रही थी और मुझसे गप्पें मार रही थी. अभी मैं भाभी की टाँगों के बीच के नज़रे का मज़ा ले ही रहा था कि वो अचानक उठ कर अंडर जाने लगी. मैने उदास हो कर पूछा “ भाभी कहाँ जा रही हो ?” “ एक मिनिट में आई.” थोड़ी देर में वो बाहर आई. उनके हाथ में वोही सफेद कछि थी जो उन्होने अभी अभी पहनी हुई थी. भाभी फिर से वैसे ही बैठ कर अपनी कछि धोने लगी. लेकिन बैठते समय उन्होने पेटिकोट ठीक से टाँगों के बीच दबा लिया. यह सोच के कि पेटिकोट के नीचे अब भाभी की चूत बिल्कुल नंगी होगी मेरा मन डोलने लगा. मैं मन ही मन दुआ करने लगा कि भाभी का पेटिकोट फिर से नीचे गिर जाए. शायद ऊपर वाले ने मेरी दुआ जल्दी ही सुन ली. भाभी का पेटिकोट का पिछला हिस्सा फिर से नीचे गिर गया. अब तो मेरे हो ही उड़ गये. उनकी गोरी गोरी मांसल टाँगें सॉफ नज़र आने लगी. तभी भाभी ने अपनी टाँगों को फैला दिया और अब तो मेरा कलेजा ही मुँह को आ गया. भाभी की चूत बिल्कुल नंगी थी. गोरी गोरी सुडोल जांघों के बीच में उनकी चूत सॉफ नज़र आ रही थी. पूरी चूत घने काले बालों से धकि हुई थी, लेकिन चूत की दोनो फाँकें और बीच का कटाव घनी झांतों के पीछे से नज़र आ रहा था. चूत इतनी फूली हुई थी और उसका मुँह इस प्रकार से खुला हुआ था, मानो अभी अभी किसी मोटे लंड से चुदी हो. भाभी कपड़े धोने में ऐसे लगी हुई थी मानो उसे कुच्छ पता ना हो.

मेरे चेहरे की ओर देख कर बोली

" क्या बात है रामू, तेरा चेहरा तो ऐसे लग रहा है जैसे तूने साँप देख लिया हो?" मैं बोला

" भाभी साँप तो नहीं लेकिन साआंप जिस बिल मे रहता है उसे ज़रूर देख लिया."

" क्या मतलब ? कौन से बिल की बात कर रहा है?" मेरी आँखें भाभी की चूत पर ही जमी हुई थी.

" भाभी आपकी टाँगों के बीच में जो साँप का बिल है ना मैं उसी की बात कर रहा हूँ."

" हाअ..एयेए !!! बदमाश !! इतनी देर से तू यह देख रहा था ? तुझे शरम नहीं आई अपनी भाभी की टाँगों के बीच में झँकते हुए?’ यह कह कर भाभी ने झट से टाँगें नीचे कर लीं.

" आपकी कसम भाभी इतनी लाजबाब चूत तो मैने किसी फिल्म में भी नहीं देखी. भैया कितनी किस्मत वाले हैं. लेकिन भाभी इस बिल को तो एक लंबे मोटे साँप की ज़रूरत है."

भाभी मुस्कुराते हुए बोली,

" कहाँ से लाउ उस लंबे मोटे साँप को.?"

" मेरे पास है ना एक लंबा मोटा साँप. एक इशारा करो, सदा ही आपके बिल में रहेगा."

" हट नालयक." यह कहा कर भाभी कपड़े सुखाने छत पे चली गयी..

ज़ाहिर था कि ये करने का विचार भाभी के मन में नॉवेल पढ़ने के बाद ही आया था. अब तो मुझे पूरा विश्वास हो गया कि भाभी मुझसे चुदवाना चाहती है. मैं मोके की तलाश में था जो जल्दी ही हाथ आ गया.

तीन दिन बाद कॉलेज में बॉडी बिल्डिंग कॉंपिटेशन था. मैने खूब कसरत और मालिश करनी शुरू कर दी थी. भाभी भी मुझे अच्छी खुराक खिला रही थी. एक दिन भाभी नहा रही थी और मैं अपने कमरे में मालिश कर रहा था. मैने सिर्फ़ अंडरवेर पहन रखा था. इतने में भाभी नहा कर कमरे में आ गयी. वो पेटिकोट और ब्लाउस में थी. मैने भाभी से कहा" भाभी ज़रा पीठ की मालिश कर दोगि?" भाभी बोली " हाँ हाँ क्यों नहीं चल लाइट जा" मैं चटाई पर पैट के बाल लेट गया. भाभी ने हाथ में तैल ले कर मेरी पीठ पर लगाना शुरू कर दिया. भाभी के मुलायम हाथों का स्पर्श बहुत अच्छा लग रहा था. पीठ पर मालिश करने के बाद चलने को हुई तो मैं बोला,

" कर ही रही हो तो पूरे बदन की मालिश कर दो ना. आपके हाथ की मालिश होने पर मैं ज़रूर बॉडी बिल्डिंग कॉंपिटेशन में जीत जाउन्गा."

 ठीक है कर देती हूँ, चल उल्टा हो कर लेट जा." मैं पीठ के बाल लेट गया. भाभी ने पहले मेरे हाथों की मालिश की और फिर टाँगों की शुरू कर दी. जैसे जैसे मेरी जांघों के पास पहुँची मेरी दिल की धड़कन तेज़ होने लगी. मेरा लंड धीरे धीरे हरकत करने लगा. अब भाभी पैट पर और लंड के चारों तरफ जांघों पर मालिश करने लगी. मेरा लंड बुरी तरह से फंफनाने लगा. ढीले लंड से भी अंडरवेर का ख़ासा उभार होता था. अब तो ये उभार फूल कर दुगना हो गया. भाभी से ये छुपा नहीं था और उनका चेहरा उत्तेजना से लाल हो गया था. खन्खिओ से उभार को देखते हुए बोली

" रामू, लगता है तेरा अंडरवेर फॅट जाएगा. क्यों क़ैद कर रखा है बेचारे पन्छि को. आज़ाद कर दे." और यह कह कर खिलखिला कर हंस पारी.

" आप ही आज़ाद कर दो ना भाभी इस पन्छि को. आपको दुआएँ देगा."

" ठीक है मैं इसे आज़ादी देती हूँ" ये कहते हुए भाभी ने मेरा अंडरवेर नीचे खैंच दिया. अंडरवेर से आज़ाद होते ही मेरा 10 इंच लंबा और 5 इंच मोटा लंड किसी काले कोब्रा की तरह फंफना कर खड़ा हो गया. भाभी के तो होश ही उड़ गये. चेहरे की हँसी एकदम गायब हो गयी. उनकी आँखें फटी की फटी रह गयी. मैने पूछा,

" क्या हुआ भाभी? घबराई हुई सी लगती हो."

" बाप रे… ! ये लंड है या मूसल ! किसी घोड़े का लंड तो नहीं लगा लिया? और ये अमरूद? उस सांड़ के भी इतने बड़े नहीं थे."

" भाभी इसकी भी मालिश कर दो ना." भाभी ने ढेर सा तैल हाथ में लेकर खड़े हुए लंड पे लगाना शुरू कर दिया. बड़े ही प्यार से लंड की मालिश करने लगी.

" रामू तेरा लंड तो तेरे भैया से कहीं ज़्यादा बड़ा है. सच तेरी बीवी बहुत ही किस्मत वाली होगी.एक लंबा मोटा लंड औरत को तृप्त कर देता है. तेरा तो…."

" भाभी आप किस बीवी की बात कर रहीं हैं? इस लंड पे सबसे पहला अधिकार आपका है."

" सच ! देख रामू, मोटे तगड़े लंड की कीमत एक औरत ही जानती है. इसको मोटा तगड़ा बनाए रखना. जब तक तेरी शादी नहीं होती मैं इसकी रोज़ मालिश कर दूँगी."

" आप कितनी अच्छी हैं भाभी. वैसे भाभी इतने बारे लंड को लॅव्डा कहते हैं."

" अच्छा बाबा, लॅव्डा. सुहागरात को बहुत ध्यान रखना. तेरी बीवी की कुँवारी चूत का पता नहीं क्या हाल हो जाएगा. इतना मोटा और लंबा लॉडा तो मेरे जैसों की चूत भी फाड़ देगा. "

“यह आप कैसे कह सकती हैं? एक बार इसे अपनी चूत में डलवा के तो देखिए.”

“हट नालयक.” भाभी बड़े प्यार से बहुत देर तक लंड की मालिश करती रही. जब मुझसे ना रहा गया तो बोला

" भाभी आओ मैं भी आपकी मालिश कर दूं."

" मैं तो नहा चुकी हूँ."

" तो क्या हुआ भाभी मालिश कर दूँगा तो सारी थकावट दूर हो जाएगी. चलिए लेट जाइए." भाभी को मर्द का स्पर्श हुए तीन महीने हो चुके थे. वो थोड़े नखरे कर के मान गयी और पैट के बल चटाई पर लेट गयी.

" भाभी ब्लाउस तो उतार दो तैल लगाने की जगह कहाँ है. अब शरमाओ मत. याद है ना मैं आपको नंगी भी देख चुका हूँ." भाभी ने अपना ब्लाउस उतार दिया. अब वो काले रंग के ब्रा और पेटिकोट में थी. मैं भाभी की टाँगों के बीच में बैठ कर उनकी पीठ पर तैल लगाने लगा. चुचियो के आस पास मालिश करने से वो उत्तेजित हो जाती. फिर मैने ब्रा का हुक खोल दिया और बड़ी बड़ी चुचिओ को मसल्ने लगा. भाभी के मुँह से सिसकारी निकलने लगी. वो आँखें मूंद कर लेटी रही. खूब अच्छी तरह चुचिओ को मसल्ने के बाद मैने उनकी टाँगों पर तैल लगाना शुरू कर दिया. जैसे जैसे तैल लगाता जा रहा था, पेटिकोट को उपर की ओर खिसकाता जा रहा था. मेरा अंडरवेर मेरी टाँगों में फसा हुआ था, मैने उसे उतार फेंका. भाभी की गोरी गोरी मोटी जांघों के पीछे बैठ कर बड़े प्यार से मालिश की. धीरे धीरे मैने पेटिकोट भाभी के नितंबों के उपर सरका दिया. अब मेरे सामने भाभी के विशाल चूतर थे. भाभी ने छ्होटी सी जालीदार नाइलॉन की पारदर्शी काली कछि पहन रखी थी जो कुच्छ भी छुपा पाने में असमर्थ थी. उपर से भाभी के चूतरो की आधी दरार कछि के बाहर थी. फैले हुए मोटे चूतर करीब पूरे ही बाहर थे. चूतरो के बीच में कछि के दोनो तरफ से बाहर निकली हुई भाभी की लंबी काली झटें दिखाई दे रही थी. भाभी की फूली हुई चूत के उभार को बड़ी मुश्किल से कछि में क़ैद कर रखा था. मैने उन मोटे मोटे चूतरो की जी भर के मालिश की जिससे कछि छूटरो से सिमट कर बीच की दरार में फँस गयी. अब तो पूरे चूतर ही नंगे थे. मालिश करते करते मैं उनकी चूत के आस पास हाथ फेरने लगा और फिर फूली हुई चूत को मुट्ठी में भर लिया. भाभी की कछि बिल्कुल गीली हो गयी थी.

" इसस्स…. आआ…. क्या कर रहा है. छोड़ दे उसे, मैं मर जाउन्गि. तू पीठ पर ही मालिश कर नहीं तो मैं चली जाउन्गि."

" ठीक है भाभी पीठ पर ही मालिश कर देता हूँ." मैं भाभी की टाँगों के बीच में थोड़ा आगे खिसक कर उनकी पीठ पर मालिश करने लगा. ऐसा करने से मेरा तना हुआ लॅव्डा भाभी की चूत से जा टकराया. अब मेरे तने हुए लंड और भाभी की चूत के बीच छ्होटी सी कछि थी. भाभी की चूत का रस जालीदार कछि से निकाल कर मेरे लंड के सुपारे को गीला कर रहा था. मैं भाभी की चुचिओ को दबाने लगा और अपने लंड से भाभी की चूत पर ज़ोर डालने लगा. लंड के दबाव के कारण कछि भाभी की चूत में घुसने लगी. बारे बारे नितंबों से सिमट कर अब वो बेचारी कछि उनके बीच की दरार में धँस गयी थी. भाभी के मुँह से उत्तेजना भरी सिसकारियाँ निकलने लगी. मुझसे ना रहा गया और मैने एक ज़ोरदार धक्का लगाया. मेरे लंड का सुपरा भाभी की जालीदार कछि को फाड़ता हुआ उनकी चूत में समा गया.

"आआआः…….ऊवू….उई माआ. ऊऊफ़.. यह क्या कर दिया रामू. तुझे ऐसा नहीं करना चाहिए. छोड़ मुझे, मैं तेरी भाभी हूँ. मुझे नहीं मालिश करवानी" लेकिन भाभी ने हटने की कोई कोशिश नहीं की. मैने थोड़ा सा दबाव डाल कर आधा इंच लंड और भाभी की चूत में सरका दिया.

" अया …ऊवू तेरे लवदे ने मेरी कछि तो फाड़ ही दी, अब मेरी चूत भी फाड़ डालेगा." मेरे मोटे लवदे ने भाभी की चूत के छेद को बुरी तरह फैला दिया था.

" भाभी आप तो कुँवारी नहीं हैं. आपको तो लंड की आदत है?"

" अया… मुझे आदमी के लंड की आदत है घोड़े के लंड की नहीं. चल निकाल उसे बाहर." लेकिन भाभी को दर्द के साथ मज़ा आ रहा था. उसने अपने चूतरो को हल्का सा उचकाया तो मेरा लंड आधा इंच और भाभी की चूत में सरक गया. अब मैने भाभी की कमर पकड़ के एक और धक्का लगाया. मेरा लंड कछि के छेद में से भाभी की चूत को दो भागों में चीरता होता हुआ 5 इंच अंडर घुस गया.

" आआआआआः… आ….आ. मर गयी ! छोड़ दे रामू फॅट जाएगी. ऊवू…धीरे राजा. अभी और कितना बाकी है? निकाल ले रामू, अपनी ही भाभी को चोद रहा है."

मैं भाभी की चुचिओ को मसल्ते हुए बोला" अभी तो आधा ही गया है भाभी, एक बार पूरा डालने दो फिर निकाल लूँगा."

क्रमशः.........

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