शुभारम्भ

दरवाज़ा बंद होने की आवाज़ से मेरी नींद खुल गयी

अनीता चाची रूम साफ़ करने आई थी. मैं यूँही ऑंखें बंद कर के पड़ा रहा. रात को पोर्न देखते देखते दो बार मूठ मार चूका था इस लिए थक गया था.

चाची मेरे कंप्यूटर टेबल को साफ़ कर रही थी. तभी मुझे याद आया की मैंने जिस न्यूज़ पेपर मैं मूठ मारी थी उसको वही पर छोड़ दिया था.
चची ने वो कागज़ उठाया और नीचे फ़ेंक दिया. मेरी जान मैं जान आई तभी चची पीछे मुड़ी और उन्होंने कागज़ फिर से उठा लिया

सारा माल तो सुख चूका था मगर सूखे माल के दाग और उसमे से आती नमकीन खुशबू ये बताने के लिए काफी थे की वो क्या है. चची ने एक दम से उसे फ़ेंक दिया अचानक मुझे देखा और कमरे से बाहर निकल गयी. मेरी गांड भी फट रही थी और हंसी भी आ रही थी

मेरा नाम शील है, फर्स्ट इयर मैं हूँ और अपनी उम्र के सब लडको जैसे महा ठरकी हूँ. आज तक सिर्फ कंप्यूटर पर पोर्न देख देख कर मूठ ही मरी है और कुछ किया नहीं था. शुरू से ही थोडा गांड फट हूँ और स्कूल मैं भी चुप चाप ही रहा करता था क्योकि मैं हकलाता हूँ. कही किसी लड़की से बात ही नहीं कर पाया. स्कूल मैं रिया जो मेरी क्लास मैं थी, उसे पसंद करता था मगर कभी बात भी नहीं की.

अभी चची के जाने के बात मेरी गांड फटने लगी की कहीं चची मोम, पापा या चाचा को बोल न दे. रूम से बाहर आया तो कोई भी नहीं था. चाचा और पापा दुकान जा चुके थे.
मोम मंदिर गयी होगी और चची शायद नहा रही थी.

मैंने सोचा की बात दबा ही लेते है. तभी चची आ गयी

चची : अरे शील चाय पिएगा क्या ?
मैं : ह ह हा च च चची

चची : क्या हुआ तुझे ? ( मैं जब भी गुस्से में या नर्वस होता हूँ तो हकलाने लगता हूँ )
में : न न नहीं क क कुछ नहीं

में : वो च च चची .....म म मेरे रूम में ......व व वो कागज़ थ थ था ना .......व व वो स स सॉरी.

शायद वो कुछ समझी नहीं. तभी उनको क्लिक हुआ की में मूठ वाले कागज़ की बात कर रहा हूँ

चची : (माथे पर सल लाकर बोली ) देख शील यह गंदे गलत काम मत किया कर. पड़ने लिखने की उम्र है. पढ़ ले नहीं तो तेरे चाचा जैसे दुकान की गुलामी ही करता रह जायेगा
मैंने चैन की ठंडी सांस ली और सर झुका के बोला की अब नहीं करूँगा चची. चची ने स्वीट से स्माइल दी और कहा की चल में चाय बना देती हूँ .
तभी मोम आ गयी और बोली की चची भतीजे में सुबह सुबह क्या खिचड़ी पक रही है. चची ने कुछ नहीं कहा और मुझे चाय दे दी.

कॉलेज में मेरे ज्यादा दोस्त नहीं थे. सब भेन्चोद मेरे हकले पन का मजाक बनाते थे इस लिए में थोडा रिसेर्वे ही रहता था. आज कॉलेज के लिए निकला तो बस छुट गयी और मुझे पैदल जाना पड़ा. लेट तो हो ही गया था सोचा कैंटीन में कुछ खा लूँ. में घुसा और मुझे नवजोत और उसका गेंग दिख गया. में चुप चाप साइड में जाके बैठ गया और सर झुका के बुक देखने लगा. तभी

नवजोत : ए हकले .........अबे ओ हकले ........इधर आ
में ( नर्वस होके ) : क क क्या हुआ ?

नवजोत : इधर आ लोडू

में गया और उनकी टेबल के पास खड़ा हो गया:

नवजोत : चल गाना सुना

हुआ यूँ था की कॉलेज में मेरे फर्स्ट डे को जब हम सब की रेगिंग ली गयी थी तो मुझे कहा गया की "सलामे इश्क मेरी जान" गाना गाऊ. उस दिन नर्वस होने की वजह से में बहुत हकलाया था और नवजोत जो की मेरे से २ साल सीनियर था उन सब का लीडर था . उस ने मेरी इज्ज़त धुल में मिला दी थी और सब जान गए थे की में हकला हूँ

में : सॉरी मेरा गला ख़राब है
नवजोत : साले लोडू गाता है या दू गांड पे लात.

और उस ने मेरे छोटे मगज पर हाथ मार दिया, चटाक की आवाज़ आई. दिल तो ऐसा किया की साले का खून कर दूँ. उस ने दुबारा हाथ उठाया ही था.

तभी कैंटीन में कुछ लड़किया आई. उनमे से एक लड़की जो पिंक कलर के सुट में थी, खुले हुए सुनहरे बाल, सोने और दूध की मिलावट का रंग. एक हाथ में चूड़िया और गांड में बला की लचक. वो सीधी हमारी टेबल के पास आई और नवजोत से बोली

भैया, मेरी गाड़ी पंक्चर हो गयी है. क्या आप मुझे साथ में घर ले चलेंगे

नवजोत : अरे पिया कहां हुई पंक्चर ? गाड़ी कहां है ?

(ओ तो इसका नाम पिया है और ये अप्सरा इस मादरचोद की बहन है )

पिया : कॉलेज में ही है भैया. ये लो चाबी
नवजोत : अरे विक्की , ये ले चाबी और घर छोड़ देना

नवजोत जाने लगा अचानक मुड़ा और मुझसे बोले की फिर सुनेगे तेरा गाना तानसेन......पिया ने भी मेरी तरफ देखा. हमारी नज़रे मिली और उस ने माफ़ी से भरी एक हाफ स्माइल दी. और चली गयी
रात को सपने मैं मैंने देखा की चाची मेरे रूम को साफ़ कर रही है मगर उन्होंने साडी नहीं पहनी हुयी है. ब्लाउस मैंने उनके बूब्स हिल रहे है और पेटीकोट में उनकी गांड का शेप साफ नज़र आ रहा है. फिर वो मेरे पास आई और मेरे जांघों पर हाथ फिराने लगी और धीरे धीरे मेरे लंड पर हाथ फेरने लगी. तभी मेरी नींद खुली और पजामे में ही मेरा माल निकलने लगा. ओ गोड....मैंने फटाफट मेरी कॉपी में से एक पेज फाड़ा और अंडरविअर और लंड को साफ़ कर लिया और वापस सो गया.

सुबह किसी के हिलाने से मेरी नींद खुली. देखा तो चाची थी और काफी गुस्से में लग रही थी.

मैं : क क क्या हुआ चाची ??
चाची : कल ही समझाया था ना ? क्या है ये ? उस कागज़ की तरफ इशारा कर के उन्होंने पुछा

मैं : व व वो मेरा नहीं है.
चाची : मतलब कोई और आके रख गया है क्या ?

मैं : न न न नहीं वो अपने आप हो गया था
चाची : मतलब ?

मैं : न न न नींद में हो गया था चाची मैंने नहीं किया
चाची : ऐसा कोई होता है क्या ? झूट मत बोल.

मैं : न न नहीं चाची मैंने स स सपना देखा और अपने आप हो गया. म म मैंने तो इस से सिर्फ साफ़ क क किया था
चाची : ऐसा क्या सपना देखा ?

अब मेरी बोलती पूरी तरह से बंद.
मैं फटाफट रेडी हुआ और घर से निकल लिया. चाची को फेस नहीं कर सकता था.

कॉलेज मैं घुसा और गार्डन में बैठा था तभी मैंने देखा की नवतोज की बहन, अप्सरा सी सुंदर पिया एक लड़के से बातें कर रही है. मेरी गांड सुलगने लगी कि भेन्चोद ऐसा माल मुझे क्यों नहीं मिलता.

अकाउंट की क्लास में मैंने देखा की वो भी बैठी थी. मैंने अपने पास वाले से पुचा भाई ये अभी न्यू एडमिशन कहाँ से आया. वो बोला अबे सरदार प्रताप सिंह की बेटी है.
फायनल एक्साम के पहले भी आती तो एडमिशन मिल जाता. मैं अकाउंट में होशियार था और जो सर हमे अकाउंट पड़ते थे, वो न जाने क्यों मुझसे नरमी से पेश आते थे
शायद मेरे मार्क्स अच्छे आते थे और फिर मैं उनकी नज़र मैं सीधा सादा हकला था.

क्लास ख़तम हुई और सब निकल लिए. मगर पिया रुक के सर से बातें करने लगी. मैं जा ही रहा था की सर ने मुझे आवाज़ दी और बुला लिया.

सर : शील, ये पिया है. लेट एडमिशन है इसलिए स्टार्टिंग के तीनो चेप्टर मिस कर चुकी है. तुम्हारे नोट्स वगेरह इसे दे देना.

मैंने कुछ बोला नहीं सिर्फ सर हिला दिया. फिर सर के जाने के बाद थोडा धीरे धीरे बिना हकलाये उस से बोला की कल देता हूँ ताकि उसके सामने इज्ज़त बच जाये. वो भी थैंक्स बोल के निकल ली.

घर पे गया तो आँखों में पिया का ही चेहरा घूम रहा था. डायनिंग टेबल पर बैठा था और टीवी देखा रहा था तभी चाची वहां पर झाड़ू मरने लगी. मैं चाची को बोलने ही वाला था की मेरी नज़र चाची के ब्लाउस पर गयी. उनका आंचल नीचे आ गया था और सावले सलोने दोनो बूब्स जोर जोर से हिल रहे थे. शादी के ५ साल बाद भी उन्हें बच्चा नहीं हुआ था इस लिए आज भी कड़क थी. अभी तक मैंने उन्हें उस नज़र से देखा नहीं था पर सपने में माल निकल देने के बाद से मेरी नज़रे बदल गयी थी.

तभी वो सीधी हुई. मैंने तुरंत नज़रे टीवी की तरफ कर ली. चाची ने अपने आंचल से गले का पसीना पोचा और अचानक अपनी चूत की साइड में खुजाने लगी.

ओ shit . मेरा माहोल बनने लगा. अचानक उन्होंने मुझे देखा और अपना हाथ हटा लिया. चाची को शायद गुस्सा आ गया था क्योकि उनके माथे पर फिर से सल आ गया था. मै वहा से चुपचाप सरक लिया.

अगले दिन कालेज में अकाउंट के लेक्चर के बाद पिया मेरे पास आई और बोली

पिया : हाय
मैं : ह ह हाय

पिया : नोट्स लाये हो आप

माँ की चूत.....मैं नोट्स घर पर भूल आया था.

मैं : स स सोरी .....क क कल देता हूँ

उसका चेहरा थोडा उतर गया. कसम से इतनी क्यूट और सेक्सी लग रही थी की बस पकड़ो और..........मैंने अपने सर झटका और उसको बाय बोल के निकल आया.

रात तो घर लेट पहुंचा. सब सो चुके थे मेरे पास मैं घर के डोर की चाबी रहती है. बिना आवाज़ किये डोर खोला और अपने रूम में जाने लगा तभी चाची के रूम से कुछ आवाज़ आई. उनका रूम और मेरा रूम पास पास है और उनके बीच में एक दूर था जो अब बंद कर दिया है, मैं मेरे रूम में गया और कान लगा के सुनने लगा

चाची : ममम सुनो न .....ऐ जी .... सो गए क्या ?
चाचा : हम्म क्या है ?

चाची : यहाँ आओ ना
चाचा : क्या है नीलू ?

चाची : देखो ना मुझे यहाँ पर आजकल बहुत खुजली होती है
चाची : नीलू गर्मी में रेश आ जाते है. क्रीम लगा ले.

मैं समझ गया था की चाची को कहाँ खुजली हो रही है. मैंने डोर की दरारों में देखने की कोशिश की और एक दरार से उनका बेड दिखने लगा. चाची ने सामने से ओपन होने वाला गाउन पहना था और मेरा चाचा पट्टे वाली चड्डी में था.

चाची : अरे देखो तो सही की मुझे हुआ क्या है ? इतनी खुजली क्यों होती है ?
चाचा : नीलू सो जा यार. दिन भर दुकान में गांड मराने के बाद मुझ में इतनी शक्ति नहीं की तेरा चेकअप करू.

चाची : मम्म देखो ना जी. ऐसी खुजली होगी तो नींद नहीं आयगी

साली मुझे बोलती है की गंदे गलत कम मत किया कर और यहाँ पर .....

चाचा : नीलू प्लीज़ यार
चाची गोउन खोलते हुए : देखो ना जी.......क्या हुआ हे. दिन भर खुजली मचती रहती है. क्या आप को भी वहां पर खुजली होती हे.

ये बोलकर चाची ने चाचा के चड्डे में हाथ ड़ाल दिया और चाचा के लुंड को सहलाने लगी. साली चाची तो बहुत गरम है.

चाचा ने हुन्कार भरी और चाची को किस करने लगा. चाची के मुह से मम मम की आवाज़ साफ़ आ रही थी. चाचा ने उसके गाउन को खोल दिया और चाची के गोल संतरों की दर्शन करा दिए. बच्चा भले ही ना हुआ मगर मेरी चाची के मम्मे इतने शानदार होगे इसका मुझे अंदाज़ा भी नहीं था. साली लेटी हुई थी फिर भी उसके बादाम जैसे निप्प्ले अलग ही दिख रहे थे. अचानक मेरे चाचा ने चड्डी खोली चाची का गाउन खोला. मैं तो चाची की चूत भी नहीं देख पाया और मेरा चाचा उसकी टांगों के बिच में बैठ गया. बस चाची की मोटी मोटी जांघें दिख रही थी. मैंने अपना लैंड बहार निकल लिया और हिलाने लगा.

चाची : मम्म मुझे और किस करो ना . इन का ख्याल कोन रखेगा ( अपने मम्मे अपने हाथों में लेकर बोली)

चाचा ने अपना थुक लंड पे लगाया और सीधा ही चाची की चूत में ठोक दिया. चाची के मुह से आह निकल गयी. चाचा की बाल भरी गांड जोर जोर से हिलने लगी.
दस पंद्रह धक्के मारे और चाचा सांड जैसा हुन्कारने लगा.

चाची : नहीं अभी नहीं. डौगी करो. पीछे से डालो आ आअह. नहीं ना ना आह

चाचा तो अनसुनी कर के धक्के मरता गया और एक दम उसका शरीर अकड़ा और भेन्चोड ने अपने माल छोड़ दिया.

चाची : ये क्या किया आपने ? ऊह मुझे हर बार ऐसे ही छोड़ देते हो. मुझे और जोर से खुजली हो रही hai.n

चाचा ने चड्डी से अपने लंड पोछा और चाची की तरफ पीठ करके सो गया. चाची के साथ तो चोट हो गयी. कहाँ तो डौगी में चोदने का बोल रही थी और कहाँ दस धक्के मैं कहानी ख़तम.

मेरा लंड मेरे हाथ में ही था. मैं कभी अपने लंड को देखता और कभी बेचारी चाची को.

चाची की चूत दिख नहीं रही थी. मगर मैंने देखा की उनका हाथ धीरे धीरे अपनी चूत की तरफ गया और वो उसे रगड़ने लगी. उनके मुह से फिर सिसकारी छुटी और मेरा लंड फिर तनने लगा. चाची का एक हाथ अपने बूब्स को दबा रहा था, उनके निप्प्लेस उनकी उँगलियों के बीच थे. वाव क्या सीन था.

मैंने अभी अपना लंड जोर से हिलाना शुरू कर दिया. चाची की सिस्कारियां तेज़ होती गयी और मेरे हाथ की स्पीड और उनकी उँगलियों का मोशन फास्ट होता गया.

अचानक उन्होंने जोर जोर से सांस लेना शुरू कर दिया और मादक स्वर में आह आह उहुहू ......उहुह....आह...करने लगी. चाची का ओर्गेस्म हो रहा था
मेरे गोटे भी कड़क होने लगे. मैंने इधर उधर देखा और टेबल पे पड़ा हुआ कागज़ उठाया और उसमे अपने लंड हिलाने लगा. अचानक एक सुरसुरी और गुदगुदी का मिला जूला एहसास हुआ और मेरे लंड ने पानी छोड़ना शुरू कर दिया. मगर ये क्या .......पहली धार जोर से निकली और हवा में उड़ के डोर पे जा गिरी. फच फच करके पानी निकलता ही रहा. मेरा सर पीछे हो गया ऑंखें बंद हो गयी.....ओ गोड.....यस.

मैंने कागज़ फोल्ड कर के वही रखा और बिस्तर पे पड़ गया. वाव इतना मज़ा आज तक नहीं आया था.
सुबह नींद खुली तो दस बज चुके थे. 10.30 पर तो कॉलेज ही था. फटाफट तैयार हुआ बुक्स उठाई और पुराने नोट्स भी उठा लिए. पिया के लिए

चाची नाश्ता लगा रही थी. पर मैं जाने लगा तो बोली

चाची : शील, नाश्ता कर ले.
मैं : नहीं चाची लेट हो गया हूँ.

चाची पास आके मुझे बिठाते हुए : नाश्ता नहीं करेगा तो ताक़त कैसे आएगी. अब तू जवान हो गया है

मेरी समझ में कुछ आया नहीं. ओह god कल रात की रास लीला देखके जो माल निकला था वो तो कागज़ फिर से कंप्यूटर टेबल पर ही छोड़ दिया था.
कहीं फिर से चाची ने वो कागज़ तो नहीं देख लिया. मेरी फटी.

मैं : च च चाची ......वो .......म म मेरा मतलब है की वो कागज़ ......आई ऍम सॉरी ......अब नहीं होगा

टेड़ी मुस्कान के साथ बोली : कोनसा कागज़...अच्छा वो वाला.....

मैंने सर नीचे झुका लिया.

चाची: अब तू कॉलेज जाने लगा हे, जवान हो गया है....चलता है मगर थोडा कन्ट्रोल रखा कर.....रोज़ रोज़ कोई करता है क्या ?

मैंने झटके से सर उठाया, चाची कुटिल तरीके से मुस्कुरा रही थी. तभी उन्होंने वो किया जिस से मेरे दिमाग में हतोड़े पड़ने लगे

अचानक वो अपनी टांगों के बीच खुजली करने लगी ये करते हुए तो बेशरमी से मुझ से बातें भी कर रही थी. मुझे तो यह भी नहीं पता की वो क्या बोल रही है. मेरा सारा ध्यान उनकी उंगिलयों के खेल पर था.

चाची : शील तू सुन रहा है न ? शाम को जल्दी आ जाना
में : ह ह हाँ च च चाची

चाची :अच्छा तू लेट हो रहा है. जल्दी कर नहीं तो बस नहीं मिलेगी.

और झुक कर मेरी प्लेट उठाई. हाय क्या नज़ारा दिखा. उनके दोनों संतरे ब्लैक ब्रा में कैद थे और हमेशा की तरह उन्होंने काफी टाईट ब्लाउस पहना था जिसके कारण उनके बूब्स उभर के बहार निकल रहे थे. बूब्स के बीच के घाटी पूरी अन्दर तक दिख रही थी . मेरे बदन की नसे गरम हो गयी और वही मेरा माहोल बन गया. जींस में जैसे तैसे अड्जेस्ट किया. चाची मुझे वो ही बेशरमी भरी मुस्कान से देखे जा रही थी. बड़ी मुश्किल से मैंने बुक्स समेटी और कॉलेज के लिए भागा.
चाची के झटके से मेरा दिमाग घूम गया था.

अनीता चाची जिनका प्यार का नाम नीलू है. मेरे चाचा की बीवी. पिछले साल ही गाँव से आई थी. जब गाँव में बाड़ आने से सब तबाह हो गया और चाचा सड़क पे आ गया, तो मेरे पापा ने उनको शहर बुला लिया और अपने साथ दुकान पे लगा लिया. मेरा बनिया बाप बहुत शाना है. दूकान के दो नोकरों की छुट्टी करके उनका पूरा काम मेरे चाचा से ही कराता था, शायद इसी लिए मेरा चाचा इतना थका रहता था की नीलू की खुजली नहीं मिटा पा रहा था. बेचारी को शादी के ५ साल बाद भी बच्चा नहीं था.
सांवले रंग में ढली उसकी चिकनी काया में अजंता की मूर्तियों जैसे घुमाव और उठाव थे. तीखा नाक जैसे चोंच हो, कंटीली भंवे, थोड़े भरे भरे होंठ और उसके ऊपर एक तिल.

गाँव से आई चाची को डौगी पोसिशन में करना पसंद है यह सोच सोच के मेरा सांप फिर फन उठाने लगा.

अपनों अरमानो की गाड़ी को ब्रेक लगा कर कॉलेज में घुसा. अकाउंट का लेक्चर ख़तम हो चूका था. तभी सामने से आती पिया दिखी. उसने सफ़ेद शर्ट और ब्लू जींस पहनी थी, बाल खुले थे, क़यामत दिख रही थी. वो आई और

पिया : हाय ...मेरे नोट्स लाये हो ना
मैं : ह ह हाय (साला ये हकलापन). हाँ यह लो.

पिया : थेंक्स. तुम्हे जल्दी तो नहीं चाहिए.
मैं : न न नहीं. अ अ आप आराम से कॉपी कर लो.

पिया : यह आप आप क्या लगा रखा है. अरे हम दोस्त है. इतने फोर्मल मत बनो
मैं : थ थ ठीक है.....अ अ आप....मेरा मतलब है की तुम को अब तुम कहूँगा

वो हंसी और उसके गुलाबी होटों के बीच में उसके मोती जैसे दांत चमक उठे. तभी मैं नोटिस किया किया की उसके होटों के ऊपर एक तिल है. ऐसा ही एक तिल चाची के होटों पर भी है. चाची की याद आते ही मेरा दिमाग उनकी रात की और सुबह की बातें याद करने लगा. तभी पिया बोली

पिया : अरे कहाँ खो गए. आज लेट कैसे हो गए. क्लास में तो दिखे ही नहीं आज.
मैं : ह ह हाँ म म मैं वो .....

पिया (शरारती मुस्कराहट के साथ बोली) : पार्क में GF के साथ थे क्या ?

मैं तो एक दम घबरा गया और मेरा मुह लाल हो गया

मैं : म म मेरी कोई gf नहीं हैं.
पिया : अच्छा पुरे कोलेज में ऐसा कोई लड़का या लड़की नहीं जिसका कोई सीन नहीं है

मैं : स स सच में नहीं है. क क कसम से.
पिया : इट्स ओके यार. वैसे तो मेरा भी नहीं पर बोलना येही पड़ता हैं, की कोई है. भाई के डर से सब दूर ही रहते है.
अच्छा चलो मुझे जाना है बाय

आज मुझे अपने हकले होने पर जितना गुस्सा और शर्म आई की क्या बोलू.
घर पे पहुंचा तो पूरा घर खाली था. अपनी चाबी से दरवाजा खोल के जब अन्दर गया और आवाज़ लगायी तो चाची के कमरे से
आवाज़ आई.

चाची : कोन हैं ? शील ?
मैं : हाँ चाची......सब कहाँ गए ?

चाची : अरे सुबह बोला तो था की सब मंदिर में जायेंगे. रणछोड़ दास जी के भजन हैं.

अब मैं क्या बोलू की सुबह मेरा ध्यान कहा था.

चाची : मैं कपडे धो कर आती हूँ. खाना रेडी है.
मैं : अरे चाची...मेरे कपडे भी धो दिए क्या ?

चाची : नहीं....ला दे... जल्दी.

मैं रूम में गया और अपनी जींस, टी शर्ट और अंडरवियर उठाई. जैसे ही बाथरूम में घुसा मेरी साँसे रुक गयी.
चाची गाँव वालो की तरह उकडू बैठ कर कपडे धो रही थी, उनको वाशिंग मशीन में कपडे धोना नहीं आता था. उनका आचल गिरा हुआ था और ऐसे बैठने की वजह से उनके बूब्स मचल मचल के बाहर आ रहे थे. उन्होंने साड़ी घुटनों के ऊपर तक उठा रखी थी जिससे उनकी पानी से भीगी चिकनी जाघें चमक रही थी.

मैं : ये लो च च चाची
चाची : सारे कपडे ले आया ना ?

मैं : हाँ ..जींस ...टी शर्ट ....और ये ........(कहकर मेने अंडरवीयर भी रख दी)
चाची : यहाँ रख दे......( फिर वो ही कुटिल मुस्कान के साथ बोली) ....अंडरवियर की हालत तो कागज़ जैसे नहीं कर रखी ?

मेरे तो कान गरम हो गए.
मैं : न न नहीं चाची

चाची : सुन......ये साड़ी सही कर दे ना.

वो अपने ढलके हुए आंचल की तरफ इशारा कर रही थी. मैंने कांपते हुए हाथों से उनका आंचल जो उनके कंधे से गिर गया था उसे फिर से कंधे पर रखने लगा तभी वो थोडा सा मुड़ी और मेरा हाथ उनके सोफ्ट मम्मो से टकरा गया.
चाची धीरे धीरे मुस्कुरा रही थी. फिर बोली

चाची : लल्ला....ये बाल्टी भी खाली कर के दे दे ना.

मैंने बाल्टी उठाई और मुड़ा. फर्श चिकना होने से मेरा बैलेंस बिगड़ा और बाल्टी मेरे हाथ से छुट कर ठीक चाची के पीछे गिर गयी. उनका पूरा पिछवाडा गीला हो गया.

चाची : हाय राम यह क्या किया. मेरी पूरी साड़ी गीली हो गयी.

और वो खड़ी होकर साड़ी को झटकने लगी.

चाची : क्या करता है लल्ला......अन्दर तक पानी चला गया .....सारे कपडे धो रखे है...मेरे पास तो अलमारी में दूसरा पेटीकोट भी नहीं है.

कह कर उन्होंने साड़ी खोलना शुरू कर दी. मेरे सामने मेरी खुजली वाली चाची बिना आंचल के .. और ....भीगी हुई.......साड़ी खोल रही थी. मेरी जींस में तम्बू तन चूका था. तभी जैसे उसे होश आया बोली

चाची : शील ..बाहर जा. देखता नहीं में कपडे बदल रही हूँ

मैं हकलाता हुआ सॉरी बोलता हुआ बाहर आके खड़ा हो गया.

चाची : मेरे सारे कपडे गीले कर दिए लल्ला. अब मैं क्या पहनू ? जा जाके मेरे रूम में कोई पेटीकोट, ब्लाउस मिले तो ले आ.

मैंने जाके देखा मगर कुछ नहीं था. तभी मुझे चाची का नाईट गाउन दिखा. पूरा पारदर्शी था.

मैं : ये लो चाची.
चाची : अन्दर मत आ. बाहर से ही दे दे.

मैंने दिया और चाची अन्दर से ही चिल्लाई

चाची : लल्ला और कुछ ना मिला क्या ?
मैं : चाची मुझे और कुछ नहीं दिखा.....आप ही तो बोली की सारे ही कपडे धो दिए.

चाची : हाय राम यह तो बहुत झीना हैं. अरे बाहर का दरवाजा बंद है ना ? ऐसे में भाभी और भाई साहब आ गए तो.
मैं : चाची मैं कुण्डी लगा देता हूँ .

मैं जैसे ही मुड़ा चाची बाथरूम से बाहर आई और अपने रूम की तरफ भागी. गाउन सामने से खुला था और अन्दर वो सिर्फ ब्रा और पेंटी में थी. भीगने से उनका गाउन पूरा ही पारदर्शी हो गया था. काली ब्रा और फूल की प्रिंट वाली पेंटी साफ़ साफ़ दिखाई दे रही थी. उनके मम्मे भागने की वजह से जोर जोर से हिल रहे थे और उनके भरे भरे गोल गोल नितम्ब पेंटी के अन्दर बाहर आने के लिए मचल रहे थे. उन्होंने से अपने रूम में घुस कर दरवाजा बंद कर लिया और जोर जोर से हसने लगी. मेरा दिमाग ख़राब हो गया.

चाची : लल्ला ....अब लगा लो कुण्डी ....हा हा हा ......बुद्धू बन गए भोले लल्ला....

मेरा सांप फुफकारे मार रहा था, मुझसे रहा नहीं गया मैं फटाफट रूम में गया और सुबह के न्यूज़पेपर को खोल कर टेबल पार रखा , जींस उतारी और अपना लंड हिलाने लगा. उत्तेजना की वजह से मेरी ऑंखें बंद हो गयी थी. आज सुबह से ही चाची ने मुझे इतना गरम कर दिया था कि रुकना मुश्किल था. बार बार चाची के भीगे बदन का चित्र मेरी आँखों के सामने आ रहा था.
मुझे वो ही सुरसुरी फिर होने लगी मेरा निकलने वाला था. तभी भड़ाक से मेरे रूम का दरवाजा खुला और चाची अन्दर आ गयी.

चाची : चल लल्ला ..साड़ी मिल गयी और खाना लगा दिया है.....आज दाल......हाय राम ये क्या .....

मेरा माल निकलना शुरू हो गया.....मैंने अपने लंड हाथ में छुपाने कि कोशिश कि मगर उसमे से फच ....फच.....धार छुटती
ही जा रही थी. कुछ उड़ कर चाची के पैरों के पास भी गिरी. चाची की आँखों गोल गोल हो गयी थी और वो कभी मुझे और कभी धार पे धार मारते मेरे लंड को देख रही थी. अचानक जैसे उन्हें होश आया और वो बाहर चली गयी.

मैने उसी कागज़ से लंड को पोछा. मेरी गांड फटफटी की तरह फट रही थी. बेटा आज तो गए. बाप जल्लाद है....मार मार के गांड सुजा देगा और माँ मारे शर्म के मार जाएगी. मैं सर झुका के बाहर गया.

मैं : च च च चाची........

चाची मेरी तरफ मुड़ी. उनका चेहरा लाल हो गया था. उनकी वो तीखी नाक कोनो से फूली हुई थी. या तो वो गुस्से में थी या उनको भी मस्ती आ गयी थी.

चाची : लल्ला......हद होती है.....तू बहुत बिगड़ गया हैं......भाभी और भाई साहब को पता चला की तू पढाई छोड़ कर ये सब
हरकते करता है तो उन कर क्या गुजरेगी ? ऐसे आदतों की वजह से ही तेरे चाचा का ये हाल हैं. जो आज तक बाप नहीं
बन पाए

मैं : च च चाची प प प्लीज़ मुझे माफ़ कर दो. म म माँ और प प पापा को मत बोलना. मैं अब कभी मूठ नहीं मारूंगा.
प प प्लीज़ चाची प्लीज़

चाची एक दम से शांत हो गयी. फिर से उनके चेहरे पे वो ही टेड़ी मुस्कान हलके हलके आई.

चाची : लल्ला.......मैं ये नहीं कहती की बिलकुल मत कर. पर रोज़ रोज़ करना तो गलत है. कमजोरी आ जाएगी. कल तेरी
शादी होगी, फिर क्या करेगा. बहु को खुश नहीं रखेगा तो इधर उधर झाँकेगी. मर्द बनेगा कि ग्वाला ?

मैं : ठ ठ ठीक है चाची ......ध्यान रखूँगा.....

चाची : ये ले खाना खा ले....

मैं : चाची ....ये रोटी पर कितना घी लगाया है ? ? मुझे इतना घी मत दो.
चाची टेड़ी मुस्कान के साथ बोली : अरे लल्ला......घी नहीं खायेगा तो ताक़त कैसे आएगी. घी से ही तो धातु बनती है.

मैं : धातु ? धातु क्या ?
चाची : वो ही जो तुम रोज़ इधर उधर .....कागजों में उड़ाया करते हो.

माँ कसम......अभी मूठ मरी थी और चाची की टेड़ी मुस्कान और ऐसी बातें सुन कर सांप ने फन उठा ही लिया. मैंने अडजस्ट करने के लिए नीचे हाथ लगाया और चाची बोली

चाची : लो अभी घी खाया भी नहीं और फिर निकालने चले ?

मैने घबरा के हाथ ऊपर कर लिया और चाची जोर जोर से हसने लगी. उन्होंने फिर वहीँ पर खड़े खड़े मेरे सामने ही अपनी टांगो के बीच खुजाना शुरू कर दिया. मैं इधर उधर देखने लगा. तभी चाची बोली

चाची : अरे लल्ला....बहुत परेशान हो गयी रे.....मरी इस खुजली के मारे......कोई क्रीम व्रिम ला दे ना.....खुजली मिटती ही नहीं.

मेरे सर में हथोड़े चलने लगे. सारा शरीर सुन्न हो गया बस लंड धड़क रहा था. चाची अभी भी मुझे देख कर मंद मंद मुस्कुरा रही थी. तभी बेल की आवाज़ आई. माँ - पापा आ चुके थे.

मैं खाना खा के सीधा रूम में घुस गया. सर चकरा रहा था की ये आज कल हो क्या रहा हैं.....चाची ने कभी ऐसे नहीं किया था....और न ही मैंने उन्हें इस नज़र से देखा था.
मगर आज कल जब भी मैं उनको देखता तो वो मुझे ही देख रही होती और मंद मंद मुस्कुरा रही होती. साले चाचा से इसकी खुजाल मिट नहीं रही इसी लिए चाची दूसरा रास्ता देख रही थी. ये सोच कर मुझे थोडा कांफिडेंस आ गया. चलो देखते है क्या होता है......

सोचते सोचते कब नींद लग गयी पता ही नहीं चला. अचानक मेरा सेल बजने लगा और मैं झटके से उठा. घडी मैं १२ बजे थे. मैंने नंबर देखा. अनजाना नंबर था.

मैं : ह ह हेल्लो....
फ़ोन पर : हेल्लो.....इज इट शील ?

मैं : य य येस .......ह ह हु इस इट ?
फ़ोन पर : इसका मतलब तुम नहीं पहचाने....

मैं : न न नहीं ?
फ़ोन पर : भूल गए......रोज़ बस स्टॉप पर मिलते हो.......उस दिन मुझे स्मायल भी दी थी ....मेरा नंबर माँगा था और अपना नंबर दिया था

मैं कनफ्युस हो गया. कौन है ये ? डॉली शर्मा से आज तक बात नहीं की वो भेन्चोद तो नकचड़ी है.......ये हैं कौन ? ?

मैं : द द देखिये.....मैं अ अ आप को नहीं जानता.......और न ही मैंने मेरा नंबर आप को दिया था.
फ़ोन पर : फिर आप ......तुमसे कहा था न आप नहीं बोलना......

मैं : प प प पिया.....तुम हो ?
पिया : खिल खिला के हँसते हुए : हाँ यार.....क्या तुम भी.....लगता है सच मुच में कोई GF नहीं है तुम्हारी.....ये फ़ॉर्मूला तो हमेशा काम करता है. पर तुम भी न..

मेरी तो उड़ के लग गयी. स्वयं अप्सरा इस मिटटी के माधव को फ़ोन करे.........

मैं : प प प पर तुम्हे मेरा नंबर दिया किस ने ?
पिया : कहीं से भी मिला .....तुमसे मतलब.......अरे वो लायब्रेरी के कार्ड पर लिखा था. मैंने सेव कर लिया था की कभी काम पड़ा तो......

मैं : इतनी रात को कैसे फ़ोन किया.....
पिया : इतनी रात को मतलब......अरे मिस्टर अभी तो १२ ही बजे है...कोनसा तुमको नींद में से उठा दिया. अरे तुम सोये थे क्या ?

मैं : ह ह हाँ ...न न नहीं वो ....
पिया : यार सॉरी ...मुझे लगा की मैं लेट सोती हूँ तो सब लेट सोते होंगे....

मैं : अरे नहीं नहीं.....बोलो न....क्या हुआ ?
पिया : यार.....वो नोट्स न......मुझे कुछ समझ ही नहीं आ रहा हैं.......नेक्स्ट मंथ तो सेम की एक्साम ही हैं......अब मैं क्या करू ?

मैं : क क क्या समझ नहीं आ रहा ?
पिया : देखो.....मैंने बेलेंस शीट बना ली........ट्रेडिंग अकाउंट बना लिया....मगर प्रोफिट अन लोस बनाया तो टोटल नहीं मिलती

मैंने सर ठोक लिया. इस पागल को जब येही नहीं पता तो घंटा अकाउंट में पास होगी. मैंने थोड़ी देर उसको समझाया मगर वो सब उसके सर के ऊपर से चला गया.
आखिर मैंने उसको बोला.

मैं : प प पिया.....तुम्हारे तो बेसिक ही क्लिअर नहीं हैं,
पिया : हाँ यार.....मैंने साईंस से कॉमर्स में स्विच किया था ना .....अब क्या होगा.....१५ दिन के लिए कोई ट्यूशन भी नहीं मिलेगी और मिली भी तो बेसिक कहाँ से आएगी.

मैं चुप था.....मगर मेरे दिमाग में कीड़ा कुलबुलाने लगा था.

मैं : प प पिया...तुम घर पर किसी प्रायवेट ट्यूटर से पढ़ लो ?
पिया : अरे पर अभी मिलेगा कौन यार ??? एक मिनिट ........तुम भी तो पढ़ा सकते हो....

मेरा दिल हाई जम्प मार रहा था. पहले तो मैंने नाटक किया फिर धीरे से मान गया.

मैं : ठीक हैं तुम कल शाम को मेरे घर आ जाओ........पांच बजे ठीक हैं ?
पिया : यार...वो क्या है की भाई को तुम जानते हो.......वो आने नहीं देगा.....क्या तुम मेरे घर पर आके नहीं पढ़ा सकते ?

अगर गांड फटने से आवाज़ आती होती तो बोफोर्स से तेज आवाज़ मेरी गांड फटने की आती. मैं उस सांड नवजोत के सामने तो फटकता नहीं था.....उसके घर जाना तो मौत को गले लगाने जैसा था.....पिया मुझे मनाने लगी और मैं चूतिया उस की बातों में आ गया.
सन्डे था. इस लिए आराम से उठा. चाय पी कर टीवी देख रहा था की चाची आई और बोली

चाची : लल्ला वो क्रीम लाया क्या ?
मैं : कौन सी क्रीम ? अच्छा वो.....हाँ वो वाली. सामने ही रखी है......चाची वो दवाई वाले ने कहा है की इसको लगाने के बाद ....

और मैं झिझकने की एक्टिंग करने लगा......

चाची : लगाने के बाद क्या ? बोल ना...
मैं : व व वो....आप वो मत पहनना..

चाची : क्या ? साड़ी ? बोल ना लल्ला ?
मैं : व वो पैंटी....म म मत पहनना.....ऐसा बोला दवाई वाले ने.

चाची : ओफ़ फ़ो........अरे लल्ला वो तो मैं दो दिन से उन्ही नहीं पहन रही.....इतनी खुजली चलती है. पैंटी पहनती तो अब तक
छील जाती मेरी..........

आप को तो पढ़ के मज़ा आ रहा हैं. मगर मेरी वहां पर हालत ख़राब हो गयी.......चाची मुझे मुस्कुरा कर देख रही थी और मैं कालिदास उनकी आधे ढलके आँचल में मचलते मम्म्मे और साड़ी की साइड से दिखती उनकी नाभि को देखे जा रहा था. मेरी सांसें तेज़ हो गयी थी..........तभी वो बोली

चाची : लल्ला....क्या बैठे बैठे सोफा तोड़ रहा है, चल मेरी मदद करवा दे. पानी की टंकी साफ़ करनी है. तेरी छुट्टी है और आज
नल भी नहीं आये टंकी पूरी खाली है.

अब चाची बोले और मैं मना कर दूँ ये संभव है क्या.......मैं चुप चाप चाची के साथ छत पर गया और सीधा टंकी में उतरने लगा.

चाची : अरे...ये कपडे गंदे नहीं हो जायेंगे क्या ? फिर मुझे ही धोना पड़ेंगे......ये पजामा और टी शर्त खोल और फिर अन्दर जा.

ये कह कर वो फिर वो ही मंद मंद मुस्कुराने लगी.

मैंने चाची से नज़ारे मिलते हुए अपना टी शर्ट खोला....अन्दर कुछ भी नहीं पहना था......मेरे सीने पर बाल ऊग चुके थे......
रोज़ दंड लगाने से कंधे और सीना भी मांसल और कसरती हो चला था. चाची बोली

चाची : हाय राम ......लल्ला तू तो पूरा गबरू जवान हो गया है रे......जब शादी हो कर आई थी तब तो लड़कियों जैसी आवाज़ थी
तेरी और वैसे ही दीखता था. एक दम चिकना.......मगर अब तो पहलवान दिखने लगा है.

मेरा सांप फुफकारी मारने लगा था. सुबह सुबह की ठंडी हवा.......मेरा नंगा सीना और चाची की गरमा गरम बातें.

मैंने उनको थोडा छेड़ा...

मैं : तो क्या चाची .....तब तो आप की लड़की जैसी दिखती थी..... अब तो आंटी हो गयी हो
चाची : राम.....राम......आंटी ? क्यों रे लल्ला ? मैं आंटी जैसी कहाँ से लगने लगी ?

मैंने हिम्मत जुटाई और उनकी उभरे हुए नितम्बो की तरफ इशारा कर दिया......

चाची ऑंखें तरेर कर बोली : हैं.......इतने भी मोटे नहीं हुए की आंटी बोलो.......

यह कहकर वो अपने ही नितम्ब दबा दबा कर देखने लगी.....जैसे जताना चाह रही हो की उनके नितम्ब आज भी सुडोल है. कौन कमबख्त कह सकता था की चाची के नितम्ब सुडोल नहीं.......कोई भी उनको देखता तो सबसे पहले उनके होटों के ऊपर का वो तिल ही देखता और फिर सीधी नज़र उनके गोल गोल उभरे हुए नितम्बो पर ही जाती........चाची अच्छी खासी गदराई हुयी थी.......मम्मे भी ऐसे थे की ब्लाउस से बाहर ही झाँका करते......कमर का घुमाव इस कदर नशीला था की नज़र उस पर रुक नहीं पाती और उन की नाभि पर ही जाके कर रूकती.

मैं : चाची......आपको पीछे से दीखता नहीं.....मगर सच्ची बहुत बढ गए है ये ....
चाची : तू तो यूँही कहता है लल्ला.....मुझे चिड़ा रहा है ना ? मैं कोई मोती थोड़ी ना हुई हूँ ?

कहकर थोड़ी मायूस सी शकल बना ली.
मैंने हिम्मर जुटाई और आगे बढ कर उनके नितम्बो पर हाथ रक्खा और दबाते हुए बोला......

मैं : य य ये देखो..... य य ये जो है ना......यहाँ पर थोडा सा मोटापा दीखता है. इतना मांस होने से अ अ अ अप म म मोटी
दिखती हो.

मैं लगातार उनके नितम्बो को अपने हाथो से नाप रहा था. वो एकटक मेरी तरफ ही देख रही थी......उनकी ऑंखें थोड़ी से नशीली हो गयी थी.....मैं हाथ उनकी कमर पर लगाया और बोला

मैं : अ अ अब ज ज जैसे यहाँ पर.......क क कम मांस है........पर आप के पिछवाड़े और (फिर हाथ उनकी मोटी मोटी जांघों पर फिरा कर बोला ) और आप के यहाँ पर थोडा मोटापा आ गया है.........और.....ये जो है ना.....(कहकर उनकी गांड मसकाने लगा)
यहाँ पर ही आप को देख कर कोई ब ब ब बोल सकता है की .....

तभी.................
माँ नीचे से आवाज़ लगा रही थी.

माँ : नीलू अरे ओ नीलू

मैंने तो माँ की आवाज़ सुनते ही घबरा कर हाथ चाची के नितम्बो से हटा दिया. मगर चाची के चेहरे पर शिकन तक नहीं आई. उन्होंने ऊपर खड़े खड़े ही माँ को बताया की वो टंकी धुलवा रही है और आधे घंटे मैं नीचे आएगी. यह बोल कर मेरी तरफ मुड़ी और बोली

चाची : चल लल्ला....मुझे तो तुने आंटी बना ही दिया....अब तो टंकी धो ले......
मैं टंकी में उतरने लगा और चाची फिर से मेरे पजामे की तरफ इशारा कर के बोली

चाची : अरे....इसको तो खोल लल्ला.....

मैंने सकपकाते हुए पजामा का नाडा खीचा और उसको नीचे उतार कर खड़ा हो गया. मैंने जौकी का अंडरवियर पहना था. चाची के बदन का मोटापा बताने के चक्कर में सांप खड़ा हो गया था..... चाची के माँ से बात करने के दौरान वो तो फिर से बैठ गया था मगर कुछ precum की बूंदें मेरे अंडरवियर के अगले हिस्से पर साफ़ दिख रही थी. एक गोल गोल गीला धब्बा आ गया था. चाची ने सीधा वही पर देखा.मैं उसे हाथों से छुपाने लगा मगर वो निर्लज्ज औरत तो ऐसे घुर घुर कर देख रही थी जैसे बिल्ली चूहे को घूरती है. उनके चेहरे पर वो ही टेडी मुस्कराहट थी. मैं चुप चाप टंकी में उतार गया. हमारी टंकी बहुत बड़ी है, उसे साफ़ तो करना ही था मगर कुछ दिन पहले टंकी में पानी देखने के चक्कर में माँ की एक सोने की चूड़ी भी उस में गिर गयी थी. टंकी में पानी तो ज़रा सा था मगर नीचे गंदगी होने से कुछ दिख नहीं रहा था, मैंने चाची से टार्च मांगी, वो तो सब सामान साथ लायी थी. मैंने टोर्च ली और उसे नीचे घुमा घुमा कर ढूँढना शुरू कर दिया, तभी चाची ने कुछ कहा और मैंने टंकी में से ऊपर देखा.

टंकी का मुंह ज़रा सा था, और चाची उसके दोनों और पैर कर के खड़ी थी. दोनों पैर खुल जाने से साड़ी झूल गयी थी. मैंने उनकी टांगो के बीच देखा, चिकनी चिकनी टंगे घुटनों तक दिख रही थी. मैंने टोर्च ऊपर की और उसका फोकस चाची की टांगो के बीच कर दिया और नज़ारे का मज़ा लेने लगा. मेरी नज़र एक कीड़े के तरह उनके पैरों पर चद्ती चली गयी. जैसे की मैंने बताया उनकी टांगे बहुत ही चिकनी थी......उनकी जांघें साफ़ साफ़ नज़र आ रही थी.....चाची सांवली थी मगर उनकी टांगे चिकनी होने के वजह से गोरी गोरी लग रही थी. तभी मैंने ध्यान से देखा....उनकी दांई जांघ पर कुछ लिखा था.....मैंने ध्यान से देखने की कोशिश की तो दिखा की वो गोदना थे. चाची ने जांघ पर कुछ लिखवा रखा था. मैंने गाँव के लोगो को अक्सर हाथों पर अपना या भगवन का नाम गुदवाये हुए देखा था मगर जांघ पर ...... ??? क्या लिखा है सोचते सोचते मेरी नज़र और ऊपर उठी और मेरी नस नस सनसनाने लगी.

चाची की वो चूत, जो मैं न ही दरवाजे की आड़ से जब वो चाचा से ठुकवा रही थी और न ही जब वो कपडे धो रही थी, नहीं देखा पाया था. वो चूत मेरी नज़र के सामने थी.
उन्होंने सही में पेंटी नहीं पहनी थी.

चाची मस्ती में अपनी दोनों टाँगें चौड़ी कर के टंकी के मुंह पर खड़ी थी और मैं टंकी के अंदर से टोर्च उनकी साड़ी के अंदर मार कर वो नज़ारा देख रहा था जो किसी सन्यासी को भी भोगी बना देता. भले चाची सांवली थी मगर उनकी चूत का सांवलापन मदहोश कर देने वाला था. चूत बालों से भरी हुयी थी .........चारो तरह झांटे इस तरह उगी हुयी थी जैसे खेत की सुरक्षा में बागड़ लगी हो. उनकी चूत के दोनों होंट थोड़े थोड़े से खुले और बाहर आये हुए थे. जैसे ही टोर्च की रौशनी उस पर पड़ी वो चमकने लगी पहले तो मैंने सोचा की ये क्या है ? फिर मुझे समझ में आया की चाची की मोटी मोटी गांड दबाने से उनकी चूत पनिया गयी है और कामरस निकलने लगी है. मेरे मन में आया की हाथ बड़ा कर चूत को छू लूँ......मगर मैं ठहरा गांडफट .....बड़ी मुश्किल से अपने आप को रोका, मगर लंड महाराज अपना सर उठा चुके थे.
मैं अंडरविअर में था. कहाँ छुपाता ? तभी चूड़ी मेरे पांव से टकराई और मैंने चाची की चूड़ी पकड़ा दी.......वो झुकी और मुझे उनके कसे हुए मम्मे मेरे चेहरे के ठीक ऊपर झूलते हुए दिखे. साली ने खुजली की वजह से पेंटी नहीं पहनी थी मगर ब्रा क्यों नहीं पहनी ये मेरी समझ से बाहर था....
चाची के झूलते मम्मे मेरे चेहरे से मुश्किल से २ फीट की दुरी पर थे. उनकी मीठी साँसें मेरे चेहरे से टकरा रही थी. उन्होंने चूड़ी ली और खुश होके बोली.

चाची : लल्ला......ये तो मानना पड़ेगा की नज़र तो तेरी तेज़ है. भाभी जी खुश हो जायेंगे. चल अब बहार आ जा.

मैं क्या बोलता और क्या बाहर आता. इतनी सी देर में इतना नज़ारा देख कर बाबुराव इतना कड़क हो गया था की अंडरविअर में तम्बू बन चूका था. एक बड़ा सा धब्बा सामने की तरफ आ गया था जो मेरे लार टपकाते लंड की कारस्तानी थी. मैंने चाची की टाला की आप जाओ मैं आ रहा हूँ. पर वो तो जिद्दी नंबर वन थी. मानी नहीं और मुझे ऊपर खिंच लिया. मैं बाहर आ के उनके सामने सर झुका के खड़ा हो गया. वो मुंह पर हाथ रख कर बोली :

चाची : हाय राम.....लल्ला टंकी साफ़ कर रहा था कि गन्दी ??
मैं : न न नहीं चाची.......व व वो .....मैं

मैं अपने खड़े लंड को हाथ से छुपा रहा था और वो ऑंखें सिकोड़ कर कभी मेरा चेहरा तो कभी मेरा लौड़ा देख रही थी. तभी फिर से माँ की आवाज़ आई. चाची ने मेरे लंड से बगैर नज़रे हटाये माँ से कहाँ कि वो आ रही है और मुझे मंद मंद मुस्कान देती हुयी गांड हिलाते हिलाते नीचे चली गयी. मुझे ऐसा लगा कि शायद आज उनकी गांड ज्यादा ही लचक खा रही है. मैं जानना चाहता था की उनकी जांघ पर क्या नाम गुदा हुआ है.
दिन में exbii पर गरम गरम कहानिया पढ़ रहा था की मोबाईल की घंटी बजी. मैंने देखा तो दिल ने झटका खाया......पिया का फ़ोन था.

मैं : ह ह हेल्लो...
पिया : हाईइ ....क्या कर रहे हो ?

मैं एक दम हडबडा गया.

मैं : म म म कहानी .....पढ़ .....म म म मतलब की......कहानी मूवी देख रहा हूँ...
पिया : क्या...घर पर ? अरे मुविस तो मल्टीप्लेक्स में देखते है.

मैं : हुह ? मतलब ?
पिया : अरे क्या तुम भी....आई मीन की घर पर मूवी क्या मूवी देख रहे हो....फ्रेंडस के साथ देखना चाहिए समझे

मुझे लगा की वो शायद चाहती है की मैं उसे ही साथ में चलने के लिए पूछ लूँ. तभी मुझे उस सांड नवजोत की शकल याद आ गयी और मेरे अरमानो की हवा निकल गयी. वो अब भी कुछ बोले जा रही थी

मैं : क्या ? क्या कह रही हो ?
पिया : अरे मैं पूछ रही हूँ की तुम आ रहे हो न घर पर ? कहाँ खोये रहते हो मिस्टर ? GF को मिस कर रहे हो क्या ?

मैं : न न नहीं ....म म मेरा मतलब है की ह ह हाँ मैं तुम्हारे घर आ रहा हूँ......व व वो तुम्हारे भैया को कोई ओब्जेक्शन तो नहीं है न ?
पिया : नहीं यार.....पहले तो उसने साफ़ मना कर दिया पर फिर मैंने पापा को बोला तो पापा ने उसको डांट दिया. मेरा साल ख़राब हो जायेगा तो ?

मुझे समझ नहीं आ रहा था की हँसु या रोऊ....उस सांड को मेरे उसकी बहन को पढ़ाने में दिक्कत थी, पर इस शाणी ने अपने बाप के थ्रू गेम जमा लिया था.......जितनी सीधी दिखती हैं उतनी सीधी तो नहीं हैं. मैंने उसको शाम 6 बजे आने का बोल दिया.

 
शाम को ६ बजे पता ढूंढता हुआ मैं सरदार प्रताप सिंह के घर पहुंचा. घर तो क्या था.....हवेली थी .....आगे जो लॉन बना था वो ही मेरे घर से बड़ा था. सरदार प्रताप सिंह, दारू और govt का बहुत बड़ा ठेकेदार था. येही समझो की सफ़ेद कपड़ो में डोन.
पुलिस हो या नेता.....सब उसकी जेब में रहते थे. इसीलिए तो नवजोत इतनी माँ चुदाता था.

मैंने बेल बजाई.......दरवाजा खुला और उसके साथ मेरा मुंह ही खुल गया ....

जिसने दरवाजा खोला था......हाईट करीब 5 फुट 8 इंच. दूध में मिले गुलाब के जैसा रंग. काला सलवार सूट बदन पर ऐसा कसा हुआ था की एक एक उभार चीख चीख के बुला रहा था. मस्त गदराया हुआ बदन था यार..........
आँखों में गहरा काजल था.......और बिलकुल गुलाबी होंट........और गले पर चिपके दुप्पट्टे के नीचे एक खाई...जी हाँ....खाई....
दो पहाड़ों के बीच की घाटी......उसके मम्मे इतने बड़े थे की उनको मम्मे नहीं थन कहना चाहिए था........
एक दुधारू भैंस के थन. पर अजीब बात यह थी की इतने बड़े मम्मे भी उस पर फब रहे थे क्योकि वो लम्बी भी थी और चौड़ी भी. डनलप का गद्दा थी साली.....सेक्सी आँखों से वो भी मुझे ऊपर से नीचे तक नाप रही थी और मैं तो उसको कभी से नाप चूका था. बल्कि अब तो मेरा सेकंड रिविजन चालू हो गया था.

उसकी शक्ल नवजोत और पिया से मिलती थी, शायद उनकी बड़ी बहन थी. मैं बोला

मैं : न न नमस्ते जी......म म म शील हूँ....व व

वो मेरी बात बीच में ही काट कर बोली, " हाँ हाँ शील बेटा......आओ आओ, पिया भी अभी आई हैं"

बेटा ??? अबे ये है कोन ? तभी अन्दर से पिया की आवाज़ आई.

पिया : कौन हैं मम्मा ?

मम्मा ? ये पटाखा पिया की माँ ? तभी मुझे समझ में आ गया की जब खेत इतना उपजाऊ है तो फसल तो हरी हरी ही आनी हैं.
 
उन दोनों ने मुझे ले जा कर सोफे पर बिठा दिया. पिया की माँ मेरे सामने बैठी थी और पिया उसके पीछे सोफे का सहारा लेकर खड़ी थी. दोनों की आँखों में वो चमक थी जिसे मैं न सिर्फ देख रहा था बल्कि अपने रोम रोम पर महसूस भी कर रहा था. पिया की माँ खनकती हुयी आवाज़ में बोली, "कहाँ रहते हो शील ? ", मैं जैसे नींद से जगा मैंने कहा, " गुलमोहर में, आंटी".

वो मुंह बनाती हुयी बोली, "आंटी नहीं, पम्मी नाम हैं मेरा, आंटी वांटी मत कहा करो, यु नो अजीब लगता है".

एक मैंने चाची को आंटी बोल दिया था तो पूरा शरीर नापने को मिल गया था. इसको तो आंटी - आंटी बोल कर चोद ही दूंगा.
वो इधर उधर की बातें करती रही और मैं उसको थनों और बैठने से फैली हुयी गांड की साइज़ नापने में लग गया. उनकी बातों से साफ़ था की सरदार प्रताप सिंह के रुतबे और डर की वजह से दोनों माँ बेटी का कोई सामाजिक जीवन नहीं था. सरदार जी को अपने काले कामो से फुर्सत नहीं थी और यहाँ पर इस दुधारू भैंस को कोई पूछने वाला नहीं था. काफी देर बाद पिया बोली, "ओफ्फो मम्मा, वो मुझे पढ़ाने आया है की आप की गोसिप सुनने, आप को भी गोसिप के अलावा कोई काम नहीं. चलो शील स्टडी करना है." मैंने कहा "ठीक हैं तुम बुक्स ले आओ".

"बुक्स ले आओ मतलब", पिया ने माथे पर सल लाके कहा, " मिस्टर, मेरे रूम में स्टडी टेबल हैं"

यह हसीना मुझे, अपने रूम में ले जा रही थी. और इधर उसकी माँ मुझे ऐसा देख रही थी जैसे मैं कोई दिल्ली दरबार में लटका चिकन हूँ. कसम से, मुझे ऐसा लगने लगा था की मेरी ग्रह दशा में कोई बहुत ही बड़ा बदलाव हुआ है. इतना सब कुछ इतने कम समय में हो रहा था की कुछ समझ नहीं आ रहा था.

रूम में जाते ही पिया ने दरवाजा बंद कर दिया, फिर मुझे देखकर बोली, "अरे यार, सब लोग इतना डिसटर्ब करते की पूछो मत.
इसी लिए डोर बंद कर दिया. अब कोई नहीं आएगा क्योकि अगर मेरे रूम का डोर बंद है तो फिर पापा भी पहले नोक करते है."

मैंने मन ही मन सोचा मेडम ये ज्ञान हमे क्यों दे रही हो. फिर मैंने थोडा सिरियस होके उसे पढने के लिया कहा. उसकी टेबल पर मैगज़ीन का अम्बार लगा हुआ था. वो उन्हें हटाने लगी मैंने उसकी स्टडी टेबल की चेयर खिंची और बैठ गया. बैठते ही मुझे लगा की चेयर पर कुछ रखा था, मैं उठा और मैं उस कपडे को उठा कर उसे देने लगा, "ये लो" और तभी मेरी नज़र उस कपडे पर पड़ी और मेरे कान गरम हो गए. वो एक डिज़ाइनर लेस वाली ब्रा थी, जिसका मटेरियल नेट का था. मतलब पूरा पारदर्शी.

उसने लपक के मेरे हाथो से ब्रा छीन ली और ड्रावर में रख ली. वो शर्म से हौले हौले मुस्कुरा रही थी और मुझे उस से भी ज्यादा शर्म आ रही थी.
 
थोड़ी ही देर में मुझे समझ आ गया की पिया को पढाई में कोई इंटरेस्ट नहीं हैं. मैं जैसे ही कुछ भी एक्सप्लेन करता और वो इधर उधर का टोपिक निकाल लेती. वो बस बातें करना चाहती थी. मुझे समझ आ रहा था की इस के सांड भाई की वजह से ये कभी भी लौन्डों से दोस्ती नहीं कर पाई हैं और अपने माँ बाप को पढाई के नाम पर चुतिया बना कर इस को सिर्फ गप्पे मारनी है.

सिर्फ गप्पे मारनी है या.......

कीड़ा......कुलबुलाने लगा था.

उसने व्हाइट टी शर्ट पहनी थी और उसके नीचे सोफ्ट सा पजामा. जहाँ टी शर्ट ख़तम होती थी और जहा से पजामा शुरू होता था उसके बीच थोड़ी सी जगह थी जहाँ से उसकी संगमरमर जैसे कमर दिख रही थी. वो जैसे ही झुकती, दीदार हो जाता. मैं बैठा बैठा आनंद ले रहा था. उसने अचानक मुझे ताड़ते हुए देख लिया और मैं सकपका कर इधर उधर देखने लगा. वो मुझे देखने लगी और कुछ सोचने लगी. अचानक वो बोली, " शील, तुमसे कुछ पुछु ? बुरा तो नहीं मानोगे ?". मैंने कहा पूछो ना.

वो पूछ पड़ी "तुम्हारी हेल्थ-हाईट अच्छी है, दिखने में बुरे नहीं हो, तुम में तमीज़ है.......तुम ये हकलाने की बीमारी का इलाज क्यों नहीं कराते ?" मैंने ठंडी सांस ली और कहा, " पिया, दरअसल डॉक्टर का कहना है की मेरे गले में कोई दिक्कत नहीं है, मैं सिर्फ गुस्से में या नर्वस होने पर ही हकलाता हूँ" . "हम्म........गुस्से का तो समझ आया......मगर तुम नर्वस कब होते हो ? "
उसने पुछा. मैंने उसे बताया, "जब कोई गलती कर दू या कोई लड़की मुझसे बात कर रही हो या......."

"या मतलब क्या ? मैं तो तुमसे बात कर रही हूँ तो क्या मैं लड़की नहीं हूँ ? ", उसने माथे पर सल लाके पुछा .

यह कहकर उसने मेरे जांघ पर अपने हाथ रख दिया और सीधा मेरी आँखों में देखकर बोली, " ऐसे होते तो क्या नर्वस ?"
यह सुनकर मेरा लंड नींद में से जगा और उसने अपना पूरा फन फैला लिया. मुझे दिक्कत होने लगी मगर पिया का हाथ इतना गरम आनंद दे रहा था की हिलने की इच्छा भी नहीं हो रही थी. ज्यादा प्रोब्लम हुयी तो मैं एकदम हिला और अपने लंड को
एडजस्ट किया. पिया की निगाहे मेरे लंड पे टिक गयी और उसने मेरी पेंट के उभर की तरफ इशारा करके पुछा, " नर्वस होते हो तो ऐसा भी होता है क्या ?" कसम से इच्छा हुयी की इस को यहीं पटक कर अपना लंड पेल दू, मैंने उसकी तरफ हाथ बढाया और तभी किसी ने दरवाजा जोर से खटखटाया.

नवजोत की आवाज़ आई, "पिया.....दरवाजा खोल". पिया का चेहरा एकदम तमतमा गया, वो उठी और पैर पटकती हुयी दरवाजे पर गयी. उसने जोर से दरवाजा खोला, "क्या है भाई ?, आप तो पढ़ते नहीं मुझे तो पढने दो."

नवजोत ने कहा, "हाँ हाँ ...पढ़ ले...,.मैं तो तेरे माट साब से नमस्ते करने आया हूँ. नमस्ते माट साब."

मेरी गांड की फटफटी चल निकली थी. साला मादर चोद.....इसको अभी ही आना था. मैंने कुछ नहीं कहा और घडी देखते हुए उठा और पिया से कहा, "अच्छा मैं चलता हूँ, आप रिवायिस कर लेना."

नीचे आया तो पम्मी आंटी बैठी थी, वो बोली, "जा रहे हो शील, (बेटा लगाना भूल गयी). ध्यान रखना पिया का. अकाउंट में बहुत वीक हैं. कल भी ६ बजे ही आओगे ? " मैंने हाँ कहा और चुप चाप सुमड़ी में निकाल लिया. अचानक पीछे से आवाज़ आई,
" ओये हकले......अबे रुक.....", साला सांड मेरा पीछा नहीं छोड़ेगा.

मैं रुक गया. नवजोत आया और मुझे घूरने लगा.......मैं उस से नज़रे नहीं मिला रहा था.....उसने कहा ," देख बेटा, पढ़ाने आता है, सिर्फ पढ़ाइयो......कुछ इधर उधर किया तो समझ लियो ....."

मैं हाँ हूँ बुदबुदाते हुए चुप चाप निकाल लिया.

इधर उधर घूम कर घर पहुंचा तो 11 बज गए थे. चाची बैठी बैठी टीवी देख रही थी. मुझे देखकर बोली,

"आ गया लल्ला....चल खाना खा ले.". मेरा सर भारी हो रहा था मैंने मना कर दिया. वो उठ कर मेरे पास आई, "क्या हुआ लल्ला, तबियत ठीक नहीं क्या ? ". मैंने कहा, "चाची सर भारी हो रहा है". वो बोली, "चल सर में तेल मालिश कर दूँ. मैंने मना कर दिया और उनको कहा की वो सो जाए.

तो वो बोली," क्या सो जाऊं लल्ला, आज ३ ट्रक माल आया है, तेरे चाचा खाली करवा कर आयेंगे. फिर उनको खाना देने उठना पड़ेगा और तुझे पता है की मैं एक बार सो गयी तो बम फूट जाये तो भी नहीं उठती. चल तू इधर आ"

कहकर उन्होंने मुझे बैठा दिया. वो सोफे पर बैठी थी और मैं उनके आगे ज़मीं पर. उन्होंने अपने दोनों पेरों को थोडा थोडा खोल कर फैला लिया और मुझे पीछे खिंच कर बैठा लीया. वो ठंडा तेल लगा रही थी, उनके नर्म नर्म उंगलियों से छुने से ही मेरा सर हल्का होने लगा. वो टीवी भी देख रही थी. गोविंदा की मूवी आ रही थी जो उनका फेवरेट हीरो था. अचानक एक कॉमेडी का सीन आया और चाची जोर जोर से हंसने लगी. हँसते हँसते वो आगे झुक गयी और उनके दोनों मम्मे मेरे सर से टकराने लगे.
लंड तुरंत खड़ा हो गया. मैंने थोडा सर घुमाया तो छोटे से ब्लाउस में फंसे बेचारे मम्मे उन्हें बाहर निकालने की फरियाद कर रहे थे. चाची के सोफ्ट मम्मे मेरे मुंह से सिर्फ कुछ इंच दूर थे. लंड ऐसा तना की लगा पैंट में ही छेद कर देगा.चाची ने अपनी टांगो से भी मुझे जकड लिया था. मैंने बड़ी मुश्किल से अपने आप को संभाला.

कीड़ा........कुलबुलाने लगा.

मैंने समझ गया की चाचा २-३ घंटे नहीं आएगा और माँ - पापा तो कब के सो चुके होंगे . मैंने चाची से पुछा.

"चाची वो.......आप की खुजली अब ठीक है ?"

एक सेकंड में चाची के हाव भाव बदल गए. उन्होंने एक पल मुझे टेडी नज़र से देखा और फिर बोली,

" नहीं रे लल्ला, थोडा तो आराम है मगर अभी भी हो जाती है. देख ना तुने याद दिला दिया और शुरू हो गयी".

उन्होंने तुरंत अपनी साड़ी के ऊपर से अपनी मुनिया को खुजाना शुरू कर दिया. वो बिंदास मेरी आँखों में ऑंखें डाल कर अपनी चूत खुजाले जा रही थी. मेरा सांप ऐसा लहराने लगा जैसे कोई सपेरा बीन बजा रहा हो. मैंने पुछा,

"चाची.....आप पेंटी तो नहीं पहन रही हो ना ?". चाची से एक ठंडी सांस ली, अपने मम्मे और उभारे और बोली, "अरे लल्ला....पेंटी तो कब से ही नहीं पहनी. दिन भर ऐसे ही घुमती हूँ......कभी हवा तेज़ चलती है ना तो वहां तक झोंके आते है"

चाची की ऐसी बातें सुन सुन कर लंड लार टपकाने लगा. मैंने झोंक झोंक में उनसे पुछा....

"चाची, मैं आपको बोलना भूल गया वो दवाई वाले ने ये भी कहा था की ये दवा बाल साफ़ कर के लगानी है, पर आप ने तो साफ़ किये ही नहीं"

ये बोलते ही चाची ने एक दम पलट के मुझे देखा. एक सेकंड तो वो मुझे देखती रही और फिर उन्होंने पुछा...

"क्यों रे लल्ला....तुझे क्या पता की मैंने...........वहां के बाल साफ़ नहीं किये"

मेरी गांड की फटफटी फिर चल निकली.

मुझे काटो तो खून नहीं. मेरा दिल सीने से उतर के गांड में चला गया था. जैसे दिल धड़कता है वैसे मेरी गांड धड़क रही थी. शायद इसी को गांड फटना कहते हैं.
चाची ने आज मुझे दूसरी बार रंगे हाथों पकड़ लिया था. मैंने कुछ नहीं कहा और सर नीचे कर लिया.

चाची ने मेरे यह हाव भाव देखे तो आवाज कड़क कर के बोली, "बोल लल्ला, तुझे क्या पता की मैंने बाल साफ़ नहीं किये"

मैंने चाची को घुमाने के लिए बोल दिया, "न न न नहीं च च च चाची.....व व वो ....म म म मैं ......म म मैंने ऐसे ही बोल दिया"

उन्होंने फिर से कड़क आवाज़ में पूछा,"बताता हैं की मैं........तेरे चाचा को बोल दूँ"

भाई साहब अपनी तो सांस ही रुक गयी.......सारी गांड मस्ती निकल गयी. मैं चूतिये जैसे मुंह नीचे कर के खड़ा था और वो मेरे सामने अपने दोनों हाथ कमर पर रख कर खड़ी थी. जैसे कोई दरोगा किसी चोर को चोरी करते पकड़ ले. मेरे दिमाग ने काम करना बंद कर दिया था. उन्होंने फिर पूछा,

"बता लल्ला......कहीं तू मेरे कमरे और बाथरूम में ताक झांक तो नहीं करता ? अरे कहीं तू हिरसू तो नहीं है रे ???"

"न न नहीं च च चाची.......म म मैं ताक झांक नहीं करता. वो आज सुबह टंकी में था न......ज ज जब आप टंकी के ऊपर दोनों टाँगें चौड़ी कर के खड़ी थी........तो दिख गया था........मम्मी की कसम चाची......मैं ताक झांक नहीं करता. प प प प्लीज़ आ आ आ आप किसी को म म म मत बोलना.....", मैं रुवांसा हो गया.

उस कमीनी ने फिर पलटा खाया और धीरे धीरे मुस्कुराने लगी.......बोली,

" हाय राम......ये मरी खुजली......न ये होती.....न मैं ऐसी नंगी घुमती......न मेरी फूल कुंवर ज़माने को दिखती"

सीन चेंज हो गया था. चाची के मुंह से उनकी चुत का नाम सुन के मेरे लौड़े ने तुरंत सलामी दी. मैंने हिम्मत की......

"च च चाची.....आप चिंता मत करो. ज़माने ने थोड़ी ही देखा, वो तो मुझे दिख गयी गलती से....."

"अरे लल्ला मैं सब जानती हूँ, मैं तभी सोची थी की ये लल्ला टोर्च की रौशनी मेरी साड़ी में क्यों मार रहा है", चाची ने आखें तरेर के कहा.
"और तभी तू टंकी से बाहर नहीं आ रहा था, क्योकि ये खड़ा हो गया था." वो मेरे लंड की तरफ इशारा कर के बोली.

मैंने भी ढीली बाल देख के बल्ला घुमाया, "अब चाची इसमें इसका क्या दोष, बेचारे को इसकी साथीन दिखी तो यह खड़ा हो गया, हाल चाल पूछने के लिए"

चाची ने वो तिरछी नज़र मारी की दिल से लेकर मेरे गोटों तक सनसनी मच गयी.

चाची मंद मंद मुस्कुराते हुए देख रही थी. बड़ी अदा से इतरा कर बोली, " हाय राम....लल्ला......बहुत बदमाश हो गया है, तेरे लिए तो लड़की मैं ही ढूंढ़ कर लाऊंगी"

मैंने ने कहा, "हाँ चाची, अपने जैसी ही ढूंढ़ कर लाना", बेचारी का एकदम से चेहरा उतर गया. ठंडी सांस लेकर बोली, " मेरे जैसी ला कर क्या करेगा लल्ला, न मैं तेरे चाचा को बच्चा दे पाई ना तेरी माँ जैसा खूब दहेज़ लायी, मुझे तो लगता है की तेरे चाचा भी मुझसे प्यार नहीं करते......ऐसी लड़की का क्या करेगा रे...."

माहोल एक दम बदल गया. उनका चेहरा ही उतर गया था. अचानक मेरे मन में इस दुखियारी के लिए दया आ गयी. मैंने उनको खुश करने के लिए कहा,

" नहीं चाची, आप जैसी ही लाना, इतना सब होने के बाद भी आप कितनी हंसमुख हो, घर के सारे काम संभालती हो, आपके यहाँ आने के बाद से माँ को तो बस मंदिर दीखता है मगर आप फिर भी उनको इतनी इज्ज्ज़त देती हो..... चाचा अगर आपका ख्याल नही रखता और अगर बच्चा ना हुआ तो इसमें आपका क्या दोष ?
खराबी तो चाचा में है." वो एकदम आँखों गोल करके बोली, " क्या बोल रहा है रे लल्ला...." . मैंने और हिम्मत करते हुए कहा, " मुझे पता है की चाचा में शुक्राणु की कमी है, वो रिपोर्ट मैंने पढ़ ली थी"

चाची ने एक ठंडी गहरी सांस ली......उनका ब्लाउस ऐसा तना की लगा आज सारे हुक टूट जायेंगे. फिर बोली, " इसीलिए कहती हूँ लल्ला कि बुरी आदतों से दूर रह, कल तेरी बीवी को भी येही दुःख भोगना पड़ेगा. ना मन में शांति रहेगी ना ....तन में."

मैंने बात काटी, "नहीं चाची ऐसा नहीं हैं, मैं भी कोई रोज़ रोज़ नहीं करता, वो तो आजकल... , और वैसे भी डाक्टर चाचा ने बताया हैं कि कभी कभी करने से कुछ नहीं होता."

"आज कल क्या रे लल्ला......", चाची ने ऑंखें सिकोड़ के पूछा. मैंने हिम्मत जुटाई और पाँसा फेका, "न न न नहीं क क कुछ नहीं..... "

चाची ने आवाज़ कड़क कर के बोला, "बता ना ....आज कल क्या ? "

"वो च च चाची .....आप मजाक करती हो ना...तो मुझे करना पड़ता है"

"हाय राम......बेशरम. तो तू क्या मेरे बारे में सोच सोच कर........हाय राम....उठ यहाँ से.........खड़ा हो जा "

मेरी गांड फटी......"न न नहीं च च चाची.....म म मेरा मतलब है कि मुझे सपने आते है अजीब से......और वो सोचने से ये ऐसा हो जाता हैं, इ इ इस लिए करना पड़ता है"

चाची मुझे घुर रही थी और मुझे समझ नहीं आ रहा था कि क्या करू ? फिर वो बोली, "देख लल्ला....मैं तुझ से बड़ी हु....तेरी चाची हूँ, ये गन्दा गन्दा मत सोचा कर, मैं तो समझ भी जाउंगी कि तू अभी बच्चा है मगर दुनिया क्या कहेगी....."

साली को ये दिक्कत नहीं कि मैं उसके बारे में सोच सोच कर लंड हिलाता हूँ, उसकी तो इज्ज्ज़त के नाम फटी है. मैंने कहा, " चाची मैं कभी किसी से कुछ नहीं बोलूँगा,
माँ की कसम, आप ही तो है घर में जो मुझको समझती है, बात करती हैं, इतना ध्यान रखती हैं, माँ को तो भगवान् और भजन से फुर्सत नहीं और पापा को तो ये भी नहीं पता होगा की मैं कौन सी क्लास में और कौन से कॉलेज में हूँ. चाचा तो यूँही काम में इतना बिजी रहते हैं.

इतनी भारी सेंटी मारी की चाची एकदम पसीज गयी और बोली, "नहीं रे लल्ला.....ऐसा मत बोल रे ...मैं हूँ ना.....तेरा पूरा ख्याल रखूंगी......तेरा मेरा दर्द एक जैसा ही है रे......" कह कर उन्होंने मुझे गले लगा लिया. उनकी हाईट तो कम थी मगर वो बैठी थी सोफे पर और मैं था निचे. मेरा सर सीधा उनके मम्मो के तकिये पर टिका.

एक पसीने और साबुन की खुशबु का मिला जुला झोंका मेरी नाक में आया और मेरा लंड जो उनके पैरों से चिपका था, सर उठाने लगा.

मैं उस गद्देदार तकिये के मज़े ले रहा था, ऐसा लग रहा था की बस यहीं पर समय रुक जाये. चाची ने मुझे धीरे से पीछे किया, और बोली, " लल्ला....तेरी लुगाई बहुत खुश रहेगी रे....तू अब समझदार हो गया हैं. तभी मैंने कहा, "और जवान भी". हम दोनों हंसने लगे.....तभी उनकी नज़र मेरी पेंट के उभर पर गयी जहाँ पर मेरा बाबुराव कसमसा रहा था. मुंह पर हाथ रख पर बोली," राम राम .....लड़का है की सांड है रे ?"

मैंने अनजान बनकर पूछा, "क्यों चाची, सांड क्यों ?"

चाची ने अपना निचला होंट मुंह में दबाया और बोली, "क्योकि सांड भी ऐसे ही होते हैं" . मैंने फिर कुरेदा, " मैं समझा नहीं"

"अरे लल्ला.....वो गाँव में अपने घर एक सांड पाला था.....6 -7 फुट ऊँचा और ऐसा भारी था की 100 गाँव तक उसकी बातें होती थी, वो तेरे चाचा ने उसको गाय गाभिन करने के काम पर ही लगा दिया था, लोग अपनी अपनी गाये लाते, गाय को स्टैंड में खड़ा करते और अपने सांड को उसके पीछे खड़ा कर के कुलहो पर एक लट्ठ मारते.
लठ खाते ही उसका ........वो....... तलवार जैसे बाहर निकलता और वो गाय पर चढ़ जाता. ऐसे वो एक दिन में 6 -7 बार कर लेता था. गाय गाभिन हो जाती, किसानों को अच्छे नस्ल के बछड़े मिल जाते और तेरे चाचा को हर बार के 500 रूपये. तेरे चाचा उस सांड से ही कुछ सीख लेते........"

चाची की आँखों में लाल लाल डोरे दिखने लगे थे, शायद सांड के तलवार जैसे लंड की याद आ गयी थी. मैंने कल्पना की की चाची घोड़ी बनी हुयी हैं और पीछे से मैं उनकी मार रहा हूँ . शायद इसलिए चाची मुझे सांड बोल रही थी.......

मतलब क्या चाची ...................

तभी मेरा मोबाइल बजा, मैं और चाची जैसे नींद से जागे. इतनी रात को कौन उंगली कर रहा था ? मैंने फ़ोन देखा.....

पिया का था. मेरी गांड फटी की अगर चाची ने पूछा की कौन है तो क्या बोलूँगा.

मैंने फ़ोन उठाया , "हाँ बोल..". मेरे ऐसे उत्तर से शायद को सकपका गयी, "ह ह ह हेलो, शील ?"

वाह रे ऊपर वाले, कभी मैं इस लड़की से बात करने समय हकलाता था, और आज यह मुझसे बात करने में हकला रही हैं.

मैंने कहा, "क्या हुआ भाई, सोया नहीं क्या अभी तक".

थी तो पिया भी शातिर, एक सेकंड में माजरा समझ गयी, " अरे कोई बैठा है क्या तुम्हारे पास ?". मैंने कहा, "हाँ यार, बस चाची के साथ बैठा था, गप्पे मार रहा था"

ऐसी गप्पे ही मारने को मिल जाये तो इंसान "दूसरी चीज़े मारने की क्यों सोचे ?? "

चाची ने इशारो से पूछा की कौन है, मैंने ऐसे ही चुतिया बनाया और पिया से बोला, "और बोल, पढाई वगेरह ठीक चल रही है"

"अरे मत पूछो, तुम्हारे जाने के बाद से फिर वोही हालत हो गयी, कुछ समझ नहीं आ रहा. मेरा मन आज तो पढ़ने का भी नहीं हो रहा.", वो बोली.

उसका यह कहना हुआ और मुझे उसका नरम और गरम हाथ का स्पर्श याद आ गया, हाय रे......वो सांड नवजोत नहीं आता तो क्या पता कुछ और होता.
यह सोचते ही ठरक जगी और सिग्नल खड़ा हो गया. साली जींस इतनी टाईट होती है की कोई ध्यान से देखे तो लंड क्या गोटे भी नाप ले. और वो ही काम चाची कर रही थी. मैंने सर उठाया और चाची को देखा तो उनकी टेडी नज़ारे मेरे तने हुए तम्बू पर ही थी. पहले ही पिया की हरकत याद करके मेरा हाल बुरा था उसके ऊपर से चाची की टेडी नज़ारे क़यामत ढा रही थी. धीरे धीरे उनके चेहरे पर वो ही मंद मंद मुस्कान आ गयी. उधर पिया जाने क्या बोले जा रही थी. मैंने कहा, "क्या ? क्या बोला ?"

वो एक दम चुप हो गयी.

मैंने कहा, "हेल्लो ....? आर यु देयर ? "
वो धीरे से बोली, "मैं तुम से बात कर रहू हूँ और तुम्हारा ध्यान ही नहीं हैं, अगर बिजी हो तो कोई बात नहीं"

"अ अ अरे ....क क कुछ नहीं यार...तू बोल ना"
"नहीं, मुझे बात नहीं करनी"

"अरे क्या हुआ" मैंने पूछा. उसका जवाब आये उसके पहले चाची मुझे घुर रही थी.
मैंने सोचा की पहले इसको कल्टी कर दू . नहीं तो चाची को शक हो जायेगा.

" .....अच्छा सुन, मैं तुझे कॉल करता हूँ...थोड़ी देर में.", मैंने उसको पुचकारने की कोशिश की.

"नहीं मत करना, फोन भाई के पास रहेगा.......".

जैसे किसी ने भरे बाज़ार में मेरी पेंट उतार ली हो. मेरी आवाज़ एक दम बंद हो गयी.

फिर मैंने कहा, "अ अ अच्छा.....त त त तो..... ठ ठ ठीक है नहीं क क करूँगा."

अचानक फ़ोन उसके खिलखिलाने की आवाज़ से गूंज उठा, वो जोर जोर से हंस रही थी और मुझे समझ ही नहीं आ रहा था की हुआ क्या ????

" अरे बुद्धू......फोन मेरे पास ही रहेगा, बिलकुल दिल से लगा के रख्खा है ....तुम फ्री हो कर फोन कर लेना..........तुम कितना डरते हो भाई से ......", और फिर जोर जोर से हंसने लगी.

साली .......इसको तो मैं रगड़ रगड़ के..........

मैंने बाय बाय करके फोन रखा

"कौन था लल्ला....."

"कोई नहीं चाची......दोस्त है"

"दोस्त या दोस्तनी ?"

"न न न नहीं चाची दोस्त है......."

"अच्छा .......आवाज़ तो लड़की की लग रही थी"

"न न नहीं चाची व् वो उसकी आवाज़ पतली है"

"लल्ला......पतली आवाज़ वाले दोस्तों से यारी करने से अच्छा हैं की लड़कियों से ही कर ले", कहकर वो भी खिलखिलाने लगी.

मैं भी हंसने लगा.....मैंने कहा, "क्या चाची आप भी.........आप को लगता है की मैं वैसे लडको से दोस्ती करूँगा ? "

"नहीं रे लल्ला....क्या पता........ज़माना ख़राब है, वैसे तू ऐसा करने का सोचता भी तो उसको पहले ही मैं तुझे सुधार देती"

मैंने भोला बन के पूछा...."कैसे चाची......."

"वो तो लल्ला अगर ऐसा कुछ होता तो तुझे पता लग ही जाता", चाची ऑंखें नचाती हुयी बोली.

"बताओं ना चाची.....देखो आप और मैं दोनों दोस्त जैसे ही तो है." मैंने जिद की.

"अरे लल्ला....क्या बताऊ तुझे.......औरत त्रिया चरित्र से हर मर्द से मनचाहा काम करा सकती हैं"

"त्रिया चरित्र ???? ये क्या है.....कोई दवाई है क्या ?", मैंने भोला बन के पूछा.......

ऐडा बन के पेड़ा खाने में तो अपन भी उस्ताद है.

"अरे लल्ला......त्रिया चरित्र मतलब........मतलब ........औरत जो अपने रूप और नखरो से किसी से कुछ भी करा लेती है ना.......उसको कहते हैं त्रिया चरित्र", चाची ने समझाया.

फास्ट बोलर के ओवर ख़तम.........स्पिन चालू. अपना बल्ला भी तैयार हो गया.

मैंने फिर कुरेदा, "चाची ......रूप और नखरे से क्या ? मतलब की...क्या करा ले ?

"अरे लल्ला, कुछ भी करवा सकती है औरत.....आदमी को ज़रा सा इशारा करते है उसके दिमाग का सारा खून वहां से, नीचे चला जाता है, औरत की बातों के आगे अच्छे अच्छे हर मान लेते है", चाची ने गुगली मारी.

"अच्छा चाची....अगर मैं ऐसे लडको से दोस्ती कर लेता, जो लडको को ही पसंद करते हैं तो क्या करती आप ?" , मैंने भी पूछ लिया.

चाची ने अपनी टांगो के बीच में खुजाते खुजाते कहा.

"अरे लल्ला......जो भी करती बस तुझे यह समझा देती की लडको के साथ वो बात नहीं जो एक औरत के साथ है",

अब मैंने भी अपनी नज़रे चाची की टांगो के बीच लगा दी. "चाची......अ अ आप ने वो साफ़ किया की नहीं......."

"क्या रे लल्ला.......", चाची ने ऑंखें तरेरी.

"व व व वोही......वो .....बाल......"

चाची ने धीमे से मुस्कुरा कर ऑंखें सिकोड़ कर सर हिला दिया.

हाय रे.....साला इतने में तो अपने पुरे बदन में सन सनन साय साय होने लगी.

"त त त तो च च चाची........फिर आपकी य य यह ख ख ख खुजली.......की दवाई कैसे काम करेगी.......?

चाची ने ठंडी सांस भरी, "अरे तो अब मैं क्या करू......मुझे बहुत डर लगता है.....ऐसे कैसे साफ़ करू......साफ़ करने के चक्कर में ब्लेड से कट लग गया तो....?"

तभी चाची के खेत के चारो तरफ, उजाड़ बंगले के बगीचे जैसे झाड़-झुरमुट उगा हुआ था. चाची ने कभी नीचे के बाल साफ़ किये ही नहीं थे.

"अरे क्या चाची.....आप भी.......रेज़र से थोड़ी साफ़ करते हैं. हेयर रिमूविंग क्रीम आती है, वो लगा लो. १० मिनट में सब साफ़."

"हे भगवान.....क्या क्या चीज़े आने लगी हैं.........बिलकुल साफ़ हो जायेगा ???"

"हाँ चाची......एकदम साफ हो जाता है....और एक दम चिकनी स्किन हो जाएगी..........आपके गाल जैसी"

"चल हट बदमाश........."

मगर उन्होंने हलके से अपने गालो को सहलाया और जायजा लिया की बाल साफ़ होने के बाद उनकी मुनिया कैसी चिकनी लगेगी.

चाची की आँखों में देखकर ऐसा लग रहा था मानो उन्होंने पी रखी हो.

ठंडी सांस ले कर बोली, "ठीक है लल्ला.....कल क्रीम ला देना.....अभी तो बहुत रात हो गयी....."

"च च चाची अ अ आप बोलो तो मेरे पास रखी हैं........वो क्रीम...", मैंने कहा.

"हाय राम......तुझे क्या काम उसका ? ", ऑंखें गोल गोल कर के उन्होंने पूछा.

"च च चाची........म म म मुझे वहां पर बाल पसंद नहीं......साफ़ रखो तो ख ख ख खुजली भी नहीं होती.......इ इ इसलिए"

चाची उठी और बोली, "चल .....दे दे...."

मैं अपने रूम में गया.......बाथरूम में जाके ट्यूब उठाई.....चाची मेरे पीछे पीछे वहां तक आ गयी थी.....मैं पलटा तो एकदम से हम टकरा गए......

मेरा सीना सीधा चाची के बिने ब्रा में कैद मम्मो से जा टकराया.......साली ये ब्रा क्यों नहीं पहनती. मेरा टी शर्त का कपडा भी पतला था. मुझे उनके खड़े हुए निप्पल महसूस हो गए थे. साली ........मस्ती इसको भी चढ़ रही थी.

चाची एकदम से पीछे हुयी उनका बेलेंस बिगड़ा, मगर मैंने थाम लिया. वो संभाली और बोली,

"लल्ला.....बहुत ताकत आ गयी रे तुझ में......., ला वो क्रीम दे दे......"

मैंने ट्यूब उनको दिया और बताया की इसको अच्छी तरह से फैला कर चारो तरफ लगा लो...........

"अरे यह बीच में लग गयी तो जलन ......तो नहीं होगी.......? मैं तो पहले ही खुजली से मरी जा रही हूँ"

मेरी आवाज़ कांपने लगी थी, "नहीं चाची......ब ब ब बीच में मत लगाना, आप तो साफ़ कर लो.....आपकी खुजाल मिट जाएगी"

चाची ने मुझे निहारा और बोली, "ठीक है बाहर जा........तेरे बाथरूम में ही कर लेती हूँ........मेरे बाथरूम में कपडे पड़े है और वहां पर कांच भी नहीं है"

मेरी कनपटी पर हथोड़े पड़ने लगे..........मुंह सुख गया.......

मेरे बाथरूम में दरवाजा टेड़ा होने से सिटकनी नहीं लगती थी.

"जा.......मेरे कमरे से मेरा टोवेल ले आ.",

मैं चाची के कमरे में गया, उनकी अलमारी खोली. इधर उधर देखा, टोवेल दिखा ही नहीं. नीचे ही नीचे के खाने में देखा तो.......
चाची की ब्रा और पेंटी पड़े थे. और वही पर टोवल था, मैंने टोवल उठाया और तभी मुझे एक ब्रा दिखी, चटक लाल रंग की........
बिलकुल जैसी सनी लिओनी को पहने देखा था. वो लिफ्टर ब्रा थी, मगर उसका मटेरिअल पूरा नेट का था.

आर पार.......अगर चाची इसको पहन ले तो ऐसा क़यामत लगे की............चाची कौन सी सनी लिओनी से कम हैं ...........

मैंने ब्रा उठा ली, इतना नरम मटेरिअल था जैसे मखमल हो......टोवेल और ब्रा ले कर आया
(पेंटी नहीं, क्यों की चाची पेंटी तो पहन ही नहीं रही थी. )

चाची तो बाथरूम के बहार ही खड़ी थी. मैंने सोचा की चाची को बोल दू,

"चाची.....वो....दरवाजे की सिटकनी ख़राब है....."

"हाय राम.......ख़राब क्यों है...? अब क्या करे....? तू रूम से बाहर जाके बैठ "

मैंने हिम्मत की....और कहा..."चाची, म म म मुझे कम्प्यूटर पर काम करना है.......अ अ आप कर लो.....मैं......."

"अच्छा .......???", चाची ने मुझे घुरा.

फिर कुछ सोच कर बोली....."ठीक है लल्ला.....तू कम्प्यूटर पर काम कर ले.....मगर तांका झांकी मत करना", चाची ने ऑंखें दिखा कर कहा.

मैंने मन ही मन सोचा की चाची आप जाओ तो सही.......फिर देखते है.

चाची के सामने मैंने भोले बच्चे जैसा सर हिलाया और कम्प्यूटर ऑन कर लिया. कुर्सी खिंची और बैठ गया.

चाची ने टोवेल उठाया, अचानक ब्रा उसमे से गिर गयी, चाची ने ब्रा को देखा फिर मुझे.

"क्यों रे लल्ला.....ये क्या उठा लाया ?", उन्होंने ब्रा हाथ में हिलाते हुए पुछा.

"व व वो चाची......आप ही ने तो कहा था.....लाने को"

"अरे ....मैंने कब कहा की अंगिया भी लाना ?"

"व व व वो चाची .....म म मैंने सोचा की .....आप ने पहनी नहीं है......तो शायद अब पहनोगी"

ये बोलते ही मैंने अपनी जुबान कट ली......शीट....ये क्या बोल दिया.

चाची ने ऑंखें बाहर कर के पुछा, "क्यों रे बेशरम.......तुझे कैसे पता लगा की मैंने.......अंगिया नहीं पहनी", चाची का चेहरा थोडा लाल हो गया.

मेरी फटफटी.......चल निकली......

मैं सकपका गया.....अब क्या बोलू.....?

थोड़ी हिम्मत जुटाई और कहा, "न न न नहीं चाची.....ऐसा नहीं है......व...व....व....वो आप के ब्लाउस.....म म म में से......
द द द दिखा की.....न न न नहीं पहनी होगी.....श श शायद.....इसी लिए ल ल ल ले आया"

"हाय राम.....लाया तो लाया.....मगर ऐसी ? ", चाची ने होंट दबा कर मुझे घुढकी दी.

"ये तो पहनी न पहनी बराबर ही है.......इतने छोटे छोटे तो कप है इसके......लल्ला तू न बहुत बदमाश हो गया है......"

लल्ला क्या बोलता........लल्ला.....का लुल्ला और ज्यादा बदमाश.

"अब सीधे सीधे कम्प्यूटर पर काम करले......", कह कर चाची बाथरूम में घुस गयी. उन्होंने दरवाजा लगाया और सिटकनी लगाने की कोशिश की......मगर भाई साहब......सिटकनी तो कुत्ते की पूंछ थी. नहीं मानी. चाची ने दरवाज ऐसे ही लगा दिया.

कुछ देर बाद अन्दर ले चिल्लाई....."अरे लल्ला......ये क्रीम धो कर लगानी है या ऐसे ही...."

मैं उठ कर दरवाजे के पास गया....चाची तो दरवाजे के पीछे थी.....मगर मेरे बाथरूम की एक दिवार पर पूरा कांच था. चाची उसमे दिखाई दे रही थी. उन्होंने ट्यूब हाथ में पकड़ा था और..............और उनकी साड़ी खुली हुयी थी.

वो सिर्फ ब्लाउस और पेटीकोट में खड़ी थी. मैंने कहा, "चाची पहले अच्छे से वाश कर लो......फिर लगाना, और लगा कर १५ मिनट रखना. फिर धो लेना......बस...."

"हाँ ठीक है......", कहकर चाची ने अपने पेटीकोट का नाडा खोला.

उनका पेटीकोट खुल कर एक टायर की तरह उनके पेरों में इकठ्ठा हो गया.

चाची ने सच मुच पेंटी नहीं पहनी थी.

बाथरूम में ट्यूब लाइट की रौशनी में चाची का अधनंगा बदन चमक रहा था. मेरी ऑंखें चौंधिया गयी,

वो सिर्फ ब्लाउस में खड़ी थी. काले रंग का पतला सा ब्लाउस. उनके गोल गोल मम्मे साफ़ दिख रहे थे और दृष्टिगोचर हो रहे थे उनके वो खड़े हुए निप्पल. क्या नज़ारा था ......

मेरी नज़ारे उनके चिकने बदन पर नीचे फिसलने लगी. उनकी कमर का कटाव देख कर मेरी साँसें रुकने लगी और फिर तेज़ी से चलने लगी. मैं पहली बार उनको नंगा देख रहा था. उनका पेट हल्का सा बड़ा हुआ था. उसमे उनकी नाभि ऐसी लग रही थी मानो मुंह खोले कोई मछली हो. इतनी सेक्सी तो शिल्पा शेट्टी की नाभि भी नहीं है. मेरी नज़रे और नीचे फिसली.........

चाची ने टांगे चिपका रखी थी पर उनकी झांट के बाल काफी ऊपर तक और बहुत थे.
ऐसे गुच्छे खाए हुए थे मानो लुटी हुयी पतंग की डोर हो. ये तो पक्का था की चाची ने कभी बाल साफ़ किये ही नहीं थे.

अचानक वो पलटी और मेरी नसों के गिटार ने झंकार मारी.

चाची के वो खुबसूरत नितम्ब, जिनको मैं आज सुबह ही नाप चुका था. मेरी नज़रों के सामने थे. मेर मुंह खुला का खुला रह गया. चाची की कमर से उठा कटाव उनके नितम्बो पर पुरे शबाब पर आ रहा था.

ऐसा कटाव था मानो शिमला की सड़कों के अंधे मोड़. चाची के नितम्ब बिलकुल गोल थे. मानो दो देसी तरबूज.
दोनों में प्रीति ज़िंटा के गालो जैसे डिम्पल पड़ रहे थे.

और वो दोनों तरबूज टिके थे, चाची की मोटी गदराई जांघो पर. चाची मोटी नहीं थी, बस गदराना शुरू ही किया था.

ऐसा नज़ारा था की जिसने देखा है, वो मेरी हालत समझ सकता है. गांड भी फटे जा रही थी और मज़ा भी आ रहा था.

चाची फिर से घूमी, उन्होंने अपनी टांगे थोड़ी चौड़ी कर ली थी, चूत तो अभी भी झांटो के घूँघट में छुपी थी, मगर मेरी नज़र फिर से चाची की जांघों पर गयी, उनकी दायीं जांघ पर बना हुआ गोदना ( tatoo ), दिखने लगा था. वो जिसे मैंने टंकी के अन्दर से देखा था मगर पढ़ नहीं पा रहा था. मैंने गर्दन थोड़ी टेडी की तो दिखा.....लिखा था.......

ब.......ल........मा...............बलमा ??

बलमा ? मतलब ? ......शायद प्यार से चाची चाचा को बलमा बोलती हो ? मगर वो तो उन्हें ऐ जी.....कहती है.

बॉस.......यह बलमा का सीन क्या है ......? जांघ पर कोई भी औरत कुछ लिखा ले......ये छोटी मोटी बात नहीं....

तभी चाची ने कमोड का ढक्कन गिराया, एक पैर उस पर रखा और हैंड शावर चालू कर के अपनी मुनिया को धोने लगी.

झांटे गीली होते ही चाची के मुनिया का घूँघट खुल गया......चाची के जैसे उनकी मुनिया भी सांवली है....यह तो मैं टंकी के अन्दर से ही देख चुका था.....मगर मुनिया के होंट भी चाची के होटों जैसे रसीले है.....ये मैं अब देख रहा था......

चाची ने अपनी टांगे खोल रखी थी. एक पैर उठा कर कमोड पर रखा हुआ था......ऐसा लग रहा था मानो वो कामदेव की
पत्नी रति है. चाची अपनी मुनिया को ऊँगली से रगड़ रगड़ के धो रही थी. शायद उनको ऐसा करने में मज़ा भी आ रहा था क्योकि उनकी ऑंखें बंद थी और मुंह हल्का सा खुला हुआ था........................

ये नज़ारा देखा तो किसी बुड्ढे का बुझा चिराग भी भभक जाता . मैं तो फिर.....यूँही ठरकी no .1 था.
पजामे में ऐसा तम्बू बना हुआ था की क्या बोलू......उधर चाची भी बड़े इत्मिनान से अपनी मुनिया की धुलाई और रगड़ाई किये जा रही थी. शावर तो बंद कर दिया था मगर रगड़ना नहीं.....उनकी ऑंखें अधखुली थी और मुंह पूरा गोल खुला था जैसे वो "ओ" बोल रही हो.

तभी उनकी ऑंखें एकदम खुली.....मैं फटाफट दरवाजे से थोडा पीछे हट गया. धीरे धीरे से आगे बाद कर देखा तो चाची कमोड पर बैठी थी. उन्होंने कांच की तरफ मुह किया हुआ था और दोनों टांगे फैला ली थी.

कहते है की मुग़ल बादशाह जहाँगीर ने जब कश्मीर देखा था तो कहा था

"गर फिरदौस रॉय -ऐ -ज़मीं अस्त , हमीं अस्त -ओ हमीं अस्त -ओ हमीं अस्त ."

इसका मतलब था की अगर ज़मीं पर कहीं स्वर्ग है तो यहीं है यहीं हैं यहीं हैं .....

मुझे आज चाची की फैली हुयी टाँगें देख कर इन लाइनों का मतलब और भावना समझ आई.

चाची की टांगे खुलने से उनकी चूत का भरपूर दीदार हो रहा था. बिलकुल पनियाई हुयी थी , मुनिया के दोनों होंट खुल गए थे, ऐसा लग रहा था की किस करने का बुलावा दे रहे हो. रगड़ाई और मसलाई से उनकी चूत चमक उठी थी मगर चारो तरफ फैली झांट नज़ारा ख़राब कर रही थी.

उन्होंने ट्यूब हाथ में ली और थोडा सा आगे सरक के अपनी टांगो को और फैला लिया.
दबा दबा कर निकालने लगी , उन्होंने अच्छे से क्रीम को चूत के उपरी हिस्से पर फैला लिया और चूत के साइड के हिस्से में लगाने लगी ……उनकी गर्दन निचे झुकी थी और बड़े गौर से अपनी चूत की आस पास क्रीम लगा रही थी .

मुझे लगा की मेरी साँसें ही रुक जाएगी....

चाची के बारे में कुछ भी सोचना और बात थी और उनको सामने ऐसी हालत में देखना और बात. दिल इतनी जोर से धड़क रहा था की मुझे डर था की चाची को मेरी धड़कने ना सुने दे जाए. चाची तो पुरे मन से क्रीम लगा रही थी. उन्होंने पूरा ट्यूब ख़तम कर दिया और क्रीम को फैला रही थी. मुझे तो उनको क्रीम फैलाते देख कर ठरक चढ़ गयी. उन्होंने अपनी मुनिया के चारो तरफ अच्छे से क्रीम लगा ली थी. आज चाची मुनिया को चिकनी चमेली बनाकर ही छोड़ेगी.

चाची ने क्रीम लगा ली और पीछे टिक कर बैठ गयी. तभी उन्होंने अपने ब्लाउस के हुक खोलना शुरू किये और बड़ी अदा से ब्लाउस भी उतार दिया. मेरा बचा खुचा धैर्य भी ख़तम हो गया. चाची ने आज तो मेरे प्रेशर कुकर की सीटी बजाने का सोच ही लिया था.

हाय क्या सीन था........

उपरवाले ने इतने दिनों तक बूंद बूंद देने के बाद आज तो झमाझम बारिश ही कर दी.

चाची ने ब्लाउस क्या उतारा मेरे दिल दिमाग में भूकंप आ गया. उन्होंने अपने दोनों हाथ ऊपर उठा के अंगड़ाई ली और इधर मेरे डंडे ने भी मुसल का रूप धारण कर लिया.

लंड भी साला इच्छाधारी नाग जैसा है........कभी तो इतना सा रहता है कमज़ोर और मासूम बन के......कोई लड़की गलती से देख ले तो जैसे छोटे बच्चो और कुत्ते के पिल्लो को देख कर जैसे उछल उछल कर खुश होती है वैसे ही छोटी ली लुल्ली को देख कर भी शायद खुश हो जाये ......wow कितना क्यूट है और जहाँ गलती से लुल्ली को हाथ लगाया तो ये रूप बदलकर ऐसा नागराज बनता है की देख के लौंडिया दौड़ लगा दे.

चाची के दोनों हाथ ऊपर होने से उनके दोनों मम्मे ऐसे तन गए जैसे कुंवारी कन्या के हो. चाची भले ही अभी माँ नहीं बनी थी मगर उनके निप्पल अच्छे खासे बड़े थे और क्या तने हुए थे .....

क्या नज़ारा था......चाची दोनों टांगे फैलाये कमोड पर पूरी नंगी बैठी थी....चूत के चारो तरफ क्रीम लगी थी......बैठने से उनकी जांघें और पिछवाडा फ़ैल गए थे और ऐसा घुमाव और कटाव दिखा रहे थे की नजरे नहीं हट पा रही थी. चाची के दोनों हाथ अभी भी ऊपर ही थे , ऐसा करने से उनका पेट अन्दर खिंच गया था और एक दम सपाट दिख रहा था और उनके मम्मे तो ऐसे तीखे तीखे दिख रहे थे मानो किसी राजपूत के भाले की नोक हो.

चाची ने हाथ नीचे किये और एक हाथ अपने मम्मे के नीचे लगा कर धीरे से सहला लिया.....उनके मुंह से सिसकारी फुट गयी......स्स्स् अआह.......बस मैं भी इंसान हूँ यार.
बहुत देर से झेले जा रहा था अब कण्ट्रोल नहीं हुआ और मैंने पजामा निचे सरकाकर अपने महाराज को खुली हवा दिखा दी. ऐसा लगता है मानो लंड की भी ऑंखें होती है बाहर निकलते लंड ने ऐसा नज़ारा देखा तो लंड तो और तन गया. मैंने धीरे से लंड को सहलाया और जैसे रेस के घोड़े को रेस शुरू होने के पहले सहलाओ तो वो हिनहिनाता है वैसे ही लंड ने चाची को एक ठुनकी मार कर सलाम किया

अन्दर चाची ऑंखें बंद किये पूरा आनंद ले रही थी. उनको शायद याद नहीं था की वो मेरे रूम के बाथरूम में पूरी तरह ने नग्न बैठी है या फिर..........

या फिर.......उनको परवाह ही नहीं थी......जो भी हो भाई अपनी तो छप्पर फाड़ के खुल गयी थी. वो भी बड़े इत्मिनान से बाथरूम में कमोड पर बैठे बैठे अपने स्तनों की सहला रही थी और ये नज़ारा देख देख कर बाहर मेरा दिल दहल रहा था. जिस तरह वो मम्मे पर हाथ फेरती वैसे ही मैं अपने हिनहिनाते घोड़े को सहलाता.
कसम से अभी तो हिलाना भी शुरू नहीं किया और ऐसा मज़ा आ रहा था की क्या बोलू...........बस ऑंखें फाड़ फाड़ कर देख रहा था.

अचानक चाची की ऑंखें खुली, जैसे मानो उनको होश आ गया हो, वो अन्दर से चिल्लाई....."अरे लल्ला......कितनी देर लगा के रखना है इसको......."

मैं एक दम उछल गया.

मैं एक दम से घबरा गया........और बिना सोचे मैंने बोल दिया.."चाची 15 मिनट रखना है"

मैंने दरवाजे के बाहर ही खड़ा था, मेरे एकदम बोल देने से कहीं चाची को शक तो नहीं हो गया ? चाची अन्दर से चिल्लाई, "अरे ....तो 15 मिनट हुए की नहीं"

अब की बार मैं थोडा पीछे गया और बोला, "हाँ चाची......म म म मेरा मतलब है की थोड़ी देर और रख लो......"

चाची ने दरवाजे पर हाथ रखा और थोडा सा दरवाजा खुल गया. मैं भाग कर कम्पुटर चेयर पर बैठ गया, दरवाजा मेरी पीठ की तरफ था इस लिए चाची को सिर्फ मेरी पीठ दिखती, यह नहीं दीखता की मेरा पजामा नीचे है और मेरा बाबुराव झूम रहा है.

उन्होंने दरवाजे से सिर्फ मुंह बाहर निकालकर कहा, "अरे लल्ला.....इतनी देर तो हो गयी.....ज्यादा देर लगा के रखने से कहीं और कुछ न हो जाए....पहले ही खुजली के मारे दुखी हूँ "

मैंने कहा, " न न न नहीं चाची.......1 2 मिनट और रख लो......." यह कहकर मैं गर्दन घुमाने लगा तो चाची वहीँ से चिल्लाई......"हाय राम......इधर मत देख"

और उन्होंने दरवाजा फिर से बंद करने की कोशिश की........मैंने जैसे तैसे थोड़ी हिम्मत और जुटाई और सोचा की चलो कुछ मिनट और शो देख लेंगे.

नल चलने की आवाज़ आने लगी......मैंने सोचा शायद चाची अपने हाथ धो रही होगी.

एक हाथ से अपने बेकाबू घोड़े को पुचकारते पुचकारते मैंने धीरे से बाथरूम की तरफ फिर कदम बढाये तभी भड़ाक से बाथरूम का दरवाज़ा खुला और चाची टॉवेल लपेटे और अपने कंधो पर साड़ी डाले बाहर आ गयी.

मैं वहीँ पर उनके सामने खड़ा था........मेरा पजामा घुटने तक गिरा था और मेरा हाथ मेरे बाबुराव पर था जिसको मैं बड़े प्यार से धीरे धीरे हिला रहा था.

चाची ने सीधा मेरे लैंड को देखा और उनकी ऑंखें फटती चली गयी.....उनका मुंह खुला का खुला ही रह गया......

मुझे तो हार्ट अटैक ही आ गया.......इतनी जोर से चमका की क्या बोलू.......

मेरी गांड की फटफटी........................................................फुल स्पीड में चालू. ........

चाची जोर से चिल्लाई...."हाय राम.....बेशरम क्या कर रहा है ? "

मेरी तो डर के मारे आवाज़ ही बंद हो गयी.......मैंने पहले तो अपने बाबुराव को हाथ से ढकने की कोशिश की मगर
उस साले को तो चिकनी चूत की खुशबु आ गयी.....जैसे कुत्ते को हड्डी की खुशबु मिल जाये तो वो अपने मालिक की नहीं सुनता और खोदता चला जाता है वैसे ही बाबुराव ने मेरे हाथों में छुपने से मानो इनकार ही कर दिया और जोर जोर से ठुनकी मारने लगा जैसे चाची की चूत को आवाज़ लगा रहा हो.......

उधर चाची की तो नज़रे ही नहीं हट रही थी बाबुराव के ऊपर से. वो ऑंखें खड़े बाबुराव को नजरो से सहला रही थी.
मेरे हिलाने और चाची को इस हालत में देख कर बाबुराव ने एक चमकती हुयी चिकनी बूँद बाहर निकाल दी थी.
ऐसी लग रहा था मानो ख़ुशी के मारे बाबुराव के आंसु निकल आये हो . वो बार बार ठुनकी मार रहा था मानो चाची से बोल रहा हो, " क्या बोलती तू ? "

चाची के चिल्लाने से मेरी गांड तो फट ही गयी थी उसके ऊपर से मेरे लंड ने भी अपनी औकात दिखा दी. मैं समझ गया की यह तो आज कहना नहीं मानेगा. मेरा पजामा मेरे पैरों में आकर इकठा हो गया था तो उसे भी ऊपर चडाने का कोई सवाल नहीं था. कुछ समझ नहीं आया तो मैं घूम गया और चाची की तरफ पीठ कर ली.

चाची गुस्से से बोली, "अरे बेशरम.......क्या कर रहा है ? "

मैं तो कुछ बोल नहीं पा रहा था. मगर मेरा हाथ अभी भी धीरे धीरे लंड को मसल रहा था.

चाची थोड़ी जोर से बोली, "हट जा मेरे रस्ते से....बेशरम"

मैं तो बिना रुके हिला रहा था. जैसे ढलान पर एक बार दौड़ना शुरू करो तो रुकना मुश्किल हो जाता है वैसे ही मुझे लंड हिलाने में वो आनंद आ रहा था की अब रुकना मुश्किल था.

मैंने बड़ी मुश्किल से बोला, " च च च चाची मुझे म म म माफ़ कर दो, प्लीज़ आप इधर मत आओ. मुझे बहुत शर्म आ रही है"

चाची गुस्से से बोली, "हाय राम....शर्म आ रही है ?....ऐसी हरकते करने में लाज नहीं आई और अब बड़ा लजा रहा है, हट जा....जाने दे मुझे"

मैंने कहा,"च च चाची......प्लीज़......इधर मत आओ......म म म म मेरा निकलने वाला है.....कहीं अ अ आप पर न गिर जाए...."

चाची जहाँ थी वहीँ पर रुक गयी, शायद उन्हें याद आ गया था की मेरा अमृत कैसे रोकेट जैसा उड़ता है.....पिछली बार भी उनके पैरों के पास जा गिरा था.

वो ठंडी सांस लेकर बोली, "हे भगवन......इतना बेशरम है रे.......जल्दी ख़त्म कर ....."

यह सुनते ही मैंने जोर जोर से हिलाना शुरू कर दिया.......

ख़ुशी की वो आंसु जो लंड ने निकाले थे वो अब सैलाब बन गए थे......बहुत सारा रस निकल कर मेरे लंड के चारो और फ़ैल गया था.......जिस से फच फच की आवाज़ आ रही थी.

मैं राजधानी ट्रेन की स्पीड से हिलाए जा रहा था......आनंद के मारे मेरी ऑंखें बंद हुयी जा रही थी मगर आज बाबुराव ठान कर आया था की मैदान-ऐ-जंग में आसानी से हार नहीं मानेगा. सारे राउंड खेलेगा.

थोड़ी देर में चाची बोली," अरे जल्दी कर ना......मुझे जाना है........मैं ऐसे ही टोवेल लपेट के खड़ी हूँ"

कहते है की लंड खड़ा होने के बाद आदमी का दिमाग काम करना बंद कर देता है. चाची टोवेल लपेट कर खड़ी है ये सुनकर मुझसे रहा नहीं गया. अभी तक मैं चाची की तरफ पीठ करके ही खड़ा था. चाची भी सिर्फ मेरा हिलता हुआ हाथ ही देख पा रही थी मगर वो सिर्फ टोवेल में है ये सुनकर मैं पलट गया.

कश्मीर मेरे सामने था.

चाची ने जल्दी जल्दी में टोवेल लपेट तो लिया था....मगर वो टोवेल उनके हुस्न को छुपाने की जगह चीख चीख कर बता रहा था. उन्होंने टोवेल को अपने मम्मो के ऊपर ऐसा बांधा था की वो छुपने की जगह उबल उबल कर बाहर आ रहे थे. सिर्फ निप्पल छुपे थे वर्ना पूरा भूगोल दिखाई दे रहा था. टोवेल उन्ही जांघों के आधे हिस्से को ही ढक पा रहा था.

चाची की जांघ पर बना "बलमा" का टेटू साफ़ दिखा रहा था. वैसे तो उन्होंने अपने कंधे पर सदी डाली हुयी थी मगर क्या फायदा......वैसे ही सब छन छन कर दिख रहा था.

इधर मैं तो चाही का मुआयना कर रहा था मगर चाची की नज़रे मेरे लपलपाते लंड पर थी. उनका मुंह आश्चर्य से खुला हुआ था.....आज वो पहली बार अपने लल्ला के लुल्ले का दीदार कर रही थी. उन्होंने अपने होंठ.....जो सुख गए थे..उनपर जुबान फेरी और मैंने जोर से आह भरी....

चाची बोली, "हाय राम....निकल रहा है क्या.,....? "

मैंने ना में सर हिलाया और जोर जोर से हिलाता ही रहा......चाची कुछ देर तक मुंह खोले मेरे लंड को देखती रही फिर अचानक उन्होंने नज़रे उठाई और मुझे उनके मम्मो को घूरता पा कर शर्मा कर नज़रे इधर उधर कर ली.

चाची ने कहा, " लल्ला....प्लीज़....जल्दी कर ले.......प्लीज़"

चाची विनती कर रही थी.....या तो घबराई हुयी थी या फिर उनका संयम टूट रहा था. मैं जोर जोर से हिलाता ही जा रहा था मगर बाबुराव भी पक्का पहलवान था......नहीं माना.

चाची ने फिर इधर उधर देखा और कनखियों से लंड को टापने लगी.

वो धीरे से बोली, "हाय राम....इतनी देर में तो सब का निकल जाता है......निकलता क्यों नहीं"

मेरे हाथ हिलाते हिलाते दुखने लगे थे.....मगर बाबुराव अब भी फुफकारी मार रहा था. आखिर मैंने हाथ हटा लिया.

चाची बोली, "अरे क्या हुआ......?"

मैंने कहा, "च च च च चाची म म म मेरे हाथ दुखने लगे है"

चाची ने बोला, "अरे .....जल्दी निकाल ले मुझे जाने दे......."

मैंने हिम्मत करके कहा, "च च च चाची......आप हिला द द द दो ना.....प्लीज़....."

चाची की ऑंखें बाहर ही आ गयी.....

चाची की ऑंखें बाहर ही आ गयी.....

चाची का मुंह बिलकुल लाल सुर्ख हो गया और उनकी साँसें तेज़ चलने लगी.....मेरी गांड फटी की शायद मैंने अब अति कर ही दी.

चाची बोली, "नासपीटे.....बेशरम......शर्म नहीं आती ऐसी बात बोलते हुए"

मगर उनकी ऑंखें मेरे बाबुराव पर ही थी. और वो चाची के सामने फुल की कुप्पा हुआ जा रहा था. मैं हिलाते हुए जैसे ही हाथ पीछे ले जाता......बाबुराव के सुपाड़े से स्किन उतर जाती और बिलकुल बिलकुल लाल लाल सुपाडा, मदन रस में भीगा हुआ चमकने लगता. सुपाडा भी लाल लाल...चाची का मुंह भी लाल लाल........

लग रहा था मानो आज मेरे लंड को भी गुस्सा आ गया है. चाची की नज़रे अब तो लंड पर से हट ही नहीं पा रही थी.

मैंने फिर से चाची को पुचकारा, "चाची प प प्लीज़.....अब मुझे दुखने लगा है........."

दुखता वुखता तो क्या, मुझे तो मजा आ रहा था. आज इतनी हिम्मत कर लेने के बाद मैं मौका छोड़ना नहीं चाहता था.

चाची धीरे से बोली, "हाय राम.....दुःख रहा है क्या ? लल्ला तुझे कोई बीमारी है क्या ? इतनी देर से नहीं निकला ?"

मैंने सिसकारी मरते हुए कहा, "न न नहीं चाची......मुझे हमेशा इतनी ही द द द देर लगती है......."

चाची ने फिर धीरे से कहा, "मगर तेरे चाचा तो 1 - 2 मिनट में ही................निपट जाते है "

मेरे मुंह से निकल गया, "मुझे प प प पता है......."

साला कहते है की इंसान को बनाने या बर्बाद करने में सबसे बड़ा हाथ उसकी जुबां का होता है. मेरे मुंह से हमेशा गलत समय पर गलत बात निकलती है.

चाची ने अपनों होटों को चबा कर कहा, "हाय राम........तू पागल तो नहीं हो गया छोरे.....म म म म मैं कैसे हिला दूँ ......?"

मैंने हिलाते हिलाते ही चाची की आँखों में देखा मगर वो तो बाबुराव के दीदार में लगी थी.

मैंने कहा, "चाची.....प्लीज़.....म म म मैं किसी से नहीं कहूँगा ........"

चाची ने मेरी बात सुनकर झटके से सर उठाया और ऑंखें सिकोड़ कर मुझे घूरने लगी.

हिलाने में इतना मज़ा आ रहा था की ऑंखें खुल ही नहीं पा रही थी. मैं कनखियों से उनको देख रहा था , वो अब सोच में पड़ गयी थी की क्या करे..........

घी सीधी उंगली से नहीं निकलता. थोडा सा हुल देना जरुरी था. मैंने ताबूत में आखिरी कील ठोक ही दी.

मैंने कहा, "च च च चाची मै किसी को नहीं बताऊंगा की आपने मेरे बाथरूम मे बाल साफ़ किये और आपकी ज ज ज ज जांघ पर क्या लिखा है"

चाची ने मुंह पर हाथ रख लिया, "हाय राम.......नासपीटे........तू ताक झांक कर रहा था हरामी"

चाची को गुस्सा तो आया था, मगर उनकी ऑंखें मेरे लंड पर ही लगी थी. मैंने हिलाना बंद किया और हाथ पूरा पीछे तक ले गया. मेरे लंड का सुपाडा रोशनी मे चमकने लगा. इतना लाल हो गया था मानो गुस्से से फट पड़ेगा.

चाची ने फिर से अपने होटों पर जुबान फेरी. और मैं उनकी तरफ धीरे से बड़ा. चलने से मेरा लंड दाये बाए हो रहा था. मैं सीधा चाची के सामने खड़ा हो गया.

अब हिम्मत की ज़रूरत थी और अपुन दुनिया के सबसे बड़े गांडफट. मुझे कुछ समझ नहीं आया की क्या करू.......

मैंने धीरे से चाची का हाथ पकड़ा. उन्होंने झटके से छुड़ा लिया....

मैंने फिर उनका हाथ पकड़ा......उन्होंने फिर छुड़ा लिया............

मैंने उनका हाथ फिर से पकड़ कर सीधा लंड पर रख दिया...और जोर से सिसकारी मार दी. मेरी सिसकारी सुनते ही चाची का हाथ मेरे लंड पर कस गया.

मैंने मन ही मन सोचा......."शील बेटा तू तो गया काम से.....हसते हसते लग गए रस्ते".

चाची के लंड पकड़ने से ही मुझे इतना मज़ा आया की मेरी ऑंखें बंद हो गयी. मैंने एक और सिसकारी मारी, "स स सस चाची प्लीज़ हिलाओ न........"

चाची के हाथ ने हरकत शुरू कर दी.....धीरे धीरे उनका हाथ मेरे लंड को सहलाने लगा.....जैसे कोई सपेरन जहरीले काले नाग को वश मे करने के लिए सहलाती है.
चाची के सहलाने से ही इतना मज़ा आया की मुझे लगा की बॉस अब तो निकला......मगर मैंने बड़ी मुश्किल से अपने जज्बातों का समुन्द्र अपने सीने मे ....मेरा मतलब है की अपने गोटो मे रोक लिया. मैं धीरे धीरे सिसकार रहा था........

मैंने धीरे से आंख खोली...देखा चाची मुझे ही देख रही है.......उनका चेहरा एकदम तना हुआ था......नाक के कोने फुले हुए थे.....ऐसा लग रहा था जैसे गुस्से मे हो.
जैसे ही हमारी नज़ारे मिली.....चाची ने लंड को उमेठना शुरू कर दिया......वो ऐसे कर रही थी मानो गाय का दूध निकाल रही हो.

हम दोनों की नज़रे आपस मे मिली हुयी थी. चाची मेरे लंड को हिलाए जा रही थी और मैं एकटक उनकी आँखों मे देखकर सिसकारी मारे जा रहा था.

मैंने धीरे से चाची की कमर पर हाथ रख दिया. चाची ने बिना मुझ पर से नज़ारे हटाये मेरा हाथ हटा दिया. अब तक उन्होंने दुसरे हाथ से अपने टोवेल संभाल रखा था. टॉवेल थोडा सा निचे सरक गया.....उनके मम्मे थोड़े और बाहर निकल आये......

मैंने फिर से हाथ उनकी कमर पर रखा.......अब की बार उन्होंने नहीं हटाया.....मेरा हाथ धीरे से उनके नितम्बो की तरफ गया.......मैंने टॉवेल के ऊपर से ही उनके नितम्बो को सहलाना शुरू कर दिया......वो अब भी मेरी आँखों मे ही देखे जा रही थी. उनका मुंह हल्का सा खुल गया था......

मैंने अपने हाथ थोडा निचे ले जाकर पीछे ने उनके टॉवेल के अन्दर घुसाने की कोशिश की. उन्होंने तुरंत मेरा हाथ फिर झटक दिया. उनका टॉवेल उनके सीने से और निचे ढलक आया....अब तो ऐसा लग रहा था मानो चाची के निप्पल ही उनकी इज्ज़त का पर्दा, वो टॉवेल संभाले हुए है.

मैंने फिर से चाची के जांघो पर हाथ रख कर ऊपर ले गया. अबकी बार उन्होंने हाथ नहीं झटका.....शायद वो समझ गयी थी की अगर उन्होंने अपने टॉवेल छोड़ा तो पर्दा उठ जायेगा. मैं हाथ धीरे धीरे सरकते हुय्र उनके तरबूज जैसे नितम्बो पर ले गया......अब तक हमारी नज़रे मिली हुयी थी हम दोनों एक दुसरे की आँखों मे देख रहे थे.
चाची अपने हाथ से मेरा लंड हिलाए जा रही थी. जैसे ही मैंने उनके नितम्बो पर हाथ रख कर दबाया और सहलाया.......

उन्होंने ने ऑंखें बंद कर ली और जिस तरह रानी मुखर्जी अपने होंट दबाये शरमाकर मुस्कुराती है वैसे ही वो भी होंट दबा कर मुस्कुराने लगी.

ओओओओ.हह......क्या सीन था.......उनके चेहरे के expressions ने मुझे पागल कर दिया. मैं उनके नितम्बो को जोर जोर से दबाने लगा.....हाथ मे आना तो दूर मैं उनकी विशाल गदराई गांड का हिसाब ही नहीं लगा पा रहा था.

मेरा हाथ उनकी गांड के सल के ऊपर आया.....और मैं एक उंगली को धीरे धीरे उनके सल को सहलाता हुआ नीचे ले जाने लगा.......उनको एहसास हो गया की मेरे इरादे क्या है.....उन्होंने एक दम अपनी गांड कड़क कर ली......मेरी उंगली उनके विशाल नितम्बो के बीच फंस गयी. मैंने जोर से उंगली नीचे के तरफ दबाई, चाची ने अपना दूसरा हाथ अपने सीने पर संभाले टॉवेल से हटाया और मेरा हाथ को कलाई से पकड़ लिया. मगर दुसरे हाथ से मेरा लंड हिलाना जारी रखा.

हाथ हटते ही निप्पलो ने बगावत कर दी. अब तक तो टॉवेल चाची के निप्पलो और हाथ के दम पर टिका था वो सेंसेक्स (sensex) की तरह एक झटके मे नीचे आ गया.

मुझ से एक सांस की दुरी पर चाची के मम्मे बड़ी शान से पर्वतों के जैसे सर उठा कर खड़े थे. मैं अपने हाथ चाची के नितम्बो से हटा कर उनके मम्मो की तरफ ले गया.
जैसे ही मैंने कांपते हाथों को चाची के मम्मो पर रखा ......चाची के मुंह ऐसी सिसकारी निकली की मेरा लंड उनके हाथ मे ही ठुनकी मारने लगा.

उन्होंने ने अपने मुंह थोडा सा मोड़ा कर ऊपर किया हुआ था..... उनकी ऑंखें बंद थी मगर मैं मेरी आँखों से उनके हुस्न का जाम भर भर के पी रहा था.....

चाची के निप्पल ऐसे लग रहे थे मानो डेरी मिल्क का पीस हो.....मखमली ....मगर कड़क. मैं अपनी हथेली उनके निप्पल पर रगडने लगा....और उन के मुंह से सिसकारी पर सिसकारी फुट रही थी........मगर इतना सब होने के बाद भी उन्होंने मेरा लंड नहीं छोड़ा था.......हिलाए चली जा रही थी.......

मैंने चाची के दोनों मम्मे अपनों हाथों में थाम लिए...........इतने नरम थे की मेरे पकड़ते ही मेरे हाथों में समा गए.......

मैंने चाची के मम्मो को धीरे धीरे मसलना शुरू किया और चाची के मुंह से आवाज निकली ...... " आ आ अह हह हह हहा आ आ म म म म "
और चाची ने मेरे लंड को हिलाना बंद कर दिया.......अब वो सिर्फ मम्मे दबाने के आनंद ले रही थी........मैं भी बरसो से अपने अरमान दिल में दबाये बैठा था, बड़े मज़े से चाची की चुचे दबा रहा था.......चाची की गरम साँसें मेरे चेहरे से टकरा रही थी. ऐसा लग रहा था की चाची सांस नहीं गरमा गरम भाप छोड़ रही है.

उनकी ऑंखें अभी भी बंद थी और उनका मुंह ऐसा खुला हुआ था मानो पानी से बाहर निकली मछली हो........

मैंने चाची के मम्मे दबाते दबाते ही उनके निप्पल जो बादाम जैसे बड़े और कड़क हो गए थे, उनको अपनी ऊँगली और अंगूठे के बीच ले कर धीरे से मसल दिया, चाची ने अपनी ऑंखें खोली और मुझसे नज़र मिला कर ऐसी सिसकारी मारी की मेरे पुरे शरीर में सनसनी मच गयी. उनकी नज़ारे तो मुझसे मिली हुयी थी मगर उनकी ऑंखें अब आधी ही खुली थी, वो पूरी तरह से मस्ता गयी थी. मैंने फिर चाची के दोनों निप्पलो को अपनी ऊँगली और अंगूठे के बिच लेकर मसला. उनका पूरा शरीर कांप गया.

तभी उन्होंने मेरे लंड के छेद को धीरे से अपने नाख़ून से रगड़ दिया. अब झटका खाने की बारी मेरी थी. मेरा मुंह खुल गया. चाची मेरी आँखों में ही देख रही थी.
उनके चेहरे पर वो ही टेडी मुस्कान नाचने लगी थी........वो समझ गयी की लोंडे को क्या पसंद है.

मैंने फिर से उनके निपल को रगडा उन्होंने फिर से नाख़ून से मेरे सुपाड़े के छेद को रगड़कर अपना नाख़ून लंड के छेद से धीरे धीरे रगड़ती हुयी मेरे गोटे तक ले आई. मेरा पूरा बदन मस्ती की लहर में कांपने लगा. अब वो मेरे गोटो को अपने नाखुनो से धीरे धीरे रगड़ने लगी.....

कोई देखता तो शायद उसका बिना हिलाए ही निकल जाता......मैं और चाची, रूम के ठीक बिच में खड़े.........चाची के खुबसूरत गदराये बदन पर एक कपडा नहीं.......उनके तरबूज जैसे उभरे हुए नितम्ब.......उनकी चिकनी चिकनी टांगे........मस्त मोटी मोटी जांघे......नितम्ब और कमर के बीच का कटाव........उनका जोबन जो मेरे हाथों में मसला जा रहा था.......और उनका हाथ तो मेरे गोटो को ऐसे रगड़ रहा था जैसे कद्दूकस पर नारियल घिस रही हो. और हम दोनों की एक दुसरे से मिली हुयी नज़र.......मुझे लंड हिलवाने से ज्यादा मज़ा चाची के आँखों में देखकर आ रहा था.........चाची की आँखों में कोई शर्म नहीं थी.......उनकी आँखों में तो बस एक भूख थी ....एक प्यास थी.......और...........वासना थी.

मैं अपना एक हाथ चाची के मम्मे से नीचे लाने लगा.....उनके चिकने बदन पर मेरा हाथ ऐसा फिसल रहा था जैसे कांच पर पानी की बुँदे. मैंने उनकी गोल नाभि को धीरे से छेड़ दिया......एक उंगली से में उनके कमर और पेट पर कलम की तरह फिराने लगा.....मानो मैं एक पेंटर हूँ और उनका पेट मेरा केनवास .........जो पेंटिंग बन रही थी वो दुनिया की सबसे मादक तस्वीर थी.

अब मेरी उंगलिया...धीरे धीरे और नीचे जाने लगी..

चाची को एहसास हो गया था की मेरी उंगलियों की मंजिल कहाँ है.........

उन्होंने मेरे हाथ को पकड़ लिया और धीरे से गर्दन हिला के मना करने लगी.......मैंने भी अपने हाथ को रोक लिया और चाची की आँखों में देखते हुए धीरे से गर्दन हिला दी. अब तो कोई मेरे सर पर बन्दुक रख देता तो भी मैं रुकने वाला नहीं था.

चाची के मखमली पेट से फिसलता हुआ मेरा हाथ वहां जा रहा था, जहाँ के सिर्फ सपने ही मैंने देखे थे. हाँ टंकी में से और चाची को धोते हुए देख लिया था...मगर अब वक़्त था चाची की चिकनी चमेली की चिकनाहट देखने का.......

चाची थोडा सा घबरा गयी और पीछे हटने लगी, मैंने अपने दूसरा हाथ उनके मम्मे पर से हटाया और चाची की कमर में डाल कर चाची को अपनी तरफ खिंच लिया. अपनी चाची फस गयी थी. उनके दोनों मम्मे मेरे सीने में गड़ रहे थे और मेरा हाथ एक कीड़े की तरह कुल्बुलालाता हुआ उनकी मुनिया की तरफ बढ रहा था.

मैं चाची से थोडा सा लम्बा हूँ......चाची को जब मैंने अपने से चिपका लिया तो उनका उनका सर मेरे होटों के सामने आ गया.......मैंने उनका माथा चूम लिया......
मगर मेरी उंगलियों का तो अपने खुद का दिमाग था. चाची ने भले ही मेरे हाथ को पकड़ रखा था मगर मेरा हाथ उनके पेट के निचले हिस्से पर पहुँच चूका था.

मेरी उंगलिया उनकी गरमा गरम चूत तक पहुँचने ही वाली थी........मैंने अपनी उंगलियों को और नीचे किया और उनको जन्नत मिल गयी.

कभी आपने अपनी ऊँगली से चाट कर हलवा खाया हो तो ही आप समझ सकते है की मेरी उंगलियों की क्या महसूस हुआ. चाची की चूत का सल जहाँ से शुरू होता है वो ही ऐसा लबालब चिकना था की मेरी उंगली ही फिसल गयी.......मेरी उंगली लगते ही चाची ने वो सिसकारी भरी की मेरे लंड ने उनके पेट पर जोर से ठुनकी मार दी.
लंड ऐसे झटके मार रहा था जैसे स्टेट ट्रांसपोर्ट की बस का गेअर हो.

चाची ने मेरे लंड को फिर से पकड़ लिया. मेरी उंगलिया चाची की चूत का पूरा मुआयना कर रही थी, चाची की झांट पूरी तरह से साफ़ हो गयी थी, एक भी बाल नहीं बचा था. रस में डूबी चूत केटरीना के गालो से ज्यादा चिकनी हो गयी थी. आज मुझे पता लगा की चिकनी चमेली का मतलब क्या होता है.

इधर मैं अपनी उंगली उनके चूत के सल पर फिरा रहा था.......उनकी चूत का सल इतना मोटा और कसा हुआ था की मेरी उंगली उसके ऊपर ही घूम रही थी......मगर चाची की चूत ऐसे चासनी छोड़ रही थी मानो जलेबी हो. मैंने ऊँगली को थोडा सा दबाया और चाची की चूत के पट खोल दिए. जैसे से ही मेरी उंगलियों ने चाची के दाने को मतलब clit को छुआ चाची ने वो मादक सिसकारी मारी की अपने तो लंड का एक एक बाल खड़ा हो गया. मैंने फिर से दाने को रगडा और चाची ने जोश में आकर मेरे लंड को जोर जोर से दबाकर हिलाना शुरू कर दिया. वो इतनी उत्तेजित थी की लगतार सिस्कारिया मार रही थी. चाची थोड़ी से पीछे हुयी और उन्होंने मेरा हाथ छोड़ दिया. वो अपने दुसरे हाथ से मेरे नितम्बो पर नाख़ून चलाने लगी......मेरे नितम्बो पर नाख़ून रगड़ने से मुझे ऐसा आनंद आया की मैंने अपनी उंगली थोड़ी सी और दबा दी. मेरी उंगली सीधी फिसलती हुयी चाची की मुनिया के मुंह पर चली गयी. चाची ने अपनी चूत को मेरे हाथ पर दबा दिया और खड़े खड़े ही अपनी कमर हिलाने लगी.
साली.....मेरी उंगली को चोद रही थी. मैंने थोडा सा उंगली को और दबाया और मेरी उंगली चाची के स्वर्ग में दाखिल हो गयी. चाची की चूत में लबालब पानी था. इतनी चिकनी होने से मेरी उंगली फिसल रही थी और मेरी हथेली उनकी clit को रगड़ रही थी. चाची पुरे जोर शोर से मेरा लंड हिला रही थी. जैसे साप पकड़ने वाले उसकी गर्दन नहीं छोड़ते वैसे चाची ने मेरे लंड को इतना कास के पकड़ा था की छूट न जाए.

उनके हाथ मेरे नितम्बो को सहला रहे थे और थोड़ी थोड़ी देर में वो नाख़ून से रगड़ भी रही थी. उन्होंने अपने चेहरा उठाया और मेरी आँखों में देखा, मैंने अपनी उंगली को उनकी चूत में और अन्दर तक पेला और अचानक ही वो जोर जोर से सिसकारी मारने लगी......इनकी चूत अन्दर से इतनी गरम और चिकनी थी की मुझे लगने लगा की मेरी उंगली जल जाएगी, मैं तेज़ी से अपनी उंगली अन्दर बाहर करने लगा और हथेली उनकी clit पर रगड़ने लगा. उनकी कमर भी तेज़ तेज़ हिलने लगी. चाची की ऑंखें आधी बंद थी मगर उनकी नज़र मुझ पर ही थी. अचानक उनका मुंह खुला....."आ आ आ आ ह हह ....उ उ उ उह ......." और चाची के पैर कांपने लगे....
उनकी चूत मेरे उंगली को ऐसे दबाने लगी जैसे वो मेरी उंगली को चूस रही हो. चाची का पानी सैलाब की तरह निकलने लगा........और मेरे हाथ से होता हुआ उनकी जांघ भिगोने लगा. चाची एक दम से ढीली पड़ गयी.

मगर उन्होंने मेरे लंड को नहीं छोड़ा था. उन्होंने नशीली आँखों से मुझे देखा और बोली...."बरसो बाद आज तर हुयी हूँ .........लल्ला....." उनकी आवाज़ अभी तक कांप रही थी. उन्होंने फिर से मेरे लंड के छेद पर उंगली घुमाई...........मेरे खुद के हाल बुरे थे.......इतना सब एकसाथ होने से मैं भी आखिरी मुकाम पर ही खड़ा था.

चाची ने मेरे लंड को उमेठना शुरू किया और मेरी ऑंखें बंद हो गयी..........

चाची बोली, "इस हरामी की सारी अकड़ निकलती हु..........."

उन्होंने मेरे गोटो को अपने दुसरे हाथ से पकड़ा और धीरे से दबा दिया, मैंने उछल गया. मेरे लंड की लार ऐसे टपक रही थी जैसे किसी भूखे को बरसो बाद रोटी मिली हो.
चाची ने जोर जोर से हिलाना शुरू कर दिया........मैं समझ गया की अब ज्यादा खेल नहीं बचा है.....तभी उन्होंने अपनी उंगली से मेरे गोटो के पीछे नाख़ून से रगडा.

गांड के छेद और गोटों के बिच की वो जगह सबसे कोमल और कामुक होती है. अब सिसकारी मारने की बारी मेरी थी. चाची मेरी आँखों में देखते ही मस्त मुस्कान के साथ मेरी मूठ मार रही थी. उन्होंने फिर से वहीँ पर नाख़ून से रगडा और मेरा लावा मेरे गोटों में उबलने लगा.

चाची बोली, "हाय राम.....कुत्ते की तरह क्या देख रहा है......निकाल दे अब........"

यह कहकर जैसे ही उन्होंने फिर से मेरे लंड के छेद को छेड़ा मेरे गोटों में सनसनी होने लगी मेरी ऑंखें बंद होने लगी ......एक पल में तारे दिख गए......

"फच" की आवाज़ के साथ मेरे लंड ने गोला दाग दिया. मेरा वीर्य उड़ता हुआ सीधा चाची के पेट पर गया तभी एक धार और निकली, चाची के मम्मो के निचले हिस्से पर जा गिरी.......एक धार उनकी जांघो पर गिरी. लंड तो मानो रिवाल्वर बन गया था.......एक के बाद एक 6 गोले छोड़े. चाची हैरत भरी नज़रो से कभी मेरे लंड को तो कभी मेरे चेहरे को देख रही थी. मेरे पुरे शरीर में आनंद की लहरें दौड़ रही थी......मैंने दोनों हाथ से चाची के मम्मे थाम लिया और कस के पकड़ लिए.

चाची ने लंड को दबाकर उसमे से आखिरी बूंद भी निकाल दी. वाह.....ऐसा मज़ा आज तक नहीं आया था.

तभी घडी ने 12 का घंटा बजा दिया. चाची ने चौंक कर घडी देखि और अपने कपडे समेटने लगी. मैंने वहीँ पर पड़ा कागज़ उठाया और अपने लंड को साफ़ किया और टेबल पर रख दिया. चाची मुस्कुराती हुयी अपने नितम्ब हिलाती हुयी चली गयी. मैंने लम्बी सांस ली. मेरा अच्छा समय शुरू हो गया था

सुबह नींद खुली तो पुरे बदन में मीठा मीठा दर्द था.

उठते ही रात की बातें मेरी आँखों के सामने घूम गयी, मैं सोच में पड़ गया की वो सपना था की हकीकत.
तभी मेरी नज़र सामने पड़े कागज़ पर पड़ी और मुझे याद आया की मैंने रात को अपना मुन्ना इसी से साफ़ किया था.

तभी दरवाज़ा खुला और चाची हाथ में झाड़ू लिए रूम में आई, चाची और मेरी नज़रे मिली. चाची ने बहुत ही कमीनी स्माइल दी और मैं समझ गया की रात को हुयी बात सपना नहीं हकीकत थी.

मेरा बाबुराव जो सुबह होने से आधा तैयार था ही , ये सोचते ही उसने अपना सर सिपाही की तरह शान से उठा लिया.
चाची मेरे बेड के पास ही झाड़ू निकलने लगी, वो झुकी हुयी थी और उनका विशाल गोल पिछवाडा मेरी नज़रों के सामने था.

कीड़ा कुलबुलाने लगा........


मैंने अपने हाथ बड़ा कर चाची की नितम्बो पर रख दिया,

जिस तरह "हम आपके हैं कौन" में जैसे माधुरी सलमान की गुलेल की मार खा कर पीछे देखती है वैसे ही चाची ने पलट कर मुझे देखा. हैरत से उनकी ऑंखें बड़ी बड़ी हो गयी थी.

मैंने चाची को एक कमीनी मुस्कान मारी. चाची का चेहरा एक दम लाल हो गया और उन्होंने जोर से मेरा हाथ झटका और रूम के बाहर चली गयी.

गांड की फटफटी चल निकली.

मैंने सोचा बॉस.....कल रात की बात से चाची नाराज़ है ?? , अब जा कर अगर घरवालो को बता दिया तो अपनी इस दुनिया से विदाई पक्की.
बाप गोटों में रस्सी बांध कर छत से लटका देगा. मैंने तुरंत टी शर्ट डाला और बाहर गया. पापा और चाचा दोनों डाइनिंग टेबल पर बैठे नाश्ता कर रहे थे.

मैं भी जाकर बैठ गया. दोनों ने नाश्ता निपटाया और दुकान जाने लगे.....मेरा चाचा रहता तो गाँव में था मगर बेचारे को टु व्हीलर भी चलाना नहीं आता था. इसीलिए पापा से साथ स्कूटर पर बैठ कर जाता था. चाचा बाहर से अंदर आया और चाची को आवाज़ लगाई, "अरे नीलू......वो.......दवाई........लानी है ना ?"

मैं एक पल में समझ गया कोनसी दवाई. "खुजली वाली"......चाची ने अन्दर से बोला, "नहीं.....अब मेरे सर में दर्द नहीं है......मत लाना"

चाचा को कुछ समझ नहीं आया.....फिर वो समझ गया की चाची सब के सामने कोड वर्ड में बोल रही है..........उसने बैल जैसे सर हिलाया और चला गया. चाची ने मुझे चाय लाके दी ....तभी मोंम ने किचन से पूछा...... "अरे नीलू.....तेरा सर दुख रहा है ????? दवाई क्यों मंगा रही है .......क्रोसीन पड़ी है खा ले........"

चाची ने बोला, "अरे नहीं भाभी ....अब ठीक है......."

चाची की दवाई तो मेरे पजामे में छुपी थी. मेरी और चाची की नज़रे मिली और चाची मुस्कुरा दी......धीरे से बोली ...
"अब दवाई की ज़रूरत नहीं है......."

मुझे समझ नहीं आ रहा था की साली अभी तो अन्दर गुस्सा दिखा रही थी और अभी फिर से उंगली शुरू कर दी. फिर उसने बड़ी अदा से अपना पल्लू ठीक किया...... साड़ी सही करने के बहाने से मुझे अपनी चिकनी कमर दिखाई और नितम्ब मटकाती हुयी किचन में चली गयी.

साला.......ये चल क्या रहा है ??????

कॉलेज में मन ही नहीं लग रहा था.......इच्छा हो रही थी की दौड़ के घर पर जाओ और चाची की पकड़ के........पकड़ के.........ठोक दू बस......मगर चाची गुस्सा क्यों हुयी ?

खैर... ....क्लास में तो मन लगा नहीं......बाहर निकला और नवजोत मिल गया.......आज का साला दिन ही ख़राब था.

"न न न नमस्ते माट साब..........क क क कैसे है आप......", मेरी नक़ल निकालते हुए नवजोत ने कहा.

" ठ ठीक हूँ", मैंने अपने हक्लेपन को कंट्रोल किया.

"आज आप पढ़ाने नहीं आयेंगे ?", नवजोत ने फिर मसखरी की.

अब मैंने सोच लिया की इस भेन्चोद को औकात दिखानी ही पड़ेगी. मैंने बूंद बूंद करके हिम्मत बटोरी और कहा, "देखो......पिया.....मेरा मतलब है की आपकी सिस्टर अकाउंट में बहुत ही कमज़ोर है........मुझे फीस से कोई मतलब नहीं है...मैं उसकी मदद सर के कहने पर कर रहा था.....अगर आपको प्रोब्लम है तो ठीक है..... आप देख लो...."

मैंने मेरे जीवन में नवजोत से इतनी बात नहीं की थी.....उसका मुंह खुला का खुला ही रह गया......मगर मेरी बात उसके मोटे भेजे में आ गयी थी. उसने बड़ी मुश्किल से अपने मुंह बंद किया और धीरे से बोला.... "आय एम् सोरी......देखना यार......वो फेल नहीं हो जाए.....पापा बहुत गुस्सा होंगे...."

ये बोल कर वो खिसक लिया......और मेरी तो खुद की फटी पड़ी थी.....मुझे तो लगा था की आज यह सूअर मुझ पर ही हमला ना कर दे.

तभी मेरा मोबाइल बजा......पिया का फोन था......"कहाँ हो तुम.....?"

मैंने कहा, "पार्किंग में.....", वो बोली, "चलो मैं वही आ रही हूँ......" और फोन काट दिया.

मैं अपने मोबाइल में SMS पढ़ रहा था. नज़रे उठाई तो सामने से पिया आती दिखी, मेरी साँसे सीने में ही रुक गयी. उसने ब्लू कलर की लो वेस्ट जींस पहनी थी, उसके ऊपर एक ब्लेक टॉप था जो उसने जींस में इन किया हुआ था, जींस ठीक उसकी कमर के घुमाव पर टिकी थी और उसका टॉप बड़े गले का था जिससे उसका एक कन्धा पूरा पूरा बाहर आ रहा था. चिकना चिकना कन्धा धुप में ऐसे चमक रहा था मानों संगमरमर हो.......उसने ब्लैक गोगल लगा रखा था. उसके गोरे बदन पर ब्लैक टॉप क़यामत लग रहा था. साली बहुत ही कटीली दिख रही थी.

वो सीधी मेरे पास आई और बोली, "क्या यार तुमको क्लास में भी आवाज़ लगाई, सुनते ही नहीं हो ? कहा रहतो हो ? सची सची बताओ GF के बारे में सोच रहे थे न ?"

अब मैं उसको क्या बोलता की मैं GF के बारे में नहीं, चाची की मटकती गांड के बारे में सोच रहा था. मैंने कहा, "न न नहीं यार.....व व वो ...रात को नींद नहीं आई थी इसलिए.......". उसने ऑंखें गोल गोल नचा के कहा, "ओ हो......मिस्टर......क्या बात है ? अब तो बता दो की कोन है वो ?"

साला.......मुझे ये समझ नहीं आ रहा था की चाची को गुस्सा क्यों आया.....और इधर इस बात की दुकान का मुंह बंद नहीं हो रहा था......भेन्चोद पटर पटर बोले ही जा रही थी......ठीक है .....सुंदर है......सेक्सी है.........मगर मेरा दिमाग चाची में इतना उलझा था कि मैं पिया की बात ही नहीं समझ पा रहा था. और वो बोले ही जा रही थी...

"अरे मिस्टर.....नाम तो बता दो...", उसने फिर उंगली की.

मेरा ध्यान था नहीं. मैंने उस को चुप रहने के लिया कहा, "पिया.........".

मैं आगे कुछ बोलता इस के पहले उसने एक दम अपने मुंह पर हाथ रख लिया....और उसका मुंह शर्म से लाल हो गया......

उसने धीरे से कहा, "क्या...ये......सच....है......शील"

अब मुझे समझ में आया की यह क्या हुआ. मेरी गांड की फटफटी का इंजन ही फेल हो गया. मैंने उसको चुप करने के लिया उसका नाम लिया था और वो समझी मैं उस के बारे में सोच रहा था. मैंने बात सँभालने की कोशिश की, "अ अ अ अरे.....न न न नहीं.....व. व.वव.वो.....म म म मैं तो तुम को......"

मेरी बात कट के वो धीरे से बोली, "अब कुछ मत कहो.....मैं तुम्हारी बात समझ गयी......"

इसकी माँ की ........हम हकले बिचारे जितनी देर में एक शब्द कहते है जमाना उतनी देर में महाभारत दो बार पढ़ लेता है.

साली मुझे बोलने ही नहीं दे रही थी. मगर ये तो था की वो बहुत खुश हो गयी थी. उसने मुझे धीरे से कहा, "मुझे चोकलेट खाना है"

मैंने उसको घुरा और पूछा, "म म म मतलब ?? "

उसने बड़ी अदा से मुझे देखा और बोली, "अरे बुद्धू मुझे डेरी मिल्क नहीं खिलाओगे क्या ? आज शुभारम्भ है ना ......"

अब मैं उसको क्या कहता की मेरा शुभारम्भ तो कल रात को ही हो गया.

कॉलेज की कैंटीन से उसको डेरी मिल्क दिलवाई. साली......हाथ पकड़ के चल रही थी और मेरी गांड फटे जा रही थी की कही इसका वो सांड भाई मिल गया तो ये शुभारम्भ सीधा THE - END में बदल जायेगा. खैर गांडफटो की किस्मत जोरदार होती है ये तो आप जानते ही है.......वो तो नहीं मिला मगर इसको इसकी दो तीन फ्रेंड्स मिल गयी.

लड़कियां यूँ तो इतना बोलती हैं मगर वक़्त आने पर इशारो में ही बात कर लेती है, पिया ने सबको नज़र नज़र में ही बता दिया. मेरी गांड फटे ही जा रही थी.

बड़ी इज्ज़त और प्यार से उसने डेरी मिल्क मेरे साथ शेयर की. अपुन तो बिलकुल सुन्न हो गए थे. हां....हुन्न....में ही टाइम निकल गया. वो बोली, "चलो मुझे घर छोड़ दो"

मैंने हकलाते हुए कहा, "त त तुम्हारी गाड़ी क क को क्या ह ह हुआ "

"अरे वो अभी तक पंचर है"

मैं अपने बाप का स्कूटर लाया था. उसी पर हम दोनों निकले, बार बार "रब ने बना दी जोड़ी" याद आ रही थी. फर्क ये था की उसने पीछे से मेरे जांघ पर हाथ रखा हुआ था. बाबुराव में दिमाग तो होता नहीं......उसने तुरंत सर उठा कर सलाम दे दी...........एक दो स्पीड ब्रेकर कूदे तो उसके सोफ्ट सोफ्ट मम्मे भी मेरी पीठ पर आ धमके.

भले ही नवजोत की बहन थी....मगर थी तो पटाका......धीरे धीरे मैं भी रिलेक्स हो गया और जान बुझ कर एक दो बार जोर से ब्रेक मार दिया. वो तो जैसे ब्रेक लगने का ही इंतज़ार कर रही थी, मैं ब्रेक लगाता और वो अपना जोबन सीधे मेरी पीठ पर चिपका देती. उसके घर पहुँचते पहुँचते तो बाबुराव बगावत पर उतारू था. बड़ी मुश्किल से पेंट में बने तम्बू को सेट किया. वो उतरी और बोली, "जा रहे हो.....यार.......टाइम का पता ही नहीं चला.....भाई आनेवाला है ......मुझे फ़ोन लगाना.....प्लीज़ ??? बाय "

मैं बड़ी शान से "तुझ में रब दीखता है" गुनगुनाते हुए अपने स्कूटर से घर आ गया. पूरा घर अँधेरे में डूबा था. मुझे समझ नहीं आया की क्या हुआ ?

अपनी चाबी से मैंने दरवाजा खोला, अन्दर गया तो देखा डायनिंग टेबल पर एक मोम बत्ती रखी है और चाची वहीँ पर बैठी थी. मैंने पूछा, "क्या हुआ चाची ?"

चाची से लम्बी सांस ली और बोली, "राम...गाँव में बिजली नहीं रहती समझ आता है, यहाँ तो इतने बड़े शहर में भी डब्बा गोल है. कुछ ट्रांसफार्मर ख़राब हो गया है. अब तो कल सुबह ही बिजली आएगी."

मैंने इधर उधर देखा और पूछा, "सब लोग कहाँ है ? "

चाची बोली, "राम राम लल्ला......इस उम्र में ही तेरी तो याददाश्त ख़तम हो गयी, अरे पड़ोस वाले सक्सेना जी के यहाँ शादी नहीं है क्या ? मरा तेरे चाचा का एक ही तो दोस्त है......विनोद सक्सेना......उसी के भाई की शादी है.......होटल राज विलास में है........ठाठ है ..........बिजली नहीं थी तो भाभी ने मुझे बोल दिया की जमाना ख़राब है, चोरी चकारी का डर है........और तू भी नहीं आया तो तुझे खाना भी खिलाना था......इसीलिए भई मैं तो नहीं गयी.........गए भी इतनी दूर है..........एक डेड़ घंटा तो आने जाने में ही लग जाता है......"

चाची का मुंह भी फुल स्पीड में ही चलता है. १ मिनट का न्यूज़ अपडेट चाची से अच्छा तो स्टार न्यूज़ भी नहीं दे सकता. मुझे हंसी आ गयी.......

चाची बोली, " हें लल्ला.....इस में हंसने की क्या बात हुयी ? "

मैंने मुस्कुराते हुए कहा, "नहीं चाची आज ऐसे ही हंसी आ रही है"

मोमबत्ती की टिमटिमाती हुयी रोशनी में चाची का चेहरा किसी कमसिन लड़की के जैसा मासूम लग रहा था. वो मेरे लिया खाना लेन उठी तो रौशनी से उनकी कमर चमकने लगी और धीरे धीरे मेरे अन्दर का शैतान जागने लगा.....

चाची ने खाना दिया और मेरे सामने अपने हाथो पर अपनी मुंह टिका कर बैठ गयी. मैंने देखा की रोटियों पर आज भी घी बहुत था. मैंने सोचा थोडा छेड़ लू......

मैंने कहा, "चाची क्या सच में घी खाने से सेहत ठीक रहती है.....?

चाची बोली, " लो......तो फिर ? अरे लल्ला....घी तो अमृत है अमृत.......खाओ तो तो शरीर मजबूत......आँखों पर लगाओ तो आंखे साफ़......बालों पर लगाओ तो बाल काले और घने......गाँव में तो घी बहुत काम में आता है......तू तो घी खाया कर....."

मैंने कहा, " क्या होगा इतना घी खाने से......?"

चाची टेडी मुस्कान के साथ बोली, "तेरी लुगाई खुश रहेगी और क्या........मैंने भी तुझे घी खिला खिला के सांड न बनाया तो बोलना.... "

मैंने भी जवाब फेंका, " कोनसा सांड, वो चाचा वाला.......जो दिन भर में 4 -5 गायों को ठोक देता था ? "

चाची ने जोर से मेरे कंधे पर हाथ मारा और बेशर्मो की तरह हंसने लगी.

मैंने सोचा चाची से पूछ लूँ की सुबह किस बात पर नाराज़ हो गयी थी.

मैंने कहा, "चाची......व व व वो......स स सुबह........आप गुस्सा हो गयी थी .......क्या हुआ ....?

चाची ने एक प् मुझे निहारा और फिर धीरे से बोली, "लल्ला......कल जो हो गया वो तो ठीक पर आज सुबह मैं तेरे कमरे में थी ये सब को पता था.....भाभी जी बाहर ही थी......कहीं अन्दर आ जाती तो......तू तो पूरा नादान ही है....मजाक हमेशा अच्छे नहीं लगते...."

साला......इसको कल रात की बात से दिक्कत नहीं......कहीं मेरी माँ हम दोनों को न पकड़ ले......इस डर से सुबह चाची गुस्सा हुयी.........चलो...मैंने भी ठंडी सांस ली.

मैंने सोचा की चाची से पूछ ही लूँ........की आखिर उनकी जांघ पर बने "बलमा" गोदने (tatoo) ..का क्या सीन है.

मैंने कहा, "चाची.....ए ए एक बात पुछु.....?"

चाची ने ऑंखें सिकोड़ कर मुझे देखा और बोली, "हम्म्म......पूछ ...."

"अ अ आप न न नाराज़ तो नहीं हो जाओगी ?

चाची ने मुझे टेडी नज़र से देखा और बोली, "नाराज़ होने की बात हुयी तो हो भी सकती हूँ.......बोल क्या बात है ?"

मेरी गांड फटी........मैंने कहा, "न न नहीं.....व व वो.....ऐसे ही......कुछ नहीं ......"

चाची ने अपनी आखें तरेरी और थोड़ी कड़क आवाज़ में बोली....." बता क्या बात है......? की करू तेरी शिकायत की तू हर रात जो कागज़ गंदे करता है....."

भेन्चोद यह कहाँ फंस गया.........

मैंने हिम्मत बटोरी, "व व व्वो.......आप नाराज़ मत होना.....प्लीज़..."

चाची ने गर्दन हिलाई......मैंने धीरे से कहा, "अ अ अ आपकी ज ज जांघ पर क्या लिखा है......."

अब तीर कमान से निकल गया था. मैं अपने गांड की फटफटी पर ब्रेक लगाये बैठा था......फट तो रही थी मगर मैं कंट्रोल कर रहा था.

चाची की आंखे फ़ैल गयी. बोली, "राम.....कितना बेशरम है रे लल्ला.......बेशरम भी है और हिरसु भी.....ताका झांकी करने से बाज़ नहीं आया न तू........"

गांड की फटफटी फुल स्पीड में निकल ली.........

मैं सकपकाया..... "न न नहीं....चाची.......म म म मैं......नहीं करता .......ताक झांक......व व वो तो .....म म मुझे ......दिखा था......क क कुछ लिखा......था......इ इसलिए पूछ लिया.............प्लीज़.......पापा से मत बोल देना.........प्लीज़...."

चाची ने फिर कातिल मुस्कान मारी....."अरे मैं नाराज़ नहीं हुयी......मगर मुझे लगा की तू कहीं बिगड़ तो नहीं रहा...इस लिए तुझे डांट देती हूँ......बेकार चीजों में दिमाग लगाएगा तो फिर अपनी लुगाई का ध्यान कैसे रखेगा....."

मेरी जान में जान आ गयी......मैंने कहा, "आप सिखाओगी तो सीख लूँगा की किस तरह ध्यान रखते है........"

चाची ने मेरी नाक पकड़ कर कहा, " समय आने पर सब सिखा दूंगी"

फिर वो उठी और बोली, "......चल मोमबत्ती अन्दर मेरे वाले कमरे में ले चल.......मुझे कपडे समेटने है. वहीँ मेरे पास बैठ कर बाते करना...मेरा काम भी हो जायेगा और मन भी बहलता रहेगा......"

बहुत शानी है.......पूरी बात ही गोल कर गयी.......मेरे दिमाग में कीड़ा कुलबुलाये जा रहा था की साला....यह जांघ पर लिखे बलमा का सीन क्या है.......

मैंने मोमबत्ती उठाई और चाची के रूम में चला गया, मोमबत्ती बेड के पास वाली टेबल पर रखी और बेड पर बेठ गया. चाची हाथ में धोये हुए कपडे लिए अन्दर आई और बेड के पास पटक कर निचे ही बैठ गयी. मोमबत्ती की टिमटिम रोशनी से पुरे रूम में अलग ही नज़ारा बन रहा था. अब मुझे समझ मे आया की केंडल लाइट डीनर इतना रोमांटिक क्यों होता है. मोमबत्ती की लो धीरे धीरे हिल रही थी और पुरे रूम में परछाईया बना रही थी. चाची का चेहरा भी मोमबती की टिमटिमाती रोशनी में बहुत ही मादक और सेक्सी लग रहा था.

कीड़ा कुलबुलाने लगा.......

मैंने पूछा, "चाची.......सब लोग कब तक आयेंगे....?"

चाची ने ठंडी सांस ली, "राम जाने लल्ला......भाभी कह रही थी की संगीत और नाच गाना है......अभी आधे घंटे पहले तो गए ही है.......अभी तो पहुंचे ही नहीं होगे.......12 -1 तो बज ही जाएगी......राम....अँधेरे में 4 घंटे क्या करेंगे......मरी इस गर्मी में तो नींद भी नहीं आएगी.....गाँव होता तो साड़ी खोल कर छत पर जाके लेट जाती.....यहाँ तो.... "

मैंने सोचा चाची आप तो बस साड़ी खोल दो.....बाकि मैं संभाल लूँगा.....ये सोच कर मुझे हंसी आ गयी.....

"क्यों रे......आज बहुत हंसी छुट रही है.......क्या हुआ ?", चाची ने मुस्कुराते हुए पूछा.

मेरी चोरी पकड़ी गयी, "न न नहीं......म म..मैं ....वो......कुछ नहीं चाची....."

अचानक चाची की नज़र मेरी शर्ट के पॉकेट पर पड़ी. "यह क्या लल्ला......तेरी जेब में क्या है.....?"

मैंने नज़र झुका कर देखा. पिया ने जाते जाते मुझे "डेरी मिल्क सिल्क" दी थी. मैंने जेब में रख ली थी.....मोमबती की रोशनी में नीले रंग का रेपर चमक रहा था.
मैंने उसे बाहर निकला, पूरी नरम हो गयी थी......मैं समझ गया की यह तो पिघल गयी......

चाची बोली, "वाह रे लल्ला.....बचपना अभी तक गया नहीं तेरा.......टॉफी चोकलेट लिए घूमता है......राम....कोनसी चोकलेट है"

मैंने कहा, "डेरी मिल्क सिल्क". चाची उछली, "अरे वोही जो चाट चाट कर खाते है........टीवी पर दिखाते हैं न........ला मुझे भी चखा न......."

नेकी और पूछ पूछ........चाची चाटने चाहे तो मैं कैसे मना कर सकता हूँ.

चाची ने रेपर खोला......चोकलेट सच में पिघल चुकी थी.......जैसे ही अन्दर का रेपर खोला........चोकलेट का एक कतरा उसमे से निकल कर निचे गिरने लगा......चाची ने झट अपने मुंह खोला और टप से अपने मुंह में ले लिया......थोड़ी चोकलेट उनके होटों पर भी लग गयी.

एक और कतरा गिरा सीधा उनके सीने पर......जहाँ ब्लाउस शुरू होता है बस उसके १ इंच ऊपर.........चाची ने अपने होटों पर लगी चोकलेट जुबान फेर कर साफ़ की.
अब "डेरी मिल्क सिल्क" तो "डेरी मिल्क सिल्क" है. पिघल तो चुकी ही थी .........जो रेले निकलना शुरू हुए.......चाची चाटे जा रही थी मगर चोकलेट भी टपके ही जा रही थी. दो तिन बार उनकी साड़ी पर गिर गयी...........चाची ने लालच छोड़ा और पास में पड़ी प्लेट में चोकलेट रख दी......

देखने लायक सीन हो गया था, चाची अपने दोनों हाथ फैलाये बैठी थी.....दोनों हाथों में चोकलेट लगी थी.....थोड़ी सी चाची के होटों पर और होटों के किनारे लगी थी और एक बेशरम चोकलेट की बूंद उनके उभारो के सल से 1 इंच ऊपर पड़ी इठला रही थी.

जिस तरह औरते मुंह सिकोड़ कर नीचे देखते हुए अपने ब्लाउस के हुक लगाती है वैसे ही चाची ने निचे देखा. मम्मो के थोडा सा ऊपर पड़ी चोकलेट उन्हें मुंह चिड़ा रही थी.
उन्होंने दोनों हाथ ऊपर उठा कर फैला लिए थे ताकि हाथों से चोकलेट कपड़ो और साड़ी पर न गिर जाये.....मगर इस चक्कर में उनका आंचल पूरा ढल गया था.............

मोमबत्ती की टिमटिमाती रोशनी में ब्लाउस में कसे दोनो मम्मे बाहर आने की जिद कर रहे थे. शायद उनको भी चोकलेट खानी थी. मैं तो बिंदास चाची के मम्मे निहार रहा था. चाची ने इधर उधर करके अपने दोनों हाथो को देखा और फिर अपने सीने पर पड़ी चोकलेट की बूंद को देखा.......

चाची के बदन की गर्मी से वो पिघल कर धीरे धीरे चाची के मम्मो के बिच की गली में जाने लगी थी.......

चाची ने कहा, "हाय राम......ये मरी सिल्क.......ऊई.....लल्ला.......अरे ये चोकलेट साफ़ कर दे.......नहीं तो अभी नहाना ही पड़ेगा......"

कुत्तो के दिन बदलते देर नहीं लगती........

मैं थोडा आगे सरका......चोकलेट पिघल के करीब एक इंच नीचे आ गयी थी.......बस चाची के मम्मो के सल पर अटकी थी......मनो इज़ाज़त का इंतज़ार कर रही हो. मैं तो उपरवाले से प्रार्थना कर रहा था की साली चोकलेट घुस जाये चाची के सलों में. फिर मैं आराम से साफ़ कर दूंगा.......

नंगो के नौ ग्रह बलवान..........चोकलेट को मानो उपरवाले का आदेश हुआ. वो बड़े शान से चाची के मम्मो की घाटी में घुस गयी.

चाची जोर से चिल्लाई..."अरे गयी वो ....लल्ला देखता नहीं मेरे हाथों में चोकलेट लगी है...साफ़ कर न...."

मैं जैसे नींद से जगा, अपने सूखे होटों पर जुबान फेरते हुए मैंने कांपता हुआ अपना हाथ बढाया और जिस तरह तिलक लगाते है वैसे उल्टा किया......

पहले अंगूठा जहाँ बूंद गिरी थी वहां रखा और धीरे से निचे ले गया. चाची बोली, "हें लल्ला....साफ़ कर रहा है की फैला रहा है......"
मैंने चाची की बात अनसुनी कर दी और अपना अंगूठा उनके मम्मो के सल के बिच फसा दिया.....फिर मैंने धीरे से अपना पूरा हाथ उनके गले और मम्मो के बिच रख दिया. मैंने कहा, "चाची......ब ब बहुत स स सारी ....चोकलेट गिरी है......." चाची ने बड़े आराम से कहा, "हाँ रे.....तू तो कर दे साफ़.....

अपनी ट्रेन को खुद रेल मंत्री से ग्रीन सिग्नल दे दिया तो फिर कहा रुकने वाले थे.......अपने हाथ से पहले चाची के गले के निचले हिस्से को सहलाया.....जो की औरतों का वीक स्पोट होता है.......शाहरुख़ खान भी तो काजोल की गर्दन पर ही किस करता है.......चाची की आंखे हलकी सी बंद हो गयी.....मोमबत्ती की लो फड़फडा रही थी और मेरी गांड और बाबुराव के बीच जंग हो रही थी. फटती हुयी गांड कह रही थी कि मत कर....मरेगा......और खड़ा हुआ बाबुराव कह रहा था कि चूतिये निशाना मत चुक.

जैस कि दुनिया जानती है कि चूल...यानि.....ठरक......का कोई इलाज नहीं है.......तो अपनी चूल जीत गयी और अपुन ने चाची के गले को सहलाते सहलाते धीरे से उनके मम्मे पर हाथ रख ही दिया.......

चाची ने एक दम से झटका खाया, मेरी तरफ देख कर बोली, "क्या कर रहा है लल्ला....." . मैंने भी चाची कि आँखों में देखते हुए उनके ब्लाउस में हाथ डाला और उनके मम्मे को सहलाते हुए कहा. "चोकलेट साफ़ कर रहा हूँ चाची.......आप भी बच्चो जैसे चोकलेट खाती हो......" मेरे हाथ फेरने से चोकलेट पूरी तरह से चाची के मम्मे पर लग गयी थी. चाची की ऑंखें धीरे धीरे नशीली हो गयी........वो धीरे से बोली, "ब ब बस लल्ला.......हो गयी साफ़......." मगर उनकी आवाज़ में ताक़त नहीं थी......चाची का सोफ्ट सोफ्ट मम्मा मेरे हाथ में था और मैं चोकलेट से उसकी मालिश कर रहा था.......मेरी हथेली बार बार चाची के निप्पल से रगड़ खाती थी और उनके मुंह से आह निकल जाती थी........मुझसे अब बर्दाश्त नहीं हुआ और मैंने चाची की चूची जोर से दबा ली.......चाची की जैसे नींद खुली और वो जोर से बोली, "क्या कर रहा है हरामी.......हाथ बाहर निकाल...."

फटती हुयी गांड ने चिल्ला चिल्ला कर मना किया था की मत कर..........मगर बाबुराव के कहने पर ये सब हुआ......और अब जब चोरी पकड़ा गयी तो बाबुराव चुपचाप सिमट गया और उसने मुंह लटका लिया........

चाची जोर से बोली, " राम....बहुत ही बिगड़ गया है रे छोरे.....कोई शर्म लिहाज है की नहीं ?"

मैंने कहा, "च च च चाची.....आ आ आप ही ने तो क क क कहा था.......स स स साफ करने को........"

चाची ने ऑंखें तरेरी, "साले हरामी......साफ़ करने को कहा था.......तू तो दबाने लगा......पुरे पर चोकलेट लगा दी.....अब नहाना ही पड़ेगा....."

मैं तो कुछ बोलने की हालत में ही नहीं था.......चाची उठी और बाथरूम में गयी......मैं वहीँ उनके बेड पर बैठा रहा......१-२ मिनट बाद पानी की आवाज़ आई और चाची अन्दर से चिल्लाई....."हे राम....कितना अँधेरा है.....कुछ भी नहीं दीखता......मरी ये बिजली भी आज ही जानी थी.......लल्ला.....अरे ओ....लल्ला...."

मैं फिर हकलाया....."ह ह ह हाँ चाची......"

"अरे वो मोमबत्ती तो ला इधर........", चाची अन्दर से बोली.

मैंने कांपते हाथों से मोमबत्ती उठाई और बाथरूम की तरफ बड़ा. बाथरूम का डोर खुला था, और चाची मेरी ओर पीठ करके खड़ी थी. उन्होंने साडी उतार दी थी और सिर्फ ब्लाउस और पेटीकोट में खड़ी थी. मोमबत्ती की टिमटिमाती रोशनी में उनकी पेटीकोट में छुपे नितम्ब बहुत ही मारू लग रहे थे. उनका पेटीकोट उनके कमर के कटाव के सबसे बड़े हिस्से पर टिका था. ऐसा लग रहा था मानो पेटीकोट बस उनकी गांड की गोलों के दम पर ही टिका था वर्ना कब का गिर जाता. चाची अपना ब्लाउस खोल रही थी. मेरी तरफ पीठ होने से मुझे दिख तो कुछ भी नहीं रहा था मगर उनके हाथ चलने से उनकी विशाल गांड थरथरा रही थी. और उसको ऐसे हिलते देख मेरा मुंह खुला का खुला ही रह गया.

चाची बोली, "हाय राम....तू अन्दर क्यों आया ?"
मैं बोला, "च च च चाची.......आ आ आपने ही तो मोमबत्ती मांगी थी........"

चाची बोली, " हें....हाँ रे.....वो वहां पर रख दे.......हाँ.......अरे वो जहाँ शेम्पू रखा है......बस उसके पास.......हाय राम इधर मत देख बेशरम"

मैंने बहुत कोशिश की मगर पापी मन नहीं मान रहा था....... बार बार मेरी नज़र चाची की तरफ ही जा रही थी.

चाची का ब्लाउस आधा खुल चूका था.......जैसे ही वो यह सब बोलने के लिए मुड़ी मेरी नज़र सीधे चुम्बक के जैसे उनके आधे खुले ब्लाउस में से झांकते मम्मो पर जा चिपकी.

किसी ने सत्य ही कहा है की औरत के बदन की असकी कामुकता आधे ढके होने में है.....

पूरी नग्न औरत से तो आधी ढकी औरत ही ज्यादा सेक्सी लगती है......

चाची के ब्लाउस को सिर्फ दो हुक पूरी हिम्मत और ताकत के साथ संभाले हुए थे वर्ना वो तो फटने के लिए बेताब था. हमेशा की तरह चाची ने आज भी ब्रा नहीं पहनी थी, जो नज़ारा उभर के आया था वो किसी मरते आदमी की साँसें चालू कर देता और जिन्दा इंसान की साँसे बंद, मम्मे ब्लाउस में कसे इस कदर कसमसा रहे थे मनो हुको को तोड़ डालेंगे.

मोमबत्ती मेरे हाथ में थी और मेरा मुंह खुला का खुला ही था. चाची अब पूरी पलट के खड़ी हो गयी. उनका तराशा हुआ बदन सिर्फ ब्लाउस और पेटीकोट में मेरे सामने था. ब्लाउस के तो हाल आप जानते ही हो.....पेटीकोट चाची ने काफी नीचे बांधा था...उनकी मद मस्त नाभि मोमबत्ती की रौशनी में कुए जैसी दिख रही थी. चाची ने अपने हाथ अपने मम्मो के ऊपर रख लिए और चिल्लाई...."अरे हरामी......बाहर क्यों नहीं जाता......निकल बाहर....." और पलट के अपने ब्लाउस के बचे खुचे हुक खोलने लगी.

मैं सकपकाते हुए बाहर जाने लगा तो वो फिर चिल्लाई "अरे ये मरी मोमबत्ती तो रखता जा...."

मैंने कांपते हुए हाथों से मोमबत्ती को ग्लास की रेक पर रखा और पलट के जाने लगा. मोमबत्ती ढंग से टिकी नहीं थी.
जैसे ही मैं मुड़ा. मोमबत्ती नीचे गिरी और बुझ गयी.

पूरा बाथरूम घुप्प अँधेरे में हो गया. कुछ भी नहीं दिख रहा था.

चाची जोर से चिल्लाई. " हाय राम......जान नहीं है क्या हाथों में......जा माचिस ला.....कहा गयी मोमबत्ती...."

मैं माचिस लेन की बजाये फर्श पर टटोल टटोल के मोमबत्ती ढूंढ़ने लगा......तभी मेरा हाथ चाची के हाथ से टकराया...चाची भी मोमबत्ती ढूंढ़ रही थी.

कीड़ा कुलबुलाने लगा.....

मैंने थोडा हाथ आगे बढाया और चाची की तरह आगे बड़ा.......अचानक मेरे हाथ से कुछ कड़क सा टकराया.....मुझे समझ नहीं आया की ये क्या है.....मैं बैठा था और मेरे हाथ चाची के सीने की ओर थे.......मुझे लगा शायद चाची का मंगल सूत्र है.....मैंने फिर हाथ बढाया और अब की बार मेरे हाथ से कुछ नरम नरम सा टकराया.......

मैं वहीं पर रुक गया.......मेरी नसे सनसनाने लगी.......जो मेरे हाथ से टकराया था वो चाची का खड़ा हुआ निप्पल था.
चाची ने अपना ब्लाउस पूरा खोल लिया था.

मैंने हिम्मत की और फिर से अपने हाथ बढाया......मेरा हाथ सीधे लेजर बोम्ब की तरह निशाने पर गया और चाची के मम्मे से जा टकराया.....मैंने अपने हाथ वही पर रख दिया और चुतिया बनाने के लिए कहने लगा.....
"अरे च च चाची......आ आ आप हो क्या..."

चाची दबी हुयी जुबान से बोली, "ओर क्या हरामी यहाँ पे माधुरी दीक्षीत थोड़ी बैठी है. हाथ हटा......"
मैंने हाथ नहीं हटाया और चाची के मम्मे को हाथ में ले लिया और धीर धीर दबाते हुए बोला, "न न नहीं च च चाची आप थोड़ी हो......ये तो शायद नहाने का स्पंज है......" मैंने दबाना बंद नहीं किया.......

मेरी गांड फटे जा रही थी मगर खुदा की कसम क्या मज़ा आ रहा था.....चाची का मम्मा मेरे हाथो में तो समां नहीं पा रहा था मगर इतना सोफ्ट था की सचमुच का स्पंज हो.

चाची जोर से बोली, " हरामी छोड़....."
मैंने भी हिम्मत पकड़ी, "क्या छोडू च च चाची......."

चाची ने अब आवाज़ धीरे की और बोली, "मेरा बोबा........छोड़ हरामी.........मेरा मम्मा .....छोड़ कमीने...."

मैंने समझ लिया की चाची को गुस्सा आ गया है........मैंने बहुत मुश्किल से चाची के मम्मो को छोड़ दिया.

चाची ने अब आवाज़ धीरे की और बोली, "मेरा बोबा........छोड़ हरामी.........मेरा मम्मा .....छोड़ कमीने...."

मैंने समझ लिया की चाची को गुस्सा आ गया है........मैंने बहुत मुश्किल से चाची के मम्मो को छोड़ दिया.
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चाची बोली, "लल्ला......बहुत ही बेशरम हो गया है रे........कुछ लाज शरम है की नहीं........"

पूरा घुप्प अँधेरा था. मुझे लगा की चाची मुस्कुरा रही है मगर साला कन्फर्म नहीं था.........अगर सच में गुस्सा हुयी तो.....ये सोच कर मेरी गांड फटने लगी.

मैंने कहा, "च च च चाची म म मैं माचिस ले आता हूँ........"

चाची बोली, "नहीं.....तू यहीं पर रुक......अँधेरे में न जाने क्या गिराएगा क्या तोड़ेगा.......मुझे पता है माचिस कहाँ है.......यहीं रुक जा....."

मैं कुछ बोलता उसके पहले चाची के आगे बड़ने की आवाज़ आई और वो अँधेरे में टटोलते टटोलते बाथरूम से बहार जाने लगी. बहुत ही हलकी सी रोशनी रोशनदान से आ रही थी. मुझे सिर्फ चाची कहाँ है ये दिखाई दे रहा था मगर उनके नंगे मम्मे और चिकनी कमर अँधेरे में छुपे बैठे थे. चाची ने अपने दोनों हाथ आगे बढाकर चलना शुरू किया और उनका हाथ मेरे बेल्ट के बक्कल से जा टकराया. वो बोली, " हें ये मरा नल यहाँ कहाँ से आ गया" और उन्होंने अपने हाथ सीधा मेरे जींस की चेन पर रख दिया. जी हाँ.....सीधा मेरे मासूम बाबुराव पर.......मैंने और बाबुराव दोनों ने झटका खाया........तभी चाची ने जोर से मेरा बाबुराव जींस के ऊपर से ही दबा दिया, मेरे मुंह से आह निकल गयी, चाची बोली, " हाय राम.......ये तू है क्या लल्ला ? मुझे लगा की नल है और उसपे कपडा पड़ा है........परे हट......."

साली चाची मेरे साथ मेरा ही गेम खेल गयी. मुझे तो ये ही समझ नहीं आ रहा था की वो चाहती क्या है ? उनकी बातों से कभी लगता की ठुकवाने को बेकरार है और कभी एकदम सती सावित्री बन जाती.

चाची बाथरूम से बाहर निकल गयी और मैं गंगू गमने जैसा बाथरूम में ही खड़ा रहा.

सच में त्रिया चरित्र किसी के बाप के समझ में नहीं आया होगा. साली....चाची की सारे हाव भाव येही बताते है की उनकी क्या इच्छा है.......मैं उनकी आँखों के वो गुलाबी डोरे और उनकी वो टेडी मुस्कान नहीं भूल पा रहा था जब उन्होंने मेरा लंड हिला हिला कर मेरा पानी निकाल दिया था. मगर वो नाराज़ होती तो मेरी गांड की फटफटी स्टार्ट हो जाती.........

बाहर रूम से बर्तन गिरने की आवाज़ आई. अँधेरे में उस आवाज़ से मानो पूरा घर कांप गया. मैंने पूछा, "चाची......क .क...क्या हुआ......"

कोई जवाब नहीं आया......मैं धीरे धीरे बाथरूम से निकला और चाची के बेड के पास से टटोलता टटोलता आगे गया तभी चाची बोली, "लल्ला......दूध का ग्लास गिर गया" मैंने कहाँ, "चाची आ आ आपको लगी तो नहीं..........".

चाची बोली, " नहीं रे.......मरा मेरा पेटीकोट मेरे पाँव में उलझा और मेरा बेलेंस बिगड़ गया........पूरा पेटीकोट दूध में हो गया.......हाय राम यह मरी बिजली भी......"

तभी कपडा सरकने की आवाज़ आई. मैं समझ गया की चाची ने अपना गीला पेटीकोट भी उतार दिया था.

इसका मतलब चाची सिर्फ पेंटी में थी. सिर्फ पेंटी में.......और मैं उनसे कुछ कदम की दुरी पर था. बाबुराव ऐसा उफान पर आया जैसे सुनामी हो......मुझे लगा की मेरी जींस ही फटेगी आज तो....

ये तो पक्का था की मेरी किस्मत भले ही गधे के लंड से लिखी है मगर वो गधा जरुर बड़े लंड वाला था .

मैंने पूछा, "च च चाची.....मा मा माचिस मिली क्या ?"

चाची की आवाज़ ठीक मेरे सामने से ही आई. "नहीं रे लल्ला.......नहीं मिली......तेरे चाचा भी तो रात में बीडी पीते है.....कहीं रख दी होगी........"

मुझे एहसास हुआ की चाची ठीक मेरे सामने से निकली, बहुत ही हलकी सी रौशनी थी......मैं उनके पीछे पीछे गया.

मुझे बहुत ही हल्का सा दिख रहा था मैं चाची के ठीक पीछे था. अचानक चाची रुक गयी और मैं उनके पिछवाड़े से जा टकराया. मेरा भी बेलेंस बिगड़ा और सँभालने के लिया मैंने चाची को पकड़ा. चाची ने सिवाय पेंटी के कुछ भी नहीं पहना था. मेरा हाथ सीधे उनके कंधे पर पड़ा और मैंने उनका कन्धा पकड़ लिया. इस कशमकश में चाची का भी बेलेंस बिगड़ा और हम दोनों निचे आ गिरे.

पहले मैं गिरा और चाची मेरे ऊपर. चाची मुझे पर इस तरह से गिरी की उनके मम्मे सीधे मेरे हाथो पर फिट हो गए.

चाची जोर से चिल्लाई, "हाय राम.........."

मैं भी जोर से चिल्लाया, "आ आ आ आह...."

चाची मुझ पर से उठने लगी और मैं भी उन्हें उठाने लगा. चाची ने पूछा, "क्या हुआ लल्ला.......गिरा कैसे..."

मैं न तो चाची तो जवाब दे पा रहा था और न ही उनके नमकीन बदन का आनंद ले पा रहा था. मैंने अपने निचे टटोल कर देखा, दूध का ग्लास था.
भेनचोद.......मैं सीधा दूध के ग्लास पर गिरा था. ग्लास तो चकनाचूर हो गया था मगर मेरी गांड पर बहुत जोर से लगी थी. मैं फिर से चिल्लाया,
"चाची पीछे हटो........ग्लास फुट गया है......आपको कांच चुभ जायेगा"

चाची बोली, "हाय राम लल्ला......तुझे लगी तो नहीं.......तू ग्लास पर ही गिरा क्या ? रुक हिलना मत मैं माचिस लायी...."

ऐसे अँधेरे में हिल कर भी क्या करता. मेरी गांड फट रही थी की मैं टूटे कांच पर बैठा हूँ कहीं इधर उधर घुस गया तो............??

अबकी बार चाची को माचिस मिल गयी. चाची ने झट से माचिस जलाई और रूम में हलकी हलकी रौशनी हो गयी. भले ही मेरी गांड जोर से दुःख रही थी मगर जो नज़ारा दिखा उसको देख के तो इंसान बिना बेहोशी की दवा के भी ओपरेशन करा ले.......अभी तक तो मैं गेस कर रहा था की चाची ने ब्लाउस और पेटीकोट खोल लिया है और उन्होंने ब्रा नहीं पहनी है सिर्फ पेंटी में है. मगर रोशनी आने के बाद तो मेरे सिस्टम ही हेंग हो गया.

चाची के मम्मे रोशनी में मुस्कुरा उठे......उनकी कमर पर थोड़ी ही रौशनी और थोडा सा अँधेरा था. अजंता की मूरत लग रही थी. मेरी नज़र निचे और निचे गयी.

चाची ने सिर्फ पेंटी पहनी हुयी थी. मगर वो फूल पत्तो की प्रिंट वाली नहीं बल्कि लेस वाली थी. काफी छोटी और घुमाव वाली. सामान्य कोटन पेंटी तो काफी बड़ी होती है मगर ये ब्लेक कलर की पेंटी तो बड़ी मुश्किल से चाची की मुनिया को छुपाये थी. चाची की मुनिया........यानि चिकनी चमेली.......वो जिसको चाची ने थोड़े समय पहले ही साफ़ किया था.......

सन सनन साय साय फिर से होने लगी. मेरी नज़र उनके बदन को सहलाने लगी. तभी मेरी गांड में शीशे का टुकड़ा चुभ गया और मेरे मुंह से फिर से आह निकल गयी.

चाची के चेहरे कर चिंता के भाव आ गए. वो बोली, "लल्ला.......बिलकुल मत हिलना रे.........कांच है........घुस गए तो मुसीबत हो जाएगी......रुक जा मैं मोम्बाती लाती हूँ."

ये कहकर चाची बाथरूम की ओर गयी और मेरा तो बी पी बढ़ गया. उस कसी पेंटी में चाची के कुल्हे ऐसे मटक रहे थे जैसे जेली हो. पेंटी ने चाची के कुलहो को छुपाया नहीं बल्की और उभार दिया था. मेरे जैसे गोल गांड के रसिया के लिए तो ये नज़ारा फ्रेम करा के रखने वाला था. उनके हर कदम पर उनके नितम्ब भी थाप दे रहे थे.

चाची ने मोमबत्ती जलाई और मेरे पास आई उन्होंने फिर से टॉवेल लपेट लिया था, मगर उस उफनती हुयी जवानी को वो बेचारा कहाँ छुपा पाता. चाची के मम्मे भी उछल उछल कर बाहर आ रहे थे. चाची मेरे पास आकर खड़ी हुयी और मोमबत्ती टेबल पर रख दी. मोमबत्ती की टिमटिमाती रौशनी चाची के बदन से खेलने लगी.

चाची ने कहा, "धीरे से उठना लल्ला.......देख कहीं कांच न चुभ जाए......"

मैं उठने लगा और जैसे ही खड़ा हुआ मेरे कुलहो में जोर से दर्द हुआ, मेरी आह निकल गयी और चाची ने पुछा, "हाय राम क्या हुआ लल्ला......हड्डी तो नहीं खिसक गयी"

चाची ने मुझे पलटाया और उनके मुंह से सिसकारी निकल गयी, "हाय राम लल्ला......तेरे पुठ्ठो पर तो कांच लग गया है......."

मेरी गांड पर कांच......? हे भगवान .......

मैं धीरे धीरे खड़ा हुआ और मेरी गांड का हालचाल देखने लगा, मगर कुछ नहीं दिख रहा था. चाची बोली, "लल्ला.....रुक जा......अरे राम......मुझे देखने दे...."

मैं बेबस लचर होकर चुपचाप खड़ा हो गया और चाची मेरी घायल गांड का मुआयना करने लगी. उन्होंने कुछ कांच के टुकड़े मेरी जींस के ऊपर से हटाये और बोली,

"लल्ला.......खून आ गया है रे.......और कांच के बारीक़ टुकड़े जींस के अन्दर तक घुस गए है. तू एक काम कर .......तू जींस उतार दे........"

मैंने जींस धीरे से उतारी. मेरे पुट्ठो में जलन मची हुयी थी. मैं जींस साइड में रख कर चाची की तरफ गांड करके खड़ा हो गया, चाची बेड पर बैठ गयी और मेरी गांड पर से कांच के टुकड़े हटाने लगी. वो बोली, "राम राम........बच गया रे......कोई बड़ा टुकड़ा नहीं घुसा नहीं तो न बैठने का रहता न लेटने का........" यह कहकर वो धीमे धीमे से हंसने लगी. मुझे गुस्सा आया कि साला यहाँ पर मेरी गांड का भुरता बन गया और चाची को हंसी आ रही है.......इस चाची को तो मैं बताऊंगा.

तभी मुझे कुछ चुभा. मैंने कहा, "च च चाची......अभी भी कांच लगा है क्या ? म म मुझे चुभ रहा है....."

चाची ने मेरी गांड को पास में से घुरा और बोली, "नहीं रे लल्ला......अब तो कुछ नहीं दीखता......मगर हो सके है की कुछ बारीक़ टुकड़े रह गए हो.....तू एक काम कर...
यह अंडरवियर भी उतार......एक तो यह मरी मोमबत्ती में यूँही नहीं दिख रहा....."

मेरी गांड फट रही थी की कहीं कांच वांच रह गया तो ........

मैंने तुरंत अंडरवियर उतारी और अपने प्रिय बाबुराव को अपने हाथों से छुपाकर खड़ा हो गया. अभी भी मेरी गांड चाची की तरफ थी मगर अब पासा बदल गया था.
कहाँ तो मैं चाची को नंगा देखना चाह रहा था और कहाँ मैं खुद नंगा खड़ा था.....किस्मत है.

चाची बोली, "शुक्र है राम जी का........खून तो छिलने से आया है......कांच तो नहीं घुसा और बस थोड़े से टुकड़े चिपके है.......हटाये देती हूँ "

चाची ने हलके हलके हाथों से मेरी गांड पर चिपके कांच के टुकड़े साफ़ किये. किसी भी मर्द के नितम्ब उसके गोटों जैसे ही संवेदनशील होते है. चाची के हलके हाथ और टुकड़े हटाने की हलकी हलकी थाप से मुझे अजीब से गुदगुदी हो रही थी. धीरे धीरे मुझे मज़ा आने लगा और बाबुराव ने भी सर उठा लिया. मैंने उसको अपने हाथों में छुपाये रखा. मगर चाची इतने प्यार से हौले हौले सहला रही थी की कमीना बार बार सर उठा कर देख रहा था.

चाची बोली, "लल्ला......कांच तो अब नहीं है.....मगर ये मरी मोमबत्ती में कुछ दिख नहीं रहा......तू बिस्तर पर लेट जा........एक बार ढंग से देख लूँ....हें......?

मैं चुप चाप बिस्तर पर पेट के बल लेट गया. चाची ने मोम्बाती बेड के कोर्नर पर रखी और मेरे बिलकुल पास पालथी मार कर बैठ गयी. उनके इस तरह से बैठने से उनका बंधा हुआ टोवल थोडा सा खुल गया और उनकी चिकनी जांघें दिखाई देने लगी......उनका पूरा ध्यान मेरी घायल गांड पर था और मेरा पूरा ध्यान उनके जांघ पर लिखे "बलमा" पर था. न जाने क्यों मैं जब भी चाची की जांघ का टेटू देखता मेरा बाबुराव सनक जाता.....पहले से ही कंट्रोल में नहीं था मगर अब तो उसने बगावत ही कर दी. मैं पेट के बल लेटा था इस तरह मैंने बाबुराव को अपने पेट से चिपका कर फंसा लिया था ताकि वो सर न उठा सके. मगर अब वो कुलबुलाने लगा और मेरी हालत ख़राब होने लगी.

इधर चाची मेरी गांड का मुआयना ऐसे कर रही थी जैसे रोड के उद्घाटन से पहले इंजिनियर साहब करते है. वो मेरी गांड पर मस्ती से हाथ फेर रही थी और उनके एक एक स्पर्श से मेरी नसे सनसना रही थी. उन्होंने उनके हाथ से मेरी टांगो को खोलने की कोशिश की. मैंने नहीं खोली क्यूँ की मुझे डर था की कहीं उन्हें मेरी गुस्से में फुफकारता शेषनाग दिख गया तो. चाची बोली, "लल्ला......जरा इधर भी देखने दे बेटा........कहीं इधर उधर कांच चुभ गया तो बाद में दिक्कत ना हो,,,"

भेनचोद....दिक्कत तो अभी हो रही थी.......मेरा बाबुराव अब दुखने लगा था. मैंने बड़ी मुश्किल से अपनी टंगे चौड़ी की.......और बाबुराव को और जोर से दबा लिया.
चाची ने धीरे से मेरे गोटों को सहलाया मानो सच में चेक कर रही हो की कांच तो नहीं चुभा. मेरी सांसें बंद होने लगी........तभी चाची ने नाखुनो से मेरे गोटों को रगड़ दिया. मेरे मुंह से आह निकल गयी. चाची बोली, "हाय राम......दुःख रहा है क्या लल्ला.......

अब मैं चाची को क्या बोलता की चाची ऐसे ही करो मज़ा आ रहा है. इधर साला बाबुराव कहना नहीं मान रहा था और उधर चाची की उंगलिया जाने कहाँ कहाँ जादू चला रही थी. मेरी हालत टाईट हो रही थी. टालने के लिए मैंने कहाँ, "न न नहीं च च चाची.......ल ल ल लगता है की कांच के कुछ टुकड़े आगे की तरफ भी आ गए......मुझे आगे भी दुःख रहा है...."

चाची बोली, "हाय राम.........देखने दे बेटा .....घूम जा......" मैं कुछ बोलता या कर पता इतनी देर में तो चाची ने मुझे धक्का देकर घुमा दिया. बाबुराव जो अब तक लीबिया की जनता जैसा दबा हुआ था एक दम उछल के चाची के हाथों से जा टकराया....

चाची जोर से चिल्लाई, "हाय राम........"

मेरी भी गांड फटी की ये क्या हो गया.........मैंने झट से बाबुराव को छुपा लिया मगर अब तो वो फन उठा चूका था........घंटा छुपने वाला था ???
मेरे बाबुराव का चमकदार सुपाडा मोमबत्ती की टिमटिमाती रौशनी में ठुनक ठुनक कर चाची को सलाम कर रहा था.

चाची बोली, "बेशरम........चोट लगी है मगर.......अभी भी.........लल्ला.........तू तो बहुत ही बदमाश है रे.........हाय राम........" यह कह कर चाची ने अपने मुंह पर हाथ रख लिया मानो मैं अपने लंड उनके मुंह में घुसेड़ने वाला हूँ.

मैंने कहा, "न न न नहीं च च चाची........म म म मैंने नहीं क क क किया अपने आ आ आ आप हो गया......."

चाची की नज़ारे तो लंड पर ही जमी थी जैसे बिल्ली की नज़ारे दूध के बर्तन पर लगी हो. उन्होंने अपने सूखे होटों पर जुबान फेरी और बोली, "हम्म...कहाँ कांच लगा है......दिखा तो ज़रा ?" मैंने अपने हाथ नहीं हटाया तो चाची ने मेरे हाथों को मेरे बाबुराव से हटा दिया.

जैसे स्प्रिंग को दबा कर छोड़ दो......तो उछलती है वैसे ही बाबुराव ने झटका खाया और ठुन्कियाँ मारने लगा. चाची अपनी ऑंखें सिकोड़ कर एकटक बाबुराव को निहारे जा रही थी.....ऐसा लग रहा था मानो अपनी नज़रों से उसको सहला रही हो.......उनका मुंह हल्का सा खुल गया था और उनकी नाक के दोनों कोने फुल गए था.
चाची बोली, " हाय राम लल्ला......तुझे कुछ चैन भी है की नहीं.......जब देखो तब ही तलवार लेकर खड़ा रहता है, अभी तो चोट लगी है फिर भी यह क्या.........."

मैं घबरा भी रहा था और मुझे मज़ा भी आ रहा था, मैं कहा, "च च चाची वो....आप मेरे पीछे......म म मेरा मतलब है की मेरे पुठ्ठो पर से कांच हटा रही थी न इसलिए यह अ अ अ ऐसा ह ह ह हो गया.........मैंने जानबूझ कर नहीं किया...."

चाची मेरे बाबुराव को घूरते हुए ठंडी सांस लेकर बोली, "हाँ रे लल्ला......जानबूझ कर अगर हो जाता तो तेरे चाचा आज बाप बन चुके होते......"

वो एकटक मेरे लिंग को देखे जा रही थी. फिर अचानक जैसे उनका मूड फिर बदला और वो बोली, " चल वो सब छोड़.....मुझे बता की कहा दर्द है.....कहीं इधर उधर कांच घुसा होगा तो फिर तेरी लुगाई को खुश कैसे रखेगा......"

यह कह कर उन्होंने मेरे थरथराते लिंग को किसी कुशल सपेरे की तरह पकड़ लिया. मेरे मुंह से तुरंत सिसकारी निकल गयी.

चाची ने झटके से मेरी तरफ देखा और बोली, "दुखा क्या ?"
अब मैं क्या बोलता की चाची दुखा नहीं मज़ा आया ऐसे ही हिलाती रहो. मैंने हाँ में सर हिला दिया. चाची ने मेरे बाबुराव को जड़ से पकड़ा और उसका गौर से मुआयना करने लगी. कांच वांच तो घंटा नहीं लगा था मगर थोडा नाटक करना जरुरी था. मैं ऑंखें बंद किया धीरे धीरे सिसकारी लेने लगा. चाची बड़े ध्यान से मेरे सामान पर चोट के निशान ढूंढ़ रही थी. उन्होंने मेरे बाबुराव की स्किन को थोडा सा निचे सरकाया और सुपाड़े का निरिक्षण करने लगी. मेरी तो सांसे मरते आदमी जैसी रुक रुक कर चल रही थी. उन्होंने फिर से मेरे बाबुराव की स्किन ऊपर की और धीरे से फिर निचे कर दी.

साली.....चाची मेरी मुठ मार रही थी. मुझे इतना मज़ा आ रहा था की बता नहीं सकता. मेरे मुंह से सिस्कारिया और आह पे आह निकलने लगी. क्या सीन था.....मैं चाची के बिस्तर पर नंगा लेटा हुआ, चाची सिर्फ टॉवेल में अपने जोबन छुपाये. चाची मेरा बाबुराव हिला रही थी और यह सब बल्लू चाचा के बिस्तर पर उनकी बीवी के साथ हो रहा था.

अचानक चाची ने हिलाना बंद कर दिया और बोली, "क्यों रे हरामी........चोट वोट कुछ नहीं लगी है......हिरसू......साले.....बेशरम मैं तो सोच रही थी की लल्ला को कांच चुभा होगा और तू हरामी मज़े ले रहा है......."

मज़े की बात ये थी की यह सब बोलते हुए भी वो ठरकी औरत मेरा बाबुराव हिला रही थी और उसके होटों पर वोही टेडी मुस्कान नाच रही थी. चाची भी पक्की कमीनी थी......उसके कमीनेपन का जवाब कमीनेपन से ही देना था.

मैंने कहा, "नहीं चाची.......च च चोट तो लगी है.......आप ध ध ध्यान से देखो.......आप के नहाने के चक्कर में मेरी तो ग ग ग गांड ही छिल गयी......"
मुझे लगा की चाची के सामने गांड बोल दिया. कहीं नाराज़ न हो जाये मगर वो तो गाँव की ठेठ औरत थी.....मेरा बाबुराव हिलाती हुयी बोली, "गांड तो छिली है लल्ला मगर ये तुम्हारा ........मुन्ना तो ठीक ठाक है......"

मैंने अनजान बनके पूछा, " म म मुन्ना.......मतलब......"
चाची ने वो ही टेडी मुस्कान मरी और मेरी आँखों में देखते हुए कहा, "ये तेरा लौड़ा..........."

दोस्तों......औरत के मुंह से ऐसे शब्दों को सुनने का आनंद ही कुछ और है. और जब वो औरत चाची जैसी बिंदास और ठरकी हो और ऐसे शब्द आपकी आँखों में ऑंखें डाल कर कहे तो वियाग्रा या किसी तेल की क्या जरुरत......लंड खड़ा नहीं होता बल्कि फटने लगता है.

चाची ने मेरे लंड को हिलाना जरी रखा. मैंने कहा, "चाची शायद निचे की तरफ कुछ चुभ रहा है........."

चाची ने कहा, "निचे कहा लल्ला........हंडवों पर.......?"

माँ कसम.....अब तो चाची पुरे फार्म में आ गयी थी. मैंने हाँ में सर हिलाया. चाची ने कहा, "थोडा पीछे होजा बेटा.....
और टाँगें चौड़ी कर........मैं देखू जरा कहाँ चुभा......."

मैंने तुरंत अपनी टाँगें चौड़ी कर ली........और चाची मेरी टांगो के बिच कुतिया की तरह बैठ गयी और मेरे गोटों को देखने लगी.......देख तो क्या रही थी.......मज़े से सहला रही थी.....कभी कभी नाखूनों से रगड़ देती.......कांच ढूंढने के
नाम पर पूरा मज़ा ले रही थी. चाची के ऐसी झुके रहने से ऐसा ही लग रहा था मानो वो मेरा लंड चूसने के लिए ही ऐसे बैठी है. हेयर रिमोवल क्रीम की वजह से मेरे लंड और गोटों पर एक भी बाल नहीं था. चाची मज़े से हाथ फेरे जा रही थी.
तभी उन्होंने मेरे गोटों और एसहोल के बिच की जगह पर सहलाया. मेरे मुंह से सिसकारी और आह दोनों एक साथ निकल गए. चाची ने मेरी और देखा. हम दोनों की नज़ारे मिली और ऐसे ही मेरी आँखों में देखते हुए चाची ने फिर से वहीँ पर सहलाया, मैंने भी चाची के चेहरे पर नज़ारे गडाए हुए एक और आह भरी. चाची उस जगह से सहलाते सहलाते मेरे गोटों से होती हुयी मेरे लंड तक पहुंची और मेरे सुपाड़े की स्किन पीछे करके अपनी उंगली मेरे लंड के छेद पर फिराने लगी. मज़े से मेरी ऑंखें बंद हुयी जा रही थी मगर चाची की नशीली आँखों में देख कर मज़ा आ रहा था. इसलिए मैं एकटक उनको देखता रहा.

अचानक चाची सीधी होकर बैठ गयी और बोली, "चल लल्ला...उठ....और कहीं नहीं लगी है.......बोरोलीन लगाकर कपडे पहन ले.......सब लोग आते होंगे....."

भेनचोद.......लंड कपडे पहन ले.......इसी को कहते है खड़े लंड पर डंडा......KLPD

मैंने कहा, "च च चाची.......प्लीज़.......म म म मेरा प प पानी निकल तो दो.........नहीं तो रात भर दुखेंगा......"

चाची ने टेडी मुस्कान मरते हुए कहा, "वाह रे लल्ला.........खुद ही निकाल ले.......वो तेरे कागजों में.......रोज़ तो मुठ मारता है......"

मैं समझ की साली मादरचोद भाव खा रही है........मगर खड़े लंड की खातिर तो कुछ भी करना ही था.

मैंने थोडा सा आगे झुक कर चाची का हाथ पकड़ा जिससे उन्होंने मेरे लंड को पकड़ा था और उनके हाथ को मेरे लंड के ऊपर हिलाने लगा. चाची मुस्कुराते हुए मुझे देख रही थी. अचानक चाची ने मेरे लंड को कस के पकड़ लिया और उनके चेहरे पर उत्तेजना के भाव आ गए. उन्होंने दांत भींचे हुए थे और मेरे लंड को कस के हाथ में पकडे जोर जोर से मुठ मरने लगी. मैं समझ गया की अब चाची की गांड फट रही है की घरवाले आ न जाये. इसिलए वो जल्दी से मेरा पानी निकलना चाहती है

मैंने भी सोच लिया की आज कुछ भी जाए मेरा पानी जल्दी नहीं निकलने दूंगा. मैंने कहीं पढ़ा था की जब पानी निकलने लगे तो लम्बी लम्बी साँसे लेनी चाहिए पानी जल्दी नहीं निकलता. मैंने लम्बी लम्बी साँसें लेना शुरू कर दिया. चाची को लगा की मेरा निकलने वाला है तो वो और जोर जोर मेरा हिलाने लगी. मगर मैं अब कंट्रोल में आ गया था. जोर जोर से हिलाने के चक्कर में चाची का टोवल ढीला हो गया था, मैंने कनखियों से देखा की चाची का टोवल बस गिरने ही वाला था. तभी चाची ने हिलाना बंद किया और सीधी होकर घुटनों के बल खड़ी हो गयी, टोवल को बस जैसे इसका ही इंतज़ार था, भोसड़ी के ने चाची के मम्मो का साथ छोड़ दिया और 80 साल के बुढ्ढे के जैसे ढेर हो गया. चाची ने झट से अपने मम्मो को एक हाथ से और दुसरे हाथ से अपनी चमेली को छुपा लिया और वो ही रानी मुखर्जी वाली शर्मीली मगर शरारती मुस्कान मारने लगी.

हाय......मैं तो घायल हो गया.

मैंने बड़ी मुश्किल से अपने आप को संभाला. मैं थोडा सा उठा और चाची के हाथ को जो उनके मम्मो को छुपाये हुए था उसको हटा दिया.......चाची ने फिर से छुपा लिया, मैंने चाची के हाथ को कास के पकड़ के उनके मम्मो से हटा कर मेरे दुखी बाबुराव पर रख दिया......बाबुराव तो गुलाब के फूल जैसा खिल गया. चाची ऑंखें तो बंद किये थी मगर मुस्कुरा रही थी. मेरे बाबुराव को पकड़ने के कारण वो थोडा सा झुकी हुयी थी. उनके गोल गोल संतरे अपने चेरी जैसे निप्पलों के साथ मुझे चिड़ा रहे थे. चाची का जोबन मेरे मुंह से सिर्फ कुछ ही दूर था. अचानक मेरी इतनी देर के ठरक आग जैसे भभक गयी और मैंने कचकचा कर उनमे मम्मे को अपने मुंह में ले लिया.

आम खाने के शौकीन जानते होंगे की आम खाने का मज़ा चूस कर खाने में ही है..........बस मैं भी चाची के आम बरसो के भूखे प्यासे जैसे जोर जोर से चूसने लगा.......

चाची के मुंह से ऐसी मादक सिसकारी निकली की मेरा पूरा शरीर सितार के तार की तरह तन गया. चाची का मुंह हैरत और मस्ती के कारण खुल गया था. मैं उनके चेहरे पर आता ये काम वासना के भाव देख रहा था तभी उन्होंने अपनी नज़रे निचे करके मुझे देखा और हमारी नज़रे मिली और उन्होंने एक ज़ोरदार सिसकारी मार दी और जोर जोर से मेरा लौड़ा हिलाने लगी. उन्होंने मेरे बाबुराव को इतना कस के पकड़ा था जैसे वो कोई जहरीला सांप हो और अगर छुटा तो काट खायेगा. चाची सिसकारी पे सिसकारी मार रही थी और जंगलीपन से मेरा लंड हिला रही थी. चाची के मम्मो में से हलकी हलकी चोकलेट की खुशबु आ रही थी.

अरे हां.......चोकलेट......

जिस पिघली हुयी चोकलेट के कारण यह सब हुआ था वो वहीँ पास में बेड साइड टेबल पर पड़ी थी. मैंने चाची का मम्मा छोड़ा और अपने लंड को मुश्किल से उनकी गिरफ्त में से निकाला. उठा और चोकलेट उठा कर उनके दोनों मम्मो पर मसल दी. चाची का मुंह हैरत से खुला का खुला ही रह गया, इसके पहले की वो कुछ बोल पाती मैंने अपना मुंह वापस उनके चोकलेट से लथपथ मम्मो पर लगा दिया और जन्मो जनम के प्यासे की तरह चोकलेट उनके मम्मो से चाटने लगा.

चाची ने अपने सर पीछे की तरफ फ़ेंक दिया और वासना से भरी ऐसी आह भरी की मेरा बाबुराव घंटे की तरह टन टन करने लगा. चाची के मम्मे चोकलेट से चिकने होने के बाद तो जैसे सोफ्टी आइसक्रीम हो गए थे......मैं उनके निप्पल को जैसे चुसना शुरू करता चाची का पूरा बदन सिहरने लगता......उनके पुरे शरीर में हलके हलके झटके लगने लगते....

वो बोली, "हाँ.......हाँ रे.......चूस ले...लल्ला............आह आअह.........उई माँ.......धीरे चूस हरामी......आह"

चाची और मैं दोनों ही बिस्तर पर घुटनों के बल खड़े थे. मैं चाची के मम्मो को भूखे-नंगे की तरह चुसे और चाटे जा रहा था और चाची मेरा बाबुराव अपने हाथों में पकडे मुठियाए जा रही थी. मैंने चाची के चिकने मम्मो को अपने हाथों से भींच रखा था. चाची के मम्मे और निप्पल लाल हो गए थे ऐसा लग रहा था मानो मेरे इस वहशी प्यार से शरमा गए हो.
मैंने अपने एक हाथ चाची के मम्मो से हटा कर उनके नंगो नितम्बो पर रख दिया. मेरी इस हरकत से चाची एक दम किचकिची खाकर मुझसे और जोर से चिपक गयी और अपने मम्मे मेरे मुंह पर दबाने लगी. फिर उन्होंने मेरे बाल पकडे और मेरा मुंह अपने एक मम्मे से हटा कर दुसरे मम्मे पर रख दिया. मैं भी प्यासे सावन की तरह उनके बोबों पर टूट पड़ा. मेरा दूसरा हाथ उनकी विशाल गांड का नाप लेने की कोशिश कर रहा था मगर आखिर वो तो चाची की गांड थी, जिसको नापना मुश्किल ही नहीं........नामुमकिन था. मैंने अपने हाथ उनकी गांड से हटा कर आगे किया और उनकी इमरती जैसे नाभि के चारो और उंगलिया घुमाने लगा. चाची ने फिर से एक सिसकारी भरी और अचानक मेरा मुंह अपने मम्मो से खिंच कर अपने जलते हुए होटों से चिपका लिया.

चाची ने मुझे इस कदर चूस चूस कर किस करना शुरू किया जैसे मुझे सांप ने होटों पर काट लिया हो और चाची को मेरी जान बचाने के लिए मेरे होटों से जहर चूस कर निकलना हो. चाची के इस कदर चूसने से मेरे दिमाग में ...........

कीड़ा कुलबुलाने लगा.......

मैंने किस करते करते ही चाची को थोडा घुमाया और जब उनका जलता बदन बिस्तर की किनारे पर आ गया तो उनको धक्का देकर बिस्तर पर गिरा दिया. इसके पहले की वो कुछ बोल पाती मैंने उनके ऊपर लेट कर अपने होटों से उनके होटों को सील कर दिया. चाची इतने मज़े से किस कर रही थी की मल्लिका शेरावत भी शरमा जाती और अपना इमरान हाश्मी तो चाची के चुम्मे के लिया अपनी तीसरी टांग पे खड़ा हो जाता. चाची ने मम मम....आवाज़े निकलना शुरू कर दिया था. वो लगातार गरम पे गरम हो रही थी और मैं सोच रहा था की बस लोहा थोडा और गरम हो जाये फिर बस ..............

चाची ने मेरे मुंह में अपनी जुबां डाली और मेरी जीभ से अपनी जीभ को लड़ाने लगी. हाय......क्या मज़ा आ रहा था.

मैंने अपने होटों को चाची के होटों से अलग किया और औरतों की सबसे कामुक जगहों में से एक उनकी गर्दन पर कान के निचे की ओर चूमने लगा......चाची के होटों से फिर से आह निकल पड़ी........मैं किस करते करते निचे की और जाता जा रहा था........चाची के मम्मो ने मुझे और निचे जाने से रोकने की कोशिश की मगर मेरा इरादा पक्का था.
लंड खड़ा होने के बाद तो इंसान फरिश्तों की नहीं सुनता .......चाची के मम्मे क्या चीज़ थे......

मैंने अपनी जीभ से चाची की नाभि के चारो और गोला बनाया और धीरे धीरे जीभ से उनकी नाभि को सहलाने लगा. उत्तेजना से चाची का पूरा पेट कांपने लगा.........मैंने चाची की कमर पर चूमा और उनकी कमर पर अपने दांत धीरे से गदा दिए, चाची का पूरा बदन सिहर गया और उनके मुंह से फिर से हाय...निकल गयी.

मेरा निशाना तो चाची की चमेली थी.......भेन्चोद.......आज बच के कहा जाएगी.

मैं निचे और निचे सरकता हुआ चाची के पेरों के पास पहुँच गया. मैंने घुटनों के बल बैठ कर चाची की चिकनी जांघे पकड़ी और जहाँ पर चाची की जांघ पर "बलमा" लिखा था.....वहीँ पर एक ज़ोरदार चुम्मा दे डाला.......चाची के पूरी गांड और कमर बिस्तर से ऊपर उठ गए और उन्होंने वो मादक सिसकारी मारी की उसे सुनकर साधू सन्यासी भी फिर से मोह माया के भंवर में फंसने को आतुर हो जाते......

मैंने चाची की दोनों जांघे पकड़ी और जिस तरह लालची बनिया धीरे धीरे अपनी तिजोरी खोलता है वैसे ही मैंने चाची की जवानी की तिजोरी खोल दी.

हाय.......मर.....जावा.........क्या नज़ारा था...........

चाची की चिकनी चमेली इतनी देर से मेरे ध्यान नहीं देने के कारन मानो नाराज़ थी. बिलकुल गुस्से में लाल होकर मुंह फुलाए बैठी थी. और कुछ आंसू भी टपका दिया थे. चाची के कामरस की कुछ बूंदें उनकी चूत की पंखुड़ियों पर सुबह की ओस जैसी बैठी थी. चाची की चूत पर एक भी बाल नहीं था. इतनी चिकनी थी मानो करीना का गाल हो...........

मैंने एक सेकंड के लिए ये शानदार ठरकी नज़ारा देखा और असली कुत्ते की तरह अपनी जीभ से चाची की चिकनी चमेली पर आई कामरस की बूंदों को चाट लिया. चाची ने इतनी जोर से झटका खाया और सिसकारी मारी की एक सेकंड के लिए मुझे लगा की भोसड़ी की को कहीं जवानी में ही अटेक तो नहीं आ गया. मगर चाची के चूत से किया हुआ यह खिलवाड़ उनका सर घुमा चूका था. उन्होंने सर उठा कर मेरी आँखों में ऑंखें डाली और धीरे से सर हिलाने लगी.............

चाची बोली, " ल ल ल लल्ला........म म म मत कर रे.......गन्दा है.........."

भेन्चोद........कोंन चुतिया चाची की शानदार चिकनी चूत को गन्दा बोलेगा.......वो तो गुलकंद का पीस लग रही थी.

मैंने चाची की आँखों में ऑंखें डाले डाले ही फिर से उनकी चूत की पंखुड़ियों पर अपनी जीभ चलाई.......चाची ने आह भरी और अपने सर पीछे फेंक दिया और अपनी गांड ऊँची करके चिकनी चमेली मेरे भूखे होटों को समर्पित कर दी.

मैंने चाची के चूत के छेद पर अपनी जीभ टिकाई और अपनी जीभ को सिकोड़ कर बिलकुल नोकदार कर दिया, मैं अपनी जीभ को ऊपर चलाता गया और चाची की मुनिया धीरे धीरे गुलाब के फुल की तरह खिलती गयी. चाची की मुनिया का चिकनापन देखने लायक था इतनी चिकनी थी मानो किसी टीनेजर लड़की की हो.....उसमे से नमकीन खुशबु आ रही थी और इतनी देर से जो नंगेपन का नाच चल रहा था उसके कारण इतनी पनियाई हुयी थी की मुझे लग रहा था की मैं किसी शरबत के ग्लास में जीभ से कुत्ते की तरह चाट चाट के शरबत पी रहा हूँ.....

अनुभवी जानते होंगे की औरत की चूत से ज्यादा कामुक उनकी क्लिटोरिस होती है जिसको चना या दाना भी बोलते है.....
मैं अनजाने में ही अपनी जीभ से चाची के दाने को छेड़ बैठा और बेचारी चाची का बचा खुचा कंट्रोल भी ख़तम हो गया और वो ऐसे सिसियाने लगी जैसे उनकी चूत पर किसी ने मिर्च डाल दी हो.......मैं पहले उनकी चूत को धीरे से अपनी जीभ से खोदता और फिर जीभ ऊपर ले जाकर उनके दाने से अपनी जीभ का दंगल करवाता.......चाची ऐसे हाय हाय करके अपनी चूत मेरे मुंह पर दबा रही थी की मुझे सांस लेने में दिक्कत होने लगी.....मैंने उनकी मुनिया की पंखुड़ियों को अपने होटों में दबाया और किस लेने के अंदाज में चूस मारा.....अब तो चाची की मुनिया ढेर हो गयी और जो चाची ने मेरा सर अपनी जन्घो में दबा कर सिसकारी मारी मुझे लगा कहीं जोश जोश में मैंने चाची की मुनिया पर काट तो नहीं लिया.....मगर चाची जोर जोर से साँसे ले कर जोर से फिर बोली, "उईईईई........माँ......आ आ ........"

और चाची का पूरा बदन अकड़ गया........भेन्चोद ने मुझे अपनी टांगों के बीच दबा रखा था, मैं तो ढंग से सांस भी नहीं ले पा रहा था, मेरी गांड भी फटी कि यह चाची को क्या हो गया.......बड़ी मुश्किल से मैंने अपना सर चाची की विशाल जाघों में से निकला और देखा की उनकी ऑंखें बंद थी और वो जोर जोर से सांस ले रही थी......

फिर उन्होंने अपनी ऑंखें धीरे से खोली, उनकी ऑंखें इस कदर नशीली थी मानो उन्होंने 5 -6 पैग लगा रखे हो. अब मैं समझा की चाची का सिग्नल तो डाउन हो गया था.....मगर मेरा नहीं........

बाबुराव गुस्से में अपने सर इधर उधर हिला रहा था........सुपदा बिलकुल फुल कर टमाटर की तरह लाल सुर्ख हो गया था.......चाची ने पहले मुझे देखा और फिर मेरे सांप जैसे लहराते लंड को और मुस्कुरा दी. मैं थोडा आगे होके उनके पास गया और उनका हाथ पकड़ कर अपने गुस्सैल बाबुराव पर रख दिया,

चाची ने फिर जड़ से पकड़ा और बच्चो से बात करने वाली अदा में बोली, "अले अले......देखो तो......कैसा नाराज़ हो गया है.........अभी खुश करती हूँ मेले पप्पु लाला को........." और जोर जोर से मेरी मुठ मारने लगी.....................

मस्ती से मेरी तो ऑंखें ही बंद हो गयी......चाची अपने हाथ से बाबुराव को बेदर्दी से हिलाए जा रही थी मगर बाबुराव भी WWF के पहेलवान जैसे इतनी मार खा के भी डटा हुआ था. चाची ने अपने दूसरा हाथ बड़ा कर मेरे गोटें सहलाने शुरू कर दिया......मैं समझ गया की यह कमीनी अब मेरा जल्दी से निकलने की फ़िराक में है. मेरे गोटों में सुरसुरी शुरू हो गयी मगर मैं आज जल्दी हल्का होने के मुड में नहीं था.........मैंने लम्बी लम्बी साँसे लेना शुरू कर दिया.......जो सुरसुरी मेरे गोटों में शुरू हुयी थी वो बंद हो गयी और चाची के हाथ का कसाव मेरे लंड पर और बढ़ गया.

उन्होंने अब मेरे गोटों को अपने नाखुनो से रगड़ना शुरू कर दिया.......भेन्चोद.....मुझे तो अँधेरे में भी हजारो वॉट की रोशनी दिखने लगी......मैंने बड़ी मुश्किल से अपने गोटों में उबलते हुए लावे को रोका.........

ये साली आज नहीं मानेगी......

मैंने ऑंखें खोली और मेरी नज़र सीधी चोकलेट पर पड़ी. मैंने पक्क से चाची के हाथ से अपने लौड़ा खिंचा और चोकलेट को अपने लंड पर लथेड कर चाची के हैरान चेहरे के सामने कर दिया.......

बाबुराव चोकलेट में लिपटाहुआ मासूम और खूंखार दोनों लग रहा था. मेरे चेहरे पर भी पापा रंजीत वाली मुस्कराहट आ गयी और मैंने चाची के सर को अपने लौड़े की तरफ करके कहा, "च च च चाची.......ऐ ऐ ऐसे नहीं निकलेगा.........
प्लीज़ .........इसे.......च च चूस लो ना........"

चाची एकटक मेरे चोकलेट में लिपटे लौड़े को देख रही थी. मगर उन्होंने चूसने में कोई इच्छा नहीं दिखाई,

मैं चाची के चेहरे से १० इंच की दुरी पर बाबुराव को लाकर धीरे धीरे हिलाने लगा. मैंने फिर कहा, " च च चाची प्लीज़ चूस लो ना.....देखो कैसा तड़प रहा है .......आह ह ह ह ........."

चाची ने मुझे देखा फिर मेरे प्यारे बाबुराव को.......और मेरी आँखों में देखते हुए धीरे से मुंह खोल कर मेरा लाल लाल फुला हुआ सुपाडा अपने होटों के बीच दबा लिया. मेरे मुंह से आह निकल गयी......

चाची के नरम नरम होटों के बीच मेरा सुपाडा फंसा था यह सोच सोच कर ही मेरे फ़रिश्ते भांगड़ा कर रहे थे मगर वो मुंह में मेरा सुपाडा दबाये जिस कातिल अदा से मेरी आँखों से ऑंखें मिलाये हुयी थी, मेरे रोम रोम से पसीना छुट रहा था.

चाची ने मेरे सुपाड़े को धीरे से चुसना शुरू किया........मैंने आज तक ना जाने कितनी बार मुठ मारी थी मगर कभी वो मज़ा नहीं आया था जो चाची के सिर्फ मेरा सुपाड़े के चूसने में ही आ रहा था. साली हरामन ......एकटक मुझसे नज़रे मिलाये हुयी थी. मेरे सुपाड़े को ऐसे चूस रही थी मानो दशहरी आम हो. मुझे तो जन्नत का मज़ा आ रहा था.

चाची ने मेरे सुपाड़े को छोड़ा और अपनी जीभ की नोक से सुपाड़े के छेद को खोदने लगी.......भेन्चोद.....मेरी तो सांस ही रुक गयी......चाची की जीभ लपालप मेरे बाबुराव के छेद को छेड़े जा रही थी और वो बेशरम औरत मेरी आँखों में आये मस्ती के भाव देखे जा रही थी. चाची ने छेद को खोदने के बाद जीभ से सुपाड़े पर सपाटा मारा और छेद से लंड की चमड़ी के जोड़ पर अपनी शरारती जीभ ले आई.......ओह्ह.......स्वर्ग के सारे सितारे और नज़ारे दिख गए भैया.......वहां पर जीभ लाकर चाची ने चमड़ी और सुपाड़े के जोड़ पर जीभ से ठुनकी मरना शुरू कर दी.....मैंने चाची का सर पकड़ा और उसको अपने लंड पर दबाने लगा ताकि वो मेरे सुपाड़े पर रहम खा ले... क्योकि ये सब चलता रहा तो मैं क्या सल्लू बाबा भी अपने कमिटमेंट भूल जाते और पिचकारी छोड़ देते....... चाची ने सुपदे पर हरकत करना बंद नहीं की......बल्कि
उन्होंने सुपाड़े के छेद पर फिर से जीभ घुमाई और लंड की लार पर से जुबान इस तरह उठाई की एक तार सा बन गया.......हाय ये साली तो आज मेरा लंड फोड़ कर ही मानेगी..........लंड की लार और चाची की लार से पूरा सुपाडा तर हो चूका था और मोमबत्ती की रोशनी में चमक रहा था.

मैंने सिसियाते हुए कहा, "आह.......च च चाची.........प प पूरा ले लो.....अ अ अन्दर.......ऊह......आह........"

चाची ने मेरी बात अनसुनी कर दी और मेरे सुपाड़े का बलात्कार करना जारी रखा........मुझे कुछ समझ नहीं आया तो मैंने चाची के बाल पकडे और अपना लंड उनके खुले मुंह पर दबा दिया..........घप्प करके मेरा लंड चाची में मुंह में घुस गया...........

मेरी गांड भी फटी, की साली भेन्चोद नाराज़ हो गयी या नाटक चोदने लगी तो बॉस अपनी तो पक्की KLPD हो जाएगी......

चाची ने पहले तो कोई रिएक्शन नहीं दिया और अचानक उनके होंट मेरे लंड पर कस गए और उन्होंने मेरे लंड को जोर जोर से कुल्फी की तरह चुसना शुरू कर दिया.......अब सर पीछे फ़ेंक कर आँहें भरने की बारी मेरी थी. साली के बाल पकड़ कर थोडा सा कड़कपन दिखाया तो भेन्चोद और गरमा गयी...........और बिलकुल ठरकी पने से लंड को पूरा मुंह लेकर चूसते हुए बाहर लाती और फिर से गप्प से पूरा अन्दर डाल लेती ..... उनका एक हाथ मेरे लंड को जड़ से पकडे था मानो लंड कोई कबूतर है......की छोड़ा तो उड़ जायेगा और उनका दूसरा हाथ मेरे गोटों को सहला और मस्का रहा था. कभी कभी वो मेरे गोटों को नाखुनो से रगड़ देती और मेरी आह और सिसकियाँ निकल जाती.

मेरी सिसकियाँ मुझे ही अजनबी लग रही थी मेरे होंट सुख चुके थे और मेरी ऑंखें खुल नहीं पा रही थी........मेरे गोटों में सुरसुरी शुरू हो गयी थी. मैं समझ गया की गुरु अब नहीं रुके तो फिर घंटा नहीं रुक पाएंगे......मैंने फिर से चाची के बाल पकड़ के उनका सर पीछे खिंचा और मेरा lucky लोडा पक्क की आवाज़ के साथ चाची के भूखे मुंह से बाहर आ गया..........चाची ने साडी चोकलेट चूस चूस कर साफ़ कर दी थी और पूरा लंड चाची की लार से सराबोर था. लंड इस कदर लाल सुर्ख हो गया था की ऐसा लग रहा था की चाची के चुसना बंद कर देने से नाराज़ हो गया है. साला....बार बार ऐसे ठुनकी मार रहा था मानो अभी मारने दोड़ेगा.

चाची ने मुझे आधी खुली नशीली आँखों से देखा और अपनी भंवे उठा कर इशारों में पूछने लगी की क्या हुआ........मैंने कुछ नहीं कहा और धीरे से झुक कर चाची के भीगे होटों पर किस कर दिया...........मर्डर मूवी में तो सिर्फ इमरान हाश्मी ने गाया था की " भीगे होंट तेरे........." मगर उस भीगे होंट का मतलब और स्वाद मुझे आज आया.

बेचारे इमरान को कहाँ मल्लिका के ऐसे भीगे होंट नसीब हुए होंगे.

मैं चाची के नरम मगर गरम होटों को पागलों की तरह चुसे जा रहा था और वो ठरकी औरत गरम पे गरम हुए ही जा रही थी. मेरे हाथ उनको मम्मो तक पहुँच गए और फिर से उनकी बेदर्दी से रगड़ने लगे, चाची किस करते करते ही मम्म मम्म आवाज़ निकल रही थी. वो बिस्तर पर बैठी थी और मैं बेड के किनारे पर नीचे खड़ा था, मैंने किस करते करते ही धीरे से चाची को बिस्तर की ओर दबाया और उनको बिना किस तोड़े बिस्तर पर लेटा दिया और उनके ऊपर आ गया.

जिस का मुझे था इंतज़ार......जिसके लिए दिल था बेकरार........वो घडी आ गयी.......आ गयी....

मैंने इस के पहले चुदाई की ही नहीं थी.......मगर जैसे ही मैं चाची के ऊपर लेटा और मेरा लंड उनके पेट और टांगों से जोड़ से टकराया.....मैंने अपने घुटने बिना कुछ सोचे ही मोड़े और चाची की जांघों में फसा कर उनकी टांगे खोल दी और अपने घुटने के बल लेट गया......ऐसा करते ही मेरे बाबुराव का सामना चाची की चिकनी चमेली से हो गया. मैं थोडा सा आगे झुका और मेरे लंड ने उचल के चाची की चूत की पप्पी ले ली......चाची एक दम सिहर गयी और उनकी ऑंखें खुल गयी..........उन्होंने अपने मुंह मेरे मुंह से अलग किया और बोली, " आह......मत कर.......आह.......हरामी..........हट मेरे ऊपर से........क्या कर रहा था........उठ जा...........आह"

मुझे लगा की अगर चाची की बात मान ली तो KLPD और नहीं मानी और वो नाराज़ हो गयी तो गांड पे डंडा.......भेन्चोद करू क्या ???

मुझे कुछ नहीं सुझा तो मैंने चाची का हाथ पकड़ा और अपने सिसकी मारते बाबुराव पर रख दिया....बेचारा.....अब कुछ तो दें उसको.......और मैंने चाची के निप्पल को धीरे से अपनी जीभ से छेड़ा......चाची फिर बोली, "उठ.....हरामी.......सब आने वाले होंगे......कमीने.........हट....जा......आह.........ऊह......मत कर.......उठ.....आह......"

मुझे समझ आ गया की निप्पल चाची की कमजोरी है.......मैंने अपने मुंह खोला और चाची का मम्मा पूरा का पूरा अपने मुंह में ले लिया और इतनी जोर जोर से चुसना शुरू किया की चाची की आवाज़ पहले तो बंद ही हो गयी और फिर उन्होंने ने ऐसी आह भरी की विद्या बालन भी उनके आगे फ़ैल हो जाती.

चाची ने कचकचा कर मेरे लौड़े को फिर से मुठियाना शुरू कर दिया और मैंने चाची का मम्मा मुंह में लिए लिए ही उनके निप्पल को अपनी जीभ से छेड़ना शुरू कर दिया......अब तो चाची ब्लू फिल्मो की हिरोइन के जैसी जोर जोर से आहें भर रही थी......और चाची की आंहें सुन सुन कर मेरे पसीने निकल रहे थे.

मैं थोडा सा आगे आया......अब लंड चाची की चूत से मुश्किल से 4 -5 इंच दूर था..........मेरा इरादा था की चाची को पता लगे उसके पहले गप्प से अपना लंड पेल दू......
चाची ने मेरे लंड को हिलाते हिलाते ही आगे खीचा.......अब लंड बिलकुल चूत के मुंह पर दस्तक दे रहा था मगर छु नहीं पाया था.......

मैं कुछ करता इसके पहले चाची ने ही मेरे लंड को अपनी चूत पर रगड़ना शुरू कर दिया.........मुझे इतना आनंद आया की मेरे मुंह से निकल गया, "आह......च च चाची...........ऊह........"

अचानक मेरी कमर ने झटका खाया.........ये अपने आप हुआ था.......ऐसा लग रहा था की मेरा शरीर अब मेरे दिमाग का कंट्रोल ले रहा हो........झटका खाने से लंड चाची की चूत में तो नहीं घुस पाया मगर उनकी चूत पर से रगड़ खाता हुआ उनके दाने को छेड़ता हुआ चाची के पेट पर आ गया.....चाची का पूरा बदन गनगना गया...और मेरी तो पहले ही गाड़ी रिज़र्व में चल रही थी.........हम दोनों के मुंह से एक साथ आह निकल गयी.......मेरी कमर ने फिर से झटका खाया और फिर से लंड चाची के चूत पर से फिसल कर निकल लिया.......चाची ने बेचारे अंधे लौड़े को अपने हाथ में पकड़ा और अपनी चूत के मुंह पर रख दिया........ और कांपती आवाज़ में बोली,

" ल ल लल्ला .......बेटा.......क क क कुछ होगा तो नहीं ना...........कंडोम तो लगा ले.......आह......."

भेन्चोद......कंडोम लेन का क्या मेरे बाप को सपना आया था..........कंडोम गया माँ चुदाने.........यहाँ मेरा सब कुछ सुलग रहा था और इस को कंडोम की पड़ी थी......

मैंने दांत भींचे और जोर से झटका देकर अपना लंड चाची की चूत की अटल गहराईयों में उतार दिया. चाची की चूत को चोद चोद कर चाचा ने पहले ही 4 लेन का हायवे बना दिया था.......पक्क से पूरा लंड अन्दर उतर गया और मेरे और चाची के पेट आपस में फक्क की आवाज़ से टकराए......चाची ने जोर से आह भरी और अपनी टाँगें मेरी कमर पर लपेट ली और मुझे तो इतने में ही जन्नत का दरवाजा दिख गया.

चाची की चूत इतनी गरम थी की मुझे लग रहा था की मेरा लंड किसी सेंडविच में है.........चाची की चूत भी दिल की तरह मानो धड़क रही थी.........बिलकुल मखमली एहसास था........लंड अन्दर डाले मैं थोड़ी देर ऐसे ही पड़ा रहा......चाची मेरे नीचे धीरे से हिली और फिर अपनी गांड हिलाने लगी......

फिर बोली, "सस स स...........कर ना.......हरामी.......आह..........."

मैंने अपनी कमर उठाई और धक्का मारा. फटाक से फिर से चाची के पेट से मेरा पेट टकराया.......आज तक इतनी ब्लू फिल्म देखी थी मगर मुझे ढंग से धक्के मारना भी नहीं आ रहा था. चाची फिर बोली, "अरे......आह.........कर ना......कमीने.......ऊह........."

मैंने अपने हाथो को चाची के दोनों और टिकाया और अपने वजन अपने हाथों और घुटनों पर लेकर फिर से लंड चाची की चूत से बाहर निकला और फिर से अन्दर उतार दिया. फिर से चाची और मेरा पेट टकराया और फक्क आवाज़ आई. भेन्चोद......वो आवाज़ से ही आनंद आ गया. चाची फिर निचे से अपनी कमर उचकाने लगी. फिर बोली, "हरामी.......ऐसे ही डाल के मेरे ऊपर पड़ा रहेगा क्या........कर ना..... "

ब्लू फिल्मे देख देख कर इतनी मुठ मार चूका था की अपने आप को चुदाई का ब्लैक बेल्ट समझता था मगर यहाँ धक्के मारना ही नहीं आ रहा था......मैंने अपनी कमर धीरे धीरे हिलाना शुरू की.......क्या मज़ा आ रहा था......मगर चाची भी अपनी कमर हिला रही थी और उनके ऐसे कमर हिलाने से मेरा लंड फिर से चाची की चूत से बाहर आ गया.........

मैंने अपने लंड को हाथ से पकड़ के चाची की चूत में डालने की कोशिश की मगर मेरा बैलेंस बिगड़ गया और मैं घप्प से चाची के ऊपर गिर गया. चाची ने मुझे जोर से धक्का दिया और दांत पीस कर बोली,

"हट हरामी.......चोदना तो आता नहीं......बड़ा आया......परे हट......"

मैं चूतिये जैसे अपने लंड अपने हाथ में पकडे मुंह खोले चाची को देख रहा था.......चाची बिस्तर से उतरी....और पैर पटकते पटकते बाथरूम में चली गयी.......चाची पूरी नंगी थी और इस तरह चलने से उनकी गोल गोल गांड इस कदर हिल रही थी की मेरा दिमाग ख़राब हो गया.....

चाची मुझे इस हाल में छोड़ कर चली गयी थी.

मैंने हिम्मत की और बाथरूम का डोर खटखटाया. चाची अन्दर चिड कर बोली, "क्या है......???"

मैंने अपने बाबुराव को सहलाते सहलाते कहा, "च च चाची......न न नाराज़ मत हो.....प्लीज़.....मैं ढंग से करूँगा.....प्लीज़......आ जाओ "

चाची अन्दर से बोली, "साले.....हरामी.....मुतने तो दे........"

मैंने ठंडी सांस ली.......चलो आ रही है.

चाची ने भड़क से दरवाजा खोला और मुझे अपनी बाँहों में जकड लिया, अपने होंट मेरे होंटों पर जड़ दिए. मैं हक्का बक्का रह गया की यह क्या हुआ.......चाची और मैं दोनों नंगे खड़े थे और पागलों की तरज एक दुसरे तो चूमे चुसे जा रहे थे. चाची मुझे धीरे से धक्का लगते लगते बिस्तर के किनारे ले आई और मुझे धक्का दे कर बिस्तर पर गिरा दिया.

मैं चाची को देखने लगा की यह कर क्या रही है.......चाची ने अपने घुटने मोड़े और मेरे दोनों और अपने पैर करके मेरे ऊपर सवारी करने वाली पोसिशन में आ गयी और बोली, " लल्ला......तुझे तो अभी खेलना आया नहीं.......मैं तुझे बताती हूँ की तेरे जैसे अनाड़ी घोड़े के सवारी कैसे करते है.....तू बस मज़े ले....."

यह बोल कर चाची ने मेरे ठुनकते हुए बाबुराव को पकड़ा और अपनी रस से सराबोर मुनिया के मुंह पर लगा दिया.....इसके पहले की मैं कुछ समझ पाता. चाची मेरे लंड पर बैठ गयी और बाबुराव तलवार की तरह चाची की लपलपाती चूत में उतर गया.

अगर पहले चाची की चूत गरम थी तो अब तो भट्टी बन गयी थी. मेरी तो सांस ही रुक गयी.....इसके पहले की मैं संभल पाता, चाची ने फिर से अपनी गांड उठाई और धप्प से फिर मेरे लंड पर बैठ गयी.

अरे......क्या मज़ा आ रहा था.

चाची ने फिर से अपनी विशाल गांड उठाई और मेरे लंड को चोदने लगी.

कौन सोच सकता था की मेरी सती सावित्री चाची जो घर में अपने सर से पल्लू नहीं गिरने देती थी, हमेशा घूँघट डाले रहती थी वो मेरे नंगी मेरे लंड पर बैठी थी और ऐसे कूद कूद कर मुझे चोद रही थी की यह दुनिया का आखिरी दिन है.

चाची के ऐसे कूदने से उनके मम्मे इस कदर इधर उधर फिंका रहे थे की मुझसे रहा नहीं गया और मैंने कचकचा कर उनके एक मम्मे को अपने हाथों में दबा लिया, मेरा ऐसा करना हुआ और चाची की मस्ती और बढ़ गयी. वो दुगने जोश से मेरे लंड पर कूदने लगी. उनकी ऑंखें आधी खुली थी और वो इतनी जोर जोर से सांस ले रही थी मानो दमे की मरीज़ हो. फटाक फटाक की आवाज़े पुरे रूम में घुंज रही थी और चाची के बिखरे बाल इधर उधर हो रहे थे....ऐसा लग रहा था की उन पर कोई भुत चढ़ गया है........

जैसे मेरा लंड चाची के चूत में पूरा उतर जाता उनके कुल्हे मेरी जांघों में फटाक की आवाज़ से टकराते और उनके मम्मे और उनकी नाभि के आसपास का पेट का हिस्सा थरथरा जाता.....चाची बिना रुके अपनी गांड फिर से उठती और फटाक की आवाज़ के साथ फिर अपनी गांड मेरे लंड पर पटक देती. उनकी चूत इस कदा पनिया चुकी थी की वो जैसे ही अपनी गांड उठाती और मेरा लंड चूत में से थोडा बाहर निकलता तो पूरी तरह से चाची के काम रस में भीगा होता. ऐसी कड़क चुदाई होने से लंड पर मख्खन जैसे सफ़ेद सफ़ेद झाग दिखने लगे थे. सच ही तो था....आखिर चाची मेरा मख्खन ही तो निकाल रही थी. मेरे दोनों हाथ उनके मम्मो को मसल मसल कर लाल कर चुके थे........अब मैंने उनके मम्मो से हाथ हटा कर उनकी गांड को दबोच लिया था और लेटे लेटे ही उनके कुलहो को मसल रहा था........

चाची ने अब मेरे लंड पर कूदने बंद करके अपनी गांड हिलाना शुरू कर दिया....वो मेरे लंड को अपनी चूत में पूरा अन्दर तक डाले अपनी गांड मेरी जांघो पर घिस रही थी......और मेरे गोटों भी इस रगड़ का पूरा आनंद ले रहे थे.......

चाची अचानक ही जोर जोर से साँसे लेने लगी और उनकी आखें बंद हो गयी.....उन्होंने हिलना बंद करके अपनी चूत को एक दम सिकोडा और मानो उनकी चूत मेरे लंड को चूसने लगी.....चाची के एक हाथ अपने मम्मे पर गया और वो खुद ही जोर जोर से अपने मम्मो को रगड़कर दबाने लगी.....यह सीन देखकर तो दद्दू भी पहलवान हो जाते मैं तो पहले से ही ठरक की ट्रेन में चदा हुआ था.....मैंने अपना हाथ बढ़कर उनके दुसरे मम्मे को पकड़ा और अपने अंगुली और अंगूठे के बिच उनके निप्पल को लेकर चुटकी में मसल दिया.....चाची के मुंह से हाय निकली और वो मेरे ऊपर गिर सी गयी.

अचानक मुझे मेरे लंड पर गिला गिला सा लगा और फिर मेरे गोटों से होता हुआ पानी मेरी जांघों को भी भिगो गया.
मैंने सिर्फ सुना था की कुछ औरतों का climax होने पर वो भी पानी छोडती है मगर मेरी तो पहली चुदाई में ही बरसात हो गयी.

चाची मेरे ऊपर लेटी हुयी लम्बी लम्बी साँसे ले रही थी........फिर वो धीरे से उठी और मेरा lucky लोडा फच्च की आवाज के साथ चाची के चूत में से बाहर आ गया. चाची पेट के बल मेरे बगल में लेट गयी........

भेन्चोद.......यह क्या ? अबे मेरा क्या ?

मैंने चाची से कहा, "च च च चाची.......मेरा निकला नहीं......आ आप निकाल दो........."

चाची धीरे से बोली, " हाय राम.....लल्ला......तू तो सांड ही है रे.........अब तो मुझमे शक्ति नहीं है रे..........तू हाथ से ही हिला ले......"

इसकी माँ की चूत.......घंटा हिलाले हाथ से..........साली भेन्चोद खुद तो मज़े से उछल उछल कर लंड ले लिया और अब बोल रही है की हिला ले.........

मैंने फिर कहा, " च चाची......व.व..वो.......आप.....कुछ ....करो.....ना ......"

चाची तो ऑंखें बंद किये पड़ी थी.......बोली, "लल्ला.......सब आनेवाले होंगे......तू या तो निकाल ले.....या फिर तेरे रूम में जा......."

मैंने बड़ी मुश्किल से अपने गुस्से को काबू किया..........मैं उठ कर घुटने के बल बिस्तर पर खड़ा था.......और मेरा मायूस लंड अभी भी पूरा खड़ा था और उलटी लेटी चाची की गांड को देख देख कर ठुन्कियाँ मारे जा रहा था.

मेरा तो मुड ही ख़राब हो गया. मैंने सोचा की चल भाई......रूम में चलते है.......अँधेरे में ही मुठ मार लेंगे....

मोमबत्ती भी फडफडा कर मानो मेरी हाँ में हाँ मिला रही थी

चाची ने उलटे लेटे लेटे ही अपने सर घुमा कर मुझे देखा और कहा,

" जा लल्ला.....सब आते होंगे......और सुन.....मेरा गाउन दिखा क्या ? देख तो ज़रा कहाँ रखा है......."

गाउन वहीँ चाची के सिरहाने पड़ा था....चाची के नज़र उस पर पड़ी और वो उठी........

मैं चाची के पीछे था.....चाची उठी और बिलकुल कुतिया की तरह पोसिशन में आ गयी......उन्होंने गाउन उठाने के लिया हाथ आगे बढाया जिससे उनकी गांड और उठ गयी और उनकी चूत का भीगा छेद मेरे सामने आ गया.......मैं चाची के पीछे घुटने के बल खड़ा था.....मेरा लंड बिलकुल चूत के सामने ही था.

मैंने कुछ नहीं सोचा और पापा रंजीत का नाम लेकर चाची की कमर पकड़ी और एक झटके में अपना लंड उनकी चूत में पेल दिया.

"हाय राम.........आआह.....आअ.....हा.......हाय........छोड़ ह ह हरामी........आ......ह......उई मा......", चाची की चीख से मेरा गुस्सा और बढ़ गया......मैंने कचकचा कर दांत पिसे और अपने लंड चाची की चूत में से खिंच कर दुगनी ताकत से वापस उनकी चूत में पेल दिया......मेरा पेट चाची के गद्देदार कुलहो से टकराया और फटाक की आवाज़ पुरे कमरे में गूंज गयी......मैंने अपनी कमर कुत्ते की तरह चलाना शुरू कर दी.....हर धक्के पर मेरा पेट चाची की गांड से टकराता और मेरा जोश और बढ़ जाता.....

चाची कराहती हुयी बोली, "हाय.....रा....राम.........हरामी......कमीने.........छोड मुझे......आह........ ध ध धीरे कर......"
मगर मेरे सर पर तो खून सवार था......धीरे तो दूर मैं तो और जोर जोर से धक्के मारने लगा..........चाची ने थोडा आगे होके बचने की कोशिश की......तो मैंने हाथ बड़ा कर चाची के कन्धों पर रख लिए और उनको वहीँ पर जकड लिया और पहले से भी और जोर से उनकी चूत की ठुकाई करने लगा......

चाची के मुंह से हाय और आह दोनों एक साथ निकाल रही थी......उस भेन्चोद को मज़ा भी आ रहा था और शायद थोडा दुःख भी रहा था....मगर मैं तो अब लंड परवाह करने वाला नहीं था.....मेरा पूरा शरीर पसीने में भीग चूका था.....और मेरे टट्टे हर झटके के साथ चाची की खुल चुकी चूत के दाने से टकरा रहे थे.......

चाची ने फिर से आगे बढ़ कर बचने की कोशिश की.....मैंने उनके खुले बाल पकडे और जैसे घुड़सवार घोड़े के लगाम पकड़ते है मैंने उनके बाल पकड़ कर उनकी चूत को बेदर्दी से पेलना शुरू कर दिया.....

चाची की हाय अब कम हो गयी थी और वो भी जोर जोर से मज़े के सिसकियाँ लेने लगी.....अब तो चाची भी मेरे हर धक्के का जवाब पलटे में धक्का मार कर दे रही थी.....उनके मुंह पीछे मुडा और हमारी ऑंखें मिल गयी.....

मेरा पूरा चेहरा तना हुआ था.....दांत भींचे हुए थे और चाची का मुंह उत्तेजना से खुला हुआ था.......मेरी आखो में देखते देखते ही चाची से अपने सूखे होटों पर जुबान फेरी और मेरे धक्के और तेज़ हो गए.

अब मेरे हर धक्के पर उनकी गांड जेली की तरह थरथरा रही थी.......और उनके मम्मे तो लावारिस सामान की तरह इधर उधर फिंका रहे थे.

चाची के मुंह से फिर आवाज़ निकली,

"हाय......मार डाला.......हरामी.......आह......सांड ही है तू तो........हाई.........उई.........हाँ......हाँ.......ऐसे ही.............आह .......ठोक......आह...........कमीने.....धीरे.....आह."

मैं तो सब भूल चूका था.....मुझे सिर्फ चाची की हिलती गांड और उनकी नशीली ऑंखें ही दिख रही थी.....चाची फिर से चिल्लाई " आह......लल्ला.....आ.....आ......आ............मार.....हाँ........आअ.....मैं तो.....गयी......रे......."

मेरे तो खुद के गोटों में वो सनसनी और सुरसुरी मची हुयी थी की बस ये गया और वो गया.....

चाची ने हाय हाय करते हुए जोर से अपनी गांड को मेरे लंड पर झटका और मेरे लंड को अपनी चूत में सिकोड़ कर पकड़ लिया.......मेरे लंड का लावा उफनने ही वाला था......चाची ने हुनकर भरी और जोर से मेरे लंड पर एक और झटका मारा और चिल्लाई......"मैं तो गयी रे..........मेरे......बलमा........हाय......."

और मैंने भी एक दो करारे झटके मारे और मेरे लंड से उबलता हुआ लावा सीधा चाची के लपलपाती चूत में धार पे धार मारते हुए उतरने लगा.........मेरा पूरा शरीर सनसना रहा था.....मेरी आँखों के सामने अंधेरा सा छा गया और मेरे गोटों ने पूरा अमृत चाची की चूत को अर्पित कर दिया.

चाची ऐसे पेट के बल लेट गयी उनका पूरा बदन थरथरा रहा था.....मेरा लंड अभी भी चाची के चूत में फंसा था और अभी तक बूंद बूंद अमृत चाची की भूखी चूत में टपका रहा था........मैंने चाची के कंधे को चूम लिया और जैसे ही चाची ने गर्दन घुमाई मैंने उनके होटों को अपने होटों में जकड लिया और फ्रेंच किस करने लगा.......

चाची के मुंह से अभी भी म्मम्म म्मम्म आवाज़ आ रही थी.....कहाँ तो मुझे चोदना भी नहीं आ रहा था और कहाँ मैंने इतनी से देर में चाची को दो बार झाड़ दिया था.

मेरी नज़र बिस्तर के पास टेबल पर पड़ी चोकलेट पर पड़ी........मैंने चोकलेट अपनी अंगुली में ली और चाची को चटा दी.....

चोकलेट तो बनती थी....

आखिर मेरा शुभारम्भ हो गया था.........

सुबह आँख फ़ोन की घंटी से खुली.......भोसड़ी का ऐसे चीख रहा था मानो उस की चूहे जैसी गांड में हाथी जैसा लंड फंसा हो.
मैंने बंद आँखों से ही फ़ोन टटोला और बिना नम्बर देखे उठा लिया. मैंने जैसे हेल्लो कहा......

"तुम अगर मोबाईल उठाते नहीं तो रखते क्यों हो........"

मैं कन्फ्यूज हो गया की भेन्चोद ये कौन है ?

मैंने कहा, "ह ह ह हेल्लो ???? कौन ?"

"अच्छा जी........अब मैं कौन ........तुम सोये थे क्या ?", पिया ने पूछा.

जैसे करंट का झटका एक सेकंड में पूरा शरीर हिला देता है वैसे ही उसकी आवाज़ ने मुझे एक झटके में जगा दिया.

मैंने कहा, "न न न नहीं......म म म मेरा मतलब है की हाँ.......वो म मैं.....सोया था......."

"ओके ओके ......अच्छा एक बात बताओ.......तुम कितनी देर में तैयार हो सकते हो....?" उसने पूछा...

मैंने कहा, "म्म...यार मुझे.....एक घंटा तो लगेगा........क्यों क क्या हुआ.....?"

"अरे यार....मेरा अपनी फ्रेंड्स के साथ मूवी का प्रोग्राम था........फर्स्ट डे फर्स्ट शो......वो है ना......सलमान खान की ...........तो मैं ना कन्फ्युसन में गलत थियटर पर आ गयी हूँ....अरे वो बिग.......अब क्या है की यार कॉलेज की तो बंक मार दी है.....घर जा नहीं सकती......यहाँ पर ऑटो भी नहीं मिल रहा....तुम आ सकते हो क्या ...... "

नेकी और पूछ पूछ............. कोई चुतिया ही मना करता......

मैंने कहा, "पिया.....म.म.मैं.....१० मिनट में आ रहा हूँ......"

मैं बेड से सीधा कूदा और फटाफट शोवर लिया.......फिर याद आया की ब्रुश नहीं किया.......फटाफट ब्रुश किया और ब्लैक टी शर्ट और जींस पहनी और भागा.

वो कहते है ना की किस्मत में लिखे हो लौड़े तो कहाँ से मिलेंगे पकोड़े.......

बाहर देखा तो मेरे बाप का 90 मॉडल का स्कूटर गायब था.

मेरा चाचा जो कभी स्कूटर नहीं चलाता था.....भेन्चोद आज स्कूटर ही ले गया.

मेरे मुंह से गाली ही निकल गयी. इधर उधर देखा और सोचा की अब क्या करू....? वहां पर वो हसीना मेरा इंतज़ार कर रही है और मैं यहाँ लंड हिला रहा हूँ.......

तभी मेरी नज़र कपूर अंकल पर पड़ी......वो शायद सब्जी लेकर आये थे.......गाड़ी स्टैंड पर ही लगा रहे थे....मैंने सोचा चलो चांस मारते है.....

मैंने कहा, " अंकल.....गुड मार्निंग......"

वो बोले, "ओ ...गुड मोर्निंग बेटे जी......."

मैंने कहा, "अंकल वो ......आप कहीं जा रहे है क्या ?..."

वो बोले, " ओ नहीं जी.....क्यों क्या हुआ.."

मैंने कहा, "अंकल वो क्या है की.....आज चाचा गाड़ी ले गए है और मेरा टेस्ट है कॉलेज में.....क्या म म मैं आपकी गाड़ी ले जाउ....."

वो बोले, " ओ श्युर बेटे जी......मगर आप चला लोगे ना....."

कपूर अंकल की बुलेट कांच जैसे चमचमा रही थी. भोसड़ी का अपनी बीवी को कम रगड़ता होगा और बुलेट को ज्यादा.
वैसे तो मैंने एक दो बार बुलेट चलायी थी मगर मेरी गांड बुलेट से फटती थी....साली 100 -200 किलो की गाड़ी......गिर जाये तो 4 आदमी उठाने के लिए चाहिए...

मैंने कहा, "हाँ हाँ अंकल.....च च चला लूँगा.......मैं 3 -4 घंटे में आता हूँ....."

अंकल ने गाड़ी की चाबी दी.....भगवन की दया से गाड़ी बटन स्टार्ट थी......मैंने गाड़ी स्टार्ट की तभी अंकल बोले.....
"अरे बेटे जी.....आज हेलमेट नहीं लगाते क्या.....ये लो....मेरा लगा लो.....सेफ रहता है"
यह बोलकर उन्होंने अपना हेलमेट मुझे दे दिया..

मैंने हेलमेट लगाया और गेयर मार कर निकल लिया.

आंधी तूफान जैसे गाड़ी चला कर मैं थियेटर पहुंचा.....बेचारी पिया बाहर ही खड़ी थी. उसने ब्लू जींस और ब्लू टॉप पहना था.....मस्त लग रही थी.

मैंने हेलमेट का ढक्कन हटाया और उसे बुलाया.....

पिया ने एक सेकंड तो मुझे घुरा फिर पहचान गयी और फिर बोली, " वाव....आज तो क्या बात है......बुलेट पर स्मार्ट लग रहे हो.."

मैंने उसे बैठने के लिए कहा.....वो मेरे पीछे बिंदास लोंन्डों की तरह दोनों और पैर करके बैठ गयी. मैंने गाड़ी जैसे ही आगे बड़ाई गाड़ी झटका खाकर बंद हो गयी. मैंने भगवान का नाम लेकर फिर से स्टार्ट की...हो गयी.
और हम दोनों वहां से निकल लिए.

मैंने गाड़ी उसके घर के रस्ते पर डाली तो वो बोली, "अरे तुम कहाँ जा रहे हो.....?"

मैंने कहा," तुम्हारे घर......क्यों ?"

वो बोली, "अरे तुम पागल हो क्या.....बोला ना की घर पर कॉलेज का बोल कर आई हूँ....."

मैंने कहा, " त त तो अब कहाँ जाओगी......?"

वो बोली, "कहाँ जाउंगी मतलब .........ऐसे पूछो की अब कहाँ चले ?"

मेरी गांड फटी......भेन्चोद सुबह सुबह इस कश्मीर की कली को कहाँ ले जाऊ.

वो बोली, "अच्छा चलो वो तालाब वाली रोड पर चलते है.......मज़ा आएगा."

तालाब वाली रोड.....तालाब के चारो और बनी सड़क थी.....एक तरफ पहाड़ियां और दूसरी तरफ तालाब...........शहर के जितने लैला मजनू थे. वो वहीँ पर पूजा पाठ करते थे मतलब आप समझ ही गए.

मैं तो कभी वहां गया नहीं था.....जाता किसके साथ ?
मगर मेरे कुछ दोस्त जो अपनी अपनी गर्लफ्रेंड के साथ वहां गए थे....किस्से सुना सुना के मेरी गांड जलाते थे. मैंने सोचा चलो आज तालाब वाली रोड भी देख लेते है.

बात करने के कारण मैं बुलेट स्लो चला रहा था. मैंने धीरे से स्पीड बड़ाई और बुलेट हवा से बातें करने लगी. तभी पिया ने अपने हाथ बड़ा कर मेरी जांघ पर रख दिया.
ठीक वैसे ही जैसे बहुत सी भाभियाँ अपने पतियों की जांघ पर हाथ रख कर बैठती है.

मेरे दिमाग के मोबाईल में नेटवर्क आना ही बंद हो गया. उसने बड़े ही आराम से हाथ रखा था मगर मुझे उसका हाथ 10 -15 किलो का लग रहा था. मेरा ध्यान हाथ पर होने के वजह से मुझे स्पीड ब्रेकर नहीं दिखा और मैंने अच्छी स्पीड में ब्रेकर से गाड़ी कूदा दी. बेचारी पिया का भी ध्यान नहीं था. बैलेंस बनाने के चक्कर में वो आगे झुकी और उसके तपते हुए मम्मे मेरी पीठ पर बेदर्दी से आ सटे. पतली सी टी शर्ट में से मुझे उसके निप्पल महसूस हो रहे थे. उसने बैलेंस बनाने के चक्कर में अपने हाथ मेरी जांघ से हटा कर मेरी कमर में डाल लिए थे और मुझसे बिलकुल चिपक कर बैठी थी.

मेरा बाबुराव खुश होकर गाना गा रहा था......"ज़िन्दगी एक सफ़र है सुहाना.........यहाँ कल क्या हो किसने जाना......"

तभी मेरी गांड की फटफटी फुल स्पीड में चालू हो गयी...........

सामने से पिया का भाई........वो सांड........नवजोत भी बाइक पर आ रहा था और उसकी नज़र हमारे ऊपर ही थी. शायद उसने पिया को पहचान लिया था. पिया ने जैसे ही उसको देखा, बोली ,

"शील......फटाफट यहाँ से चलो .....अगर भाई ने तुमको मेरे साथ देख लिया तो गज़ब हो जायेगा................वो कुछ भी नहीं सुनेगा......प्लीज़.......गाड़ी भगाओ......"

उसके बोलने के पहले ही मेरी फटी हुयी गांड से भागने का सिग्नल मेरे दिमाग को मिल चूका था. मैंने बुलेट का कान (एक्सीलेटर) मरोड़ा और फुल स्पीड में तूफान की तरफ निकल लिया. हम जैसे ही नवजोत से क्रोस हुए, वो चिल्लाया...."अबे ओये............ओये पिया.........रुक.........ओये........"

उसकी सांड की आवाज़ सुन के मेरी बचीखुची हिम्मत भी BSNL के नेटवर्क जैसे गायब हो गयी. मैंने गाड़ी ऐसे दौड़ाई की मानो मेरे पीछे सन्नी देओल अपना ढाई किलो का हाथ लेकर आ रहा हो.

बुलेट के आगे उस सांड की बाइक कहाँ ठहरती.....

आगे एक मोड़ था, मैंने मोड़ लिया और बुलेट को एक गली में घुसेड दिया. थोड़े ही देर में नवजोत सांड अपनी बाइक से फुल स्पीड में क्रोस हुआ और सीधा चला गया.
उसने हमें नहीं देखा था. मैंने बुलेट मोड़ी और जिस रस्ते से आये थे उसी पर गाड़ी डाल दी. मेरी तो ठीक पर पिया की गांड भी फट के गले में आ गयी थी. वो बिलकुल चुपचाप बैठी थी.

मैंने उससे कहा, "उस सांड ने ....म.....म.....म.......मेरा मतलब है की नवजोत ने तुम्हे पहचान लिया था क्या ? अब क्या करे ? "

कुछ लड़कियों में गज़ब की डेरिंग होती है..........और कुछ बिलकुल गांडफट.

पिया बोली, "पता नहीं यार........घर चलो........अगर वो पहले पहुँच गया तो हंगामा कर देगा........"

मैंने पिया को तो उसके घर के मोड़ पर ही छोड़ दिया......कहीं सांड बुलेट देख लेता तो..........तुरंत घर आया और कपूर अंकल को उनकी बुलेट सधन्यवाद लौटा दी.

मेरा मन नहीं लग रहा था.......मैंने सोचा पिया से पुछु की क्या हुआ......? उसका मोबाईल लगाया.......बंद था.

मेरी गांड फटी........मगर ये मालूम करना जरुरी था की आखिर क्या हुआ........मैंने हिम्मत जुटाई और उसके घर पर फ़ोन लगाया. घंटी बजी, उस सांड ने ही फ़ोन उठाया. फोन पर उसकी आवाज़ भोंगे जैसी गूंज रही थी......

मैंने कहा, "ह ह हेल्लो.......प प पिया है....."

वो बोला, "कौन बोल रहा है.........."

मैंने अपनी फटती हुयी गांड को काबू में करके कहा, "म म म ....मैं......श श शील......."

वो बोला, "अरे हाँ........शील.........बोल..........क्या हाल है.......आज पढ़ाने नहीं आएगा क्या ?"

मेरी आवाज़ बड़ी मुश्किल से निकली, "ह ह ह हाँ.....वो........श...श....शाम को आऊंगा ना......"

वो बोला, "हाँ......ठीक है.....पिया अभी घर पर नहीं है.........बाद में लगाना......."

ये बोल कर उसने फोन रख दिया और मेरे समझ नहीं आ रहा था की यह हुआ क्या......पिया को तो मैं अभी घर छोड़ कर आया था.

थोड़ी देर में अंकित जो मेरा कॉलेज का फ्रेंड था......फ़ोन आया.......

वो बोला, "अबे आज कॉलेज नहीं आ रहा है क्या ?"

मैंने मना किया तो वो बोला, "अबे सब काम छोड़ आ जा........आज तो गजब सीन है......."

मैंने पूछा, " क्या हुआ ? "

वो बोला, "अबे मेरे को किसीने बताया की सुबह सुबह वो नवजोत सांड की बहन......अरे वो पिया........किसी लौंडे के साथ तालाब वाली रोड पर घूम रही थी, उसको वहां पर सांड ने देख तो लिया था मगर लड़का कौन था ये सांड को पता नहीं......बोले तो लड़के ने हेलमेट लगा रखा था......मगर गाड़ी बुलेट थी......तो कॉलेज के जितने भी लौंडो के पास बुलेट है......उन सबकी तो सांड गांड ही ले रहा है........अबे आजा मज़ा आ जायेगा.........."

जैसे बाईक में पेट्रोल ख़तम हो जाने पर झटके लगते है वैसे ही मेरी बची खुची हिम्मत भी ख़तम होने से मेरी गांड की फटफटी झटके खाने लगी.

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शाम को पिया को पढ़ने का समय नजदीक आ रहा था और मेरा BP बड़ा जा रहा था. मैंने सोचा की कहीं उस सांड ने मुझे पहचान लिया तो...............

मगर अगर मैं पिया को पढ़ने नहीं गया तो भी सांड को शक हो सकता है......भेन्चोद समझ नहीं आ रहा था की करू तो क्या करू.......उसके ऊपर से चाची मुझसे जब भी बात करती तो इस तरह से टेडी मुस्कान मारती मानो कह रही हो की अभी आके ठोक दो.......

मेरा हल्का हल्का सर दुःख रहा था.......मैं छत पर चला गया. बादल छाये थे........हलकी हलकी हवा भी चल रही थी.....और चाची वहां पर कपडे सुखा रही थी. उन्होंने अपने पल्लू को अपनी कमर में फंसा रखा था. इस कारण से उनकी नाभि साफ़ साफ़ दिखाई दे रही थी. पल्लू छाती पर भी इतना कसा था की उनके मम्मे मचल मचल जा रहे थे.

मैं जा कर एक टूटी हुयी कुर्सी पर बैठ गया..........पुरे मोहल्ले में हमारी छत सबसे ऊँची थी और मुझे वहां से सबकी छत दिखाई दे रही थी और दिख रहा था चाची का साडी में लिपटा बदन. मेरी निगाहें चाची के बदन को धीरे धीरे सहलाने लगी. चाची ने एक दो बार मुझे देखा और होंट दबाकर मुस्कुराते हुए कपडे सुखाने लगी. मैं बैठे बैठे उन्हें घूरने लगा......

चाची कपडे सुखाते सुखाते बोली, "क्यों रे लल्ला.......कोई काम धाम नहीं है क्या........निकम्मों जैसे आके बैठ गया........कॉलेज क्यों नहीं गया......."

मैंने बोला, "अरे गया था.....आज कोई सर नहीं आये इसलिए मैं जल्दी आ गया......."

मैं फिर बोला, "चाची.....कपडे ज्यादा है क्या......."

चाची बोली, "हाँ रे..........दो दिन के है ना......."

मैं उठा और उनके पास जाके खड़ा हो गया. मैंने डबल मीनिंग कहा, "आप कहो तो दबा दबा कर पानी निकाल दूँ........."

चाची ने झुके झुके ही मुझे देखा और टेडी मुसकन मारकर बोली, "लल्ला.......दबा दबा कर पानी ढंग से नहीं निकलता रे........अच्छे से दबा कर निचोड़ना भी पड़ता है........अगर अच्छे से दबा कर नहीं निचोड़ा तो मज़ा नहीं आता........कपडे गिले गिले ही रह जाते है..."

साली....इतनी ठरकी है है की क्या बोलू......

मैंने कहा, "चाची......अब आप को खुजली तो नहीं हो रही ना....."

चाची ने अनजान बन के पूछा, "कौन सी खुजली......."

पहले तो मुझ से बोलने नहीं बना फिर मैं पूछा, "वो आपको होती थी ना खुजली......मैंने ट्यूब ला कर दिया था......"

वो बोली, "अरे हाँ वो.......अब तो ठीक है......कभी कभी हो जाती है........तो क्या करू ...? ट्यूब लगा लूँ ना........"

मैंने कहा, "हाँ.....चाची......ऐसे मौसम में वहां पर खुजली ज्यादा ही होती है.........आप क्रीम लगा लिया करो........"

चाची बोली, "हाँ रे......पर बीच में लगाने पर कुछ होगा तो नहीं...."

ठंडी हवा में भी मेरे कान गरम हो गए.......मैंने पूछा, " बी... बी... ...बीच में मतलब......"

चाची ने मेरी आँखों में देखा और कहा, "अरे लल्ला......बीच में मतलब........उस जगह में ......लगा लूँ ना.....क्रीम......वहां पर खुजली हो रही है......."

ठरक के कारण मेरी आवाज़ ही नहीं निकाल रही थी.....चाची ने फिर से एक कपडा उठाया और बड़ी अदा से उसको निचोड़ा.......ऐसा लगा मानो ये मेरा बाबुराव है और चाची उसको.......हाय.......साला जींस में फिर से तम्बू तन गया था.

चाची कपडा निचोड़ कर उसे छत की मुंडेर पर सुखाने लगी. उनकी BMW कार जैसी लम्बी चौड़ी गांड मेरी नज़रों के सामने थी.....चाची कपडा फ़ैलाने के लिए थोडा सा झुकी हुयी थी बार बार कपडा फ़ैलाने के कारण उनकी गांड इस कदर थरथरा रही ही मानो मुझे बुला रही हो.

बाबुराव इस कदर कड़क हो चूका था की लो वेस्ट जींस में उसको जगह ही नहीं मिल पा रही थी. मैंने सोचा की बाबुराव को भी सेट करना पड़ेगा नहीं तो भोसड़ी का जींस फाड़ देगा. मैंने चेन खोली और अन्दर हाल डाल कर मेरे लंड को सही करने लगा........मगर लो वेस्ट जींस की चेन इतनी छोटी होती है की उनमे से मुतने की लिए लंड ही नहीं निकल पाता है....हाथ क्या घंटा अन्दर जाता. मज़बूरी में मैंने जींस का बटन खोला और जींस थोड़ी सी नीचे की, मुझे अपनी अंडरवियर भी थोड़ी सी नीचे करनी पड़ी.
मैं बाबुराव को ऊपर करके सेट करने लगा.

अचानक चाची पीछे मुड़ गयी और मेरे हाथ से जींस छुट गयी.

अंडरवियर तो मैं पहले ही निचा कर चूका था.....बाबुराव आधा अंडरवियर में छुपा चाची को निहारने लगा. चाची ने अपने हाथ मुंह पर रखा और बोली,

"हाय राम.....बेशरम........क्या कर रहा है रे..........खुल्ले आम ही नंगा हो गया हिरसू......हाय राम.........."

मेरे मुंह से कुछ निकला ही नहीं.....मैंने झुक कर जींस उठाने की कोशिश की तो मेरी अंडरवियर नीचे ही खिसक गयी और मेरा खड़ा हुआ बाबुराव फनफना कर बाहर आ गया.

चाची बोली, "राम.......छोरे.....इसको तो अन्दर कर....." उनकी नज़र मेरे लपलपाते लंड पर थी.

मैंने कहा. "चाची .....मैं......वो......अरे ये........अन्दर करता हूँ........वो अंडरवियर में नहीं आ रहा था.......मैं.......वो .....सॉरी...."

तभी नीचे से किसी ने चाची को आवाज़ दी......चाची ने अनसुनी कर दी........फिर से आवाज़ आई तो चाची ने मुंडेर से मुंह निकाल कर नीचे झाँका और चिल्लाई....

" अरे कौन है.......गला फाड़े जा रहा है..........अरे कोमल भाभी........हाँ खाना बन गया .........मैं कपडे सुखा रही हूँ............"

कोमल भाभी हमारे पड़ोस में कुछ ही दिन पहले रहने आये रिषभ भैया की वाइफ.........चाची से उनकी बहुत अच्छी पटती थी.....दोनों दिन भर पटर पटर बाते करती रहती थी. वो ही अपने घर की छत पर खड़ी खड़ी चाची से बातें कर रही थी. कोमल भाभी अपने घर की छत पर थी जो हमारे घर से लगा हुआ था. मगर हमारी छत से एक मंजिल नीचे थी. इसलिए कोमल भाभी को चाची का थोडा सा हिस्सा दिखा रहा था और वो मुझे नहीं देख पा रही थी.

चाची मुझे भूलकर उनसे बातों में लग गयी थी, "और सुनाओ......कल वो मिश्रा आंटी क्या बोल रही थी.......हाँ यार.....उनको तो पूरा मोहल्ले की गोसिप पता है...."

नीचे से कोमल भाभी बोली, "अरे नीलू भाभी.........आप मानोगे नहीं की क्या हुआ.......मिश्रा आंटी बता रही थी की वो कोने वाले घर में जैन साहब रहते है ना उनकी बड़ी बहु का अपने देवर से ही चक्कर है......अरे हाँ तो........"

चाची मुंडेर पर पूरी तरह से झुकी हुयी थी.......उनकी गांड इस कदर उभर कर बाहर आ गयी थी की मेरा मन सावन के मौसम में बावला हो गया.

मैं आगे बड़ा और मैंने अपने हाथ चाची के उभरे नितम्बो पर रख दिया. चाची एक दम से चुप हो गयी......नीचे से कोमल भाभी चिल्लाई...."क्या हुआ नीलू चाची...."

चाची क्या बोलती......मैंने धीरे धीरे से चाची के नितम्बो को सहलाना शुरू कर दिया........चाची एक दम कड़क हो गयी और उन्होंने पीछे पलट कर मुझे देखा. मैंने भी बेशरम जैसे उनकी आँखों में ऑंखें डाल कर उनकी मख्खन गांड को दबाना जारी रखा.

कोमल भाभी फिर से चिल्लाई...." अरे क्या हुआ नीलू चाची...."

चाची ने मुझे घूरते हुए कोमल भाभी से कहा "अरे कुछ नहीं......वो एक दो कपडे निचोड़ना भूल गयी........"

मेरा बाबुराव लपलपा कर अंडरवियर से बाहर आ गया था......सावन की ठंडी ठंडी हवा उसको सहला रही थी.......और वो भड़वा मस्ती में ठुनकी पे ठुनकी मारे जा रहा था.

चाची ने कोमल भाभी से पूछा, "वो जैन साहब की बहु......क्या नाम है उसका........हाँ सुषमा.......सच में उसका अपने देवर से चक्कर है क्या ?"

मैंने चाची की साड़ी धीरे धीरे ऊपर करना शुरू कर दी. भरे दिन में चाची की गदरायी टांगो से साड़ी ऐसे उठ रही थी मानो किसी नाटक के स्टेज से पर्दा उठता है. इंच इंच करकर उनकी चिकनी टंगे नंगी होती जा रही थी. चाची के हाथ मुंडेर पर टिके थे और वो कोमल भाभी की बातें सुनने की कोशिश कर रही थी. चाची ने मेरा हाथ अपनी गांड पर से हटाने के लिए अपनी गांड मटकाई......मगर मैंने उनकी साड़ी ऊपर उठाना जारी रखा.